कैग रिपोर्ट के बाद पूर्वोत्तर रेलवे का बड़ा कदम, पेयजल गुणवत्ता सुधारने को अभियान तेज
कैग रिपोर्ट के बाद पूर्वोत्तर रेलवे ने यात्रियों को शुद्ध पानी उपलब्ध कराने के लिए गोरखपुर सहित विभिन्न मंडलों में ...और पढ़ें

पूर्वोत्तर रेलवे। जागरण
HighLights
कैग रिपोर्ट के बाद पूर्वोत्तर रेलवे ने पेयजल गुणवत्ता अभियान चलाया।
गोरखपुर सहित विभिन्न मंडलों में 2,725 पानी परीक्षण हुए।
कैग रिपोर्ट में पूर्वोत्तर रेलवे की पेयजल गुणवत्ता असंतोषजनक थी।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट आने के बाद रेलवे एक्शन में है। पूर्वोत्तर रेलवे ने यात्रियों को शुद्ध पानी पिलाने के लिए मुख्यालय गोरखपुर समेत लखनऊ, वाराणसी और इज्जतनगर मंडल में अभियान शुरू किया है। स्वास्थ्य निरीक्षक और सुपरवाइजर, रेलवे स्टेशनों, कार्यालयों और कालोनियों में मिल रहे पानी की गुणवत्ता की जांच कर रहे हैं।
अभी तक 2,306 अवशिष्ट क्लोरीन परीक्षण, 374 जीवाणु संर्वधन परीक्षण एवं 45 रासायनिक परीक्षण सहित कुल 2,725 पेयजल गुणवत्ता परीक्षण किए जा चुके हैं। यह अभियान आगे भी नियमित जारी रहेगा।
कैग रिपोर्ट के बाद रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी सतीश कुमार ने माना था कि साफ और सेफ ड्रिंकिंग वाटर की उपलब्धता एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इसे सुनिश्चित करने के लिए प्रोटोकाल लागू होने चाहिए। पूरे सिस्टम के सही रखरखाव की जरूरत है, जिसके बाद सोर्स पर पानी की क्वालिटी की टेस्टिंग के साथ लगातार इंस्पेक्शन भी अनिवार्य है।
रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव की पहल पर भारतीय रेलवे स्तर पर पेयजल की गुणवत्ता को लेकर अभियान चलाया जा रहा है। जिसकी रिपोर्ट दिल्ली तक जा रही है। बोर्ड स्तर पर समीक्षा की जा रही है। रेलवे बोर्ड ने इसका एक्शन प्लान भी तैयार किया है। एक्शन प्लान को लागू करने के लिए बोर्ड अध्यक्ष ने 27 अगस्त को पत्र लिखकर सभी महाप्रबंधकों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किया था।
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भारतीय रेलवे स्तर पर जारी कैग 2026 की रिपोर्ट में 16 जोन में पूर्वोत्तर रेलवे (एनईआर) 11वें पायदान पर है। पेयजल की जांच में एनईआर ने 42.79 का स्कोर प्राप्त किया है, जो तय मानक के हिसाब से संतोषजनक नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार एनईआर के 15 स्टेशनों पर जीवाणु और 14 स्टेशनों पर अवशिष्ट क्लोरीन की जांच नहीं हुई है। 17 स्टेशनों पर रासायनिक परीक्षण हुआ ही नहीं। 14 स्टेशनों पर निर्धारित अवधि के अनुसार रासायनिक परीक्षण नहीं किया गया। टैंक की सफाई से संबंधित अभिलेख भी 11 स्टेशनों पर नहीं हैं।
रेल यात्रियों और रेल कर्मचारियों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पेयजल गुणवत्ता की जांच के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। जहां भी पेयजल गुणवत्ता से संबंधित प्रतिकूल परिणाम प्राप्त हो रहे हैं, वहां तत्काल आवश्यक सुधारात्मक कार्यवाही की जा रही है।
