Nepal में ‘हिंदू राष्ट्र’ की मांग को जनसमर्थन! लोग बोले- नेपाल तो हिंदू राष्ट्र है ही, राजनीति ने बिगाड़ा माहौल
नेपाल में आम जनता धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के दर्जे को स्वीकार नहीं कर पाई है और देश को हिंदू राष्ट्र मानती ...और पढ़ें

नेपाल में "हिंदू राष्ट्र" की मांग को जन मन का समर्थन। फोटो- रॉयटर
HighLights
नेपाली जनमानस धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के दर्जे को नहीं मानता।
सुनसरी में सांप्रदायिक टकराव के बाद हिंदू राष्ट्र की मांग।
राजनेताओं पर नेपाल की हिंदू पहचान बिगाड़ने का आरोप।
आशुतोष मिश्र, गोरखपुर। "नेपाल तो हिंदू राष्ट्र है ही"। जोर पकड़ती हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर आम नेपाली जनमानस की यह प्रथम प्रतिक्रिया है। सोनौली सीमा के पार नेपाल की सिद्धार्थ नगर पालिका में लोक मन टटोलने के प्रयास में स्पष्ट हुआ कि नेपाली जनमानस धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के दर्जे को आत्मसात नहीं कर सका है।
वहां के बहुसंख्यक समाज के मन में देश की पहचान हिंदू राष्ट्र के रूप में ही अंकित है। ऐसे में कहना गलत न होगा कि सुनसरी में हुए सांप्रदायिक टकराव के बाद उठी हिंदू राष्ट्र के दर्जे की मांग को जन मन का समर्थन है।
सोनौली सीमा पार करते ही हिमालय टूर एंड ट्रैवल्स के विराज गुरु संभावित ग्राहकों को सुखद यात्रा का भरोसा देते मिलते हैं। यहां आने वाले पर्यटकों को लुभाने के लिए वह नेपाल के नक्शे में दमकते हिंदू मंदिरों के नाम गिनाते हैं।
अपनी बातों से वह लोगों को बाबा पशुपतिनाथ, मां गुप्तेश्वरी मंदिर, मनोकामना देवी से लेकर जनकपुर धाम तक ले जाते हैं। हिंदू संगठनों की मांग को लेकर वह समूचे नेपाल को हिंदू आस्था का केंद्र बताते हैं। कहते हैं- "सरकारों ने इस मुद्दे पर केवल राजनीति की है।
आज नहीं तो कल, नेपाल को हिंदू राष्ट्र का दर्जा मिलकर ही रहेगा।" कुछ दूरी पर स्टार हालीडे होटल के सामने खड़े मैनेजर रामचंद्र उपाध्याय पूछते ही कहते हैं-"नेपाल तो हिंदू राष्ट्र ही है।"
आरोप लगाते हैं- "नेपाल के राजनेताओं ने देश की पहचान मिटाने का प्रयास किया, लेकिन इसमें विफल रहे। यहां का आमजन देश की धर्मनिरपेक्ष पहचान को मन से स्वीकार नहीं कर सका है।"
सिद्धार्थ होटल एसोसिएशन के एडवाइजर विष्णु शर्मा बिगड़े माहौल से प्रभावित व्यापार को लेकर चिंता जताते हुए शांति और सौहार्द्र की वकालत करते हैं। वह हिंदू राष्ट्र का दर्जा देने की मांग सफल होने को जटिल मानते हुए कहते हैं कि यदि ऐसा होगा तो अच्छा होगा।
मुस्लिमों को नहीं "हिंदू राष्ट्र" से कोई दिक्कत
सिद्धार्थ नगर पालिका के मेयर इश्तियाक अहमद खान के मुताबिक, नेपाल में जब राजशाही थी तब नेपाल हिंदू राष्ट्र ही था। चार सौ साल से अधिक समय यहां के मुस्लिमों को कभी इससे कोई दिक्कत नहीं हुई।
नेपाल की हिंदू राष्ट्र के रूप में जो पहचान है वह जन मन में कायम है। इससे किसी को कोई ऐतराज नहीं रहा। इस मुद्दे को तूल देकर कुछ संगठन माहौल खराब कर राजनीतिक स्वार्थ साधने की कोशिश कर रहे हैं।
राजनीति ने बिगाड़ा माहौल, इसलिए टकराव
विश्व हिंदू महासंघ, रुपन्देही के पूर्व जिला अध्यक्ष गोपाल उपाध्याय कहते हैं कि नेपाल में 81 प्रतिशत हिंदू हैं, लेकिन धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के दर्जे से पहले यहां कभी सांप्रदायिक टकराव नहीं हुआ।
कुछ राजनीतिक दलों के लोगों ने व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए नेपाल को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित कर दिया। जबसे किया गया, तबसे नेपाल में सांप्रदायिक घटनाएं होने लगीं। इसलिए, नेपाल को जल्दी से जल्दी हिंदू राष्ट्र घोषित करना जरूरी है।
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