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नेपाल सीमा पर चौकसी के बावजूद तस्करों का नेटवर्क पड़ रहा भारी, सुरक्षा एजेंसियां चिंतित

Published: Sun, 11 Jan 2026 07:43 AM (IST)Updated: Sun, 11 Jan 2026 08:58 AM (IST)

नेपाल सीमा पर सुरक्षा एजेंसियों की चौकसी के बावजूद मादक पदार्थ तस्करों का नेटवर्क मजबूत हो रहा है। हर साल ...और पढ़ें

एजेंसियों की पकड़ से बाहर गिरोह, महराजगंज से बहराइच फैला दायरा। जागरण

एजेंसियों की पकड़ से बाहर गिरोह, महराजगंज से बहराइच फैला दायरा। जागरण

HighLights

  1. नेपाल सीमा पर मादक पदार्थ तस्करों का नेटवर्क मजबूत हो रहा।

  2. कच्चे रास्तों और पगडंडियों से होती है तस्करी।

  3. अंतरराज्यीय रणनीति से ही तस्करी पर लगेगी लगाम।

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। नेपाल सीमा पर तैनात सुरक्षा एजेंसियों की चौकसी के बावजूद मादक पदार्थ तस्करों का जाल लगातार मजबूत होता जा रहा है। हर साल बड़ी मात्रा में गांजा, चरस, हेरोइन और स्मैक की बरामदगी के बावजूद तस्करी करने वाले नेटवर्क को पूरी तरह तोड़ने में एजेंसियां अब तक सफल नहीं हो सकी हैं।

सीमा से सटे जिलों में दर्ज मामलों के आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि कार्रवाई के बाद भी तस्करों के रास्ते और तरीके लगातार बदल रहे हैं। सीमा से सटे महराजगंज जिले में वर्ष 2025 में 30 मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें 40 आरोपित गिरफ्तार किए गए हैं।इसी तरह सिद्धार्थनगर जिले में वर्ष 2025 में 30 एनडीपीएस मामले दर्ज हुए, जिनमें 38 तस्कर पकड़े गए।

बहराइच जिले में 48 मामलों में 53 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है। आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि भले ही केस दर्ज हो रहे हैं, लेकिन तस्करी का नेटवर्क लगातार सक्रिय बना हुआ है।सुरक्षा एजेंसियों की जांच में यह तथ्य सामने आया है कि मादक पदार्थ तस्करी करने वाले गिरोह मुख्य सड़कों और चेक पोस्ट से बचकर कच्चे रास्तों और पगडंडियों का इस्तेमाल करते हैं।

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सीमावर्ती गांवों के खेतों, जंगलों और नदी किनारे के इलाकों से होकर गांजा, चरस और हेरोइन आसानी से सीमा पार पहुंचाई जाती है। इन रास्तों पर न तो स्थायी निगरानी होती है और न ही तकनीकी संसाधनों की पर्याप्त व्यवस्था।अधिकतर मामलों में तस्करी के कैरियर पकड़े जाते हैं, जबकि नेटवर्क के सरगना सीमा पार सुरक्षित रहते हैं।इसी वजह से हर गिरफ्तारी के बाद भी नेटवर्क दोबारा सक्रिय हो जाता है।

सुरक्षा एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती 
नेपाल सीमा पर तस्करी रोकना एजेंसियों के लिए लगातार चुनौती बना हुआ है। सीमावर्ती इलाकों की भौगोलिक स्थिति, खुली सीमा और सीमित संसाधनों का फायदा उठाकर तस्कर नए-नए रास्ते तैयार कर लेते हैं। एजेंसियों का मानना है कि जब तक अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेटवर्क को तोड़ने की रणनीति नहीं बनेगी, तब तक सिर्फ बरामदगी और गिरफ्तारी से तस्करी पर लगाम लगाना मुश्किल रहेगा।

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