नेपाल त्रासदी: सिल्ट से पटे स्कूल के 16 कमरे, पहचान में नहीं आ रहे कंप्यूटर-बैग, कीचड़ में सनी किताबें
नेपाल में त्रिशूली नदी की बाढ़ से श्री बागेश्वरी माध्यमिक विद्यालय बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, जहाँ 16 कमरों में ...और पढ़ें

HighLights
16 कमरों में दो से चार फीट तक सिल्ट जमा।
15 कंप्यूटर और पुस्तकालय की हजारों किताबें नष्ट।
छात्र, अभिभावक मिलकर स्कूल की सफाई में जुटे।
विश्वदीपक त्रिपाठी, बैरेनी (धादिंग)। श्री बागेश्वरी माध्यमिक विद्यालय बैरेनी। चारों तरफ कीचड़ और सन्नाटा। सभी 16 कमरों में दो से चार फीट तक सिल्ट। क्लास में रखे कंप्यूटर, कीबोर्ड पर जमी गाद की मोटी परत और दीवारों पर टंगे बच्चों के बनाए चार्ट विनाश की भयावह तस्वीर दिखा रहे हैं।
त्रिशूली नदी से करीब एक किलोमीटर दूर स्थित विद्यालय में पानी इतनी तेजी से आया कि बच्चों को अपनी कापी-किताबें समेटने तक का अवसर नहीं मिला। अब बाढ़ के बाद बच्चे उसी परिसर में लौटे हैं, लेकिन पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि अपनी कक्षाओं से सिल्ट निकालने। किसी के हाथ में फावड़ा है तो कोई बाल्टी से मलबा बाहर कर रहा है। अभिभावक और क्षेत्र के प्रबुद्धजन भी उनके साथ जुटे हैं। सबकी चिंता है कि विद्यालय जल्द से जल्द फिर शुरू हो।
कीचड़ से सने कमरे में अपना बैग खोज रही प्रीति
प्रथम तल पर कक्षा दो की छात्रा प्रीति कुमारी महतो कीचड़ से सने कमरे में अपना बैग खोज रही थी। बस्ता मिला तो उसके चेहरे पर खुशी आ गई। ज्यादातर किताबें खराब हो चुकी थीं, लेकिन कुछ नोटबुक के पन्ने बच गए थे। प्रीति कहती है कि वह बचे हुए पन्नों को नई कापी में उतार लेगी।
भूतल के एक कमरे में कक्षा 10 का छात्र दीपक फावड़े से सिल्ट हटा रहा था। वह बताता है कि सुबह सात से नौ बजे तक उसने अपने सहपाठी सौरभ और अर्जुन श्रेष्ठ के साथ मार्निंग क्लास की थी। घर से तैयार होकर सभी 10 बजे असेंबली में पहुंचे। तभी त्रिशूली में बाढ़ आने की सूचना मिली और बच्चे अपनी कापी-किताबें कक्षा में छोड़कर ऊंचे स्थान पर चले गए।
दीपक की नजर दीवार पर लगे बच्चों के बनाए चार्ट पर टिक जाती है। सौरभ बताता है कि उसकी सारी किताबें इसी कमरे में रह गईं, जो अब कीचड़ में दब चुकी हैं।
ऊंचे स्थान पर पहुंच बचाई 450 बच्चों की जान
विद्यालय की प्रधानाचार्य ज्ञानू थापा बताती हैं कि बाढ़ से स्कूल को भारी नुकसान हुआ है। उस समय मौजूद 450 छात्र-छात्राएं और 27 अध्यापक समय रहते ऊंचे स्थान पर पहुंच गए, जिससे सभी सुरक्षित बच गए। वह कहती हैं, अगर पांच मिनट की भी देर होती तो अनहोनी हो जाती।
पुस्तकालय की हजारों किताबें, विज्ञान प्रयोगशाला के उपकरण और विद्यालय के सारे रिकार्ड रेत में दब गए। सबसे ज्यादा नुकसान कंप्यूटर लैब को हुआ है, जहां सरकार की मदद से 15 कंप्यूटर लगाए गए थे। बाढ़ के दूसरे दिन से ही प्रधानाचार्य ने अभिभावकों के साथ सफाई शुरू करा दी।
तीसरे दिन भूतल के तीन कमरे सिल्ट से खाली किए जा चुके हैं। शिक्षक सूर्य प्रसाद निमाल कहते हैं, स्कूल बंद रहेगा तो बच्चों का भविष्य अंधकार में चला जाएगा। कई बच्चे तो बाढ़ के बाद से सदमे में हैं। स्कूल खुलेगा, दोस्त मिलेंगे, तभी वे सामान्य हो पाएंगे।
विद्यालय की आठ ऊपरी कक्षाएं सुरक्षित हैं। प्रधानाचार्य इन्हीं कमरों से पढ़ाई शुरू करने की तैयारी में हैं। शिक्षा अधिकारी को पत्र भेजकर अस्थायी रूप से टेंट और किताबों की व्यवस्था कराने का आग्रह किया गया है। सिल्ट हटाते बच्चों के चेहरों पर थकान है, लेकिन वे रुके नहीं हैं।
