नेपाल त्रासदी : बूढ़ी आंखों में बेटे के लौटने की आस, पत्नी की आंखों में आंसू, बच्चों का सवाल-पापा कब आएंगे?
मधुबनी के रंजीत कुमार नेपाल त्रासदी में सात दिनों से लापता हैं, जिससे उनके परिवार में मातम पसरा है। बूढ़े ...और पढ़ें

रंजीत कुमार के इंतजार में रोते बिलखते स्वजन।
HighLights
रंजीत कुमार नेपाल त्रासदी में सात दिनों से लापता, परिवार चिंतित।
मधुबनी के लौकही में बूढ़े माता-पिता बेटे का इंतजार कर रहे।
पत्नी, बच्चे सकुशल वापसी की उम्मीद में, दूतावास से संपर्क।
संवाद सहयोगी, लौकही (मधुबनी)। नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण प्राकृतिक त्रासदी ने लौकही के एक परिवार की खुशियां छीन ली हैं। मंसापुर पंचायत के मंसापुर धत्ता टोल निवासी भोला प्रसाद गुप्ता के 39 वर्षीय पुत्र रंजीत कुमार सात दिनों से लापता हैं। उनका अब तक कोई सुराग नहीं मिलने से घर में मातम पसरा है।
बूढ़े मां-बाप की आंखें हर पल बेटे के लौटने की राह ताक रही हैं। परिवार को अब भी भरोसा है कि रंजीत सकुशल लौटेंगे और घर की खामोशी फिर से खुशियों में बदल जाएगी।
हर आहट पर दरवाजे की ओर नजर
रंजीत के लापता होने के बाद से पत्नी मंजू देवी, माता-पिता और भाई का रो-रोकर बुरा हाल है। घर से उठती चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग भी पहुंच जाते हैं। परिवार की स्थिति देखकर पड़ोसियों की आंखें भी नम हो जाती हैं। मां-पिता को हर आहट पर लगता है कि शायद बेटा लौट आया। मगर हर बार इंतजार ही हाथ लगता है।
बाल कटवाने निकले, फिर नहीं लौटे
रंजीत की पत्नी मंजू देवी ने बताया कि उनके पति नेपाल के रसुवा जिले के सेलेटार मैलूम क्षेत्र में काम करते थे। वे अमस्ता हाइड्रो सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से एंडरीज कंपनी में अपर त्रिशूली-1 परियोजना में कार्यरत थे।
26 अगस्त की सुबह करीब दो घंटे तक उनसे बातचीत हुई थी। इसके बाद रंजीत बाल कटवाने के लिए बाजार गए थे। इसी दौरान क्षेत्र में प्राकृतिक आपदा की घटना हुई। इसके बाद उनका मोबाइल बंद हो गया और उनसे संपर्क नहीं हो सका।
तीन बच्चों को पिता का इंतजार
पति की चिंता में मंजू देवी की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। वह बार-बार अपने तीन छोटे बच्चों को देखती हैं और फफक पड़ती हैं। उनके सामने अब बच्चों की परवरिश की चिंता भी खड़ी हो गई है।
रंजीत के तीन बच्चे हैं, जिनमें एक बेटी और दो बेटे हैं। बच्चे भी लगातार अपने पिता के लौटने की राह देख रहे हैं। उन्हें अब भी उम्मीद है कि पापा आएंगे और उन्हें अपने सीने से लगा लेंगे।
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दूतावास से भी लगाई गुहार
रंजीत के भाई राजकुमार गुप्ता ने बताया कि घटना की जानकारी नेपाल स्थित भारतीय दूतावास को दी गई है। परिवार लगातार संबंधित स्तर पर संपर्क कर रंजीत के बारे में जानकारी लेने का प्रयास कर रहा है। इसके बावजूद सात दिन बीतने के बाद भी उनके संबंध में कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी है।
उम्मीद के सहारे बीत रहे दिन
सात दिन गुजर चुके हैं, मगर परिवार की उम्मीद अब भी कायम है। घर के आंगन में पसरा सन्नाटा और परिजनों की आंखों में छलकते आंसू रंजीत के इंतजार की कहानी बयां कर रहे हैं।
बूढ़े माता-पिता को अब भी विश्वास है कि उनका बेटा किसी दिन अचानक दरवाजे पर दस्तक देगा। उस दिन घर की खामोशी टूटेगी और आंगन फिर से रंजीत की आवाज और मुस्कान से गुलजार हो उठेगा।
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