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नेपाल में जलप्रलय का एक माह: उजड़े घर, बिखरी जिंदगी, फिर से बसने की चुनौती बड़ी

By Rajnish TripathiEdited By: Vivek Shukla
Published: Sat, 26 Sep 2026 09:33 AM (IST)

नेपाल में जल प्रलय के एक महीने बाद भी हजारों परिवार बेघर और विस्थापित हैं, जहां घर और गृहस्थी दोबारा ...और पढ़ें

नेपाल के धादिंग के बैरेनी में सड़क पर जमा सिल्ट को हटाता बैकहोलोडर। -जागरण सूत्र

नेपाल के धादिंग के बैरेनी में सड़क पर जमा सिल्ट को हटाता बैकहोलोडर। -जागरण सूत्र

HighLights

  1. जल प्रलय के एक माह बाद भी हजारों परिवार बेघर।

  2. राहत और पुनर्वास कार्य अभी भी अधूरा है।

  3. नेपाल में 5,786 लोग अब भी लापता हैं।

रजनीश त्रिपाठी, गोरखपुर। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी अपनी गति से बहने लगी है। पानी उतर गया, सड़कों पर मलबा साफ होने से आवाजाही लौट रही है, लेकिन विष्णु सुवेदी और श्रीकृष्ण नेपाल की जिंदगी वहीं खड़ी है, जहां 26 अगस्त की जल प्रलय ने उसे रोक दिया था। धादिंग के बैरेनी में रहने वाले विष्णु और नुवाकोट में लामुसोती के श्रीकृष्ण अपने घर की चौखट तक नहीं लौट सके, क्योंकि घर नाम की कोई चीज ही नहीं बची।

वे रिश्तेदारों के घर किसी तरह दिन गुजार रहे हैं। नेपाल के रसुवागढ़ी में 26 अगस्त को आए जल प्रलय ने इन नदियों की घाटी की पूरी तस्वीर ही बदल दी। खेतों का अस्तित्व खत्म हो गया तो घरों-दुकानों को बाढ़ के साथ आए करोड़ों घन मीटर मलबे ने कई फीट नीचे दबा दिया। सड़क और पुल बह गए, हजारों परिवार उजाड़ गए। मोबाइल फोन पर बातचीत में विष्णु बताते हैं कि उनके सामने सवाल केवल तत्काल राहत का नहीं, घर और गृहस्थी दोबारा खड़ी करने का है।

विस्थापित परिवारों के लिए रसुवा व नुवाकोट में चल रहे होल्डिंग सेंटर में रहना बहुत कठिन है। सरकार ने वैकल्पिक आवास की व्यवस्था होने तक अधिकतम छह महीने के लिए परिवार के आकार के अनुसार मासिक नकद सहायता का प्रविधान किया है, मगर जिंदगी को पटरी पर लाने के लिए वह नाकाफी साबित हो रहा।

श्रीकृष्ण नेपाल कहते हैं कि एक महीने बाद भी वह हादसा बीती हुई घटना नहीं, बल्कि रोज जी जाने वाली हकीकत है। बचाव का कठिन दौर भले पीछे छूट गया, लेकिन राहत और पुनर्वास अभी अधूरा है। हजारों लोग अब भी लापता हैं। सामान्य जीवन की वापसी मुश्किल बनी हुई है।

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13 हजार को सुरक्षित निकाला, 5,786 अभी लापता
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के 22 सितंबर तक जारी आंकड़ों के अनुसार त्रासदी में 1,451 लोगों की मौत हुई है। 5,786 लोग लापता हैं। इनमें रसुवा के 3,513 और नुवाकोट के 1,747 लोग शामिल हैं। सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के साथ स्थानीय लोगों ने भी बचाव में बड़ी भूमिका निभाई है।

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अब तक 13,784 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। बचाव अभियान में दो हजार से अधिक हेलीकाप्टर उड़ानें हुई हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार करीब 10 हजार परिवारों को तत्काल राहत की जरूरत थी। स्वास्थ्य केंद्रों, पानी और स्वच्छता व्यवस्था को भी नुकसान पहुंचा है।

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