सोशल मीडिया से बालेन शाह चला रहे नेपाल में सरकार; संसद दरकिनार, उठने लगे सवाल
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के कामकाज पर चार महीने में ही गंभीर सवाल उठने लगे हैं, उन पर संसद और संवैधानिक संस्थाओं को दरकिनार करने के आरोप हैं।

बालेन शाह के काम करने के तरीकों पर उठे सवाल। (फाइल)
HighLights
प्रधानमंत्री बालेन शाह के कामकाज पर गंभीर सवाल उठे।
संसद और संवैधानिक संस्थाओं को दरकिनार करने के आरोप।
भारतीय और चीनी राजदूतों से मिलकर विदेश नीति बदली।
डिजिटल डेस्क, काठमांडू। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के काम करने के तरीके पर चार महीने के भीतर ही गंभीर सवाल उठने लगे हैं। उन पर संसद और संवैधानिक संस्थाओं को दरकिनार करने के आरोप लग रहे हैं।
नेपाल के संविधान के अनुच्छेद 81 के अनुसार, प्रधानमंत्री के लिए यह जरूरी है कि वे राष्ट्रपित को देळ के कामकाज के बारे में जानकारी देते रहें। इन चार महीनों में, बालेन शाह ने राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल के साथ नीति से जुड़ी एक भी बैठक नहीं की और अध्यादेशों पर चर्चा करने के निमंत्रण को भी ठुकरा दिया।
30 अप्रैल के शुरू हुआ संसद सत्र अगले ही दिन अचानक स्थगित कर दिया गया और आठ नए अध्यादेश जारी किए गए। उन्होंने संसद में मधेस हिंसा और बजट जैसे मुद्दों पर सवालों का जवाब देने से भी परहेज किया।
इस बीच, उन्होंने कैबिनेट की औपचारिक मंजूरी मिलने से एक दिन पहले ही फेसबुक के जरिए स्वास्थ्य और शिक्षा पर 3% टैक्स लगाने की घोषणा कर दी, जबकि आलोचकों की आवाज दबाने के लिए डिजिटल साधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
विदेश नीति में बदलाव
बालेन शाह ने सोमवार को प्रधानमंत्री कार्यालय में भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव और चीनी राजदूत झांग माओमिंग के साथ मुलाकात की। 136 दिन पहले पद संभालने के बाद से किसी विदेशी राजदूत के साथ यह उनकी पहली औपचारिक आमने-सामने की बैठक थी।
भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव के साथ बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री शाह ने भारत के साथ नेपाल के ऐतिहासिक संबंधों को और मजबूत करने और साझा हितों वाले क्षेत्रों में मिलकर काम करने पर जोर दिया।
वहीं, चीनी राजदूत झांग माओमिंग ने द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने, विकास साझेदारी और आपसी सहयोग पर चर्चा करने के लिए प्रधानमंत्री शाह से मुलाकात की।
अमेरिकी राजदूत से मिलने से किया था इनकार
इससे पहले, नेपाल के पीएम ने विदेशी दूतों से अकेले बंद दरवाजों के पीछे न मिलने का नियम बनाया था। इस नीति के तहत, उन्होंने अमेरिकी विदेश विभाग के सहायक सचिव और ट्रंप प्रशासन के एक विशेष दूत से मिलने से इनकार कर दिया था। हालांकि, अब उन्होंने अपनी नीति में बदलाव किया है।
