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अब कोहनी की फिजियोथेरेपी होगी आसान, MMMUT के छात्रों ने बनाई स्मार्ट व पोर्टेबल मशीन

Published: Sat, 03 Oct 2026 12:03 PM (IST)

गोरखपुर के मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के छात्रों ने चोट या सर्जरी के बाद कोहनी की फिजियोथेरेपी के लिए ...और पढ़ें

नौ महीने में तैयार स्मार्ट मशीन का एक मरीज पर महीने भर का परीक्षण हुआ सफल, पेटेंट भी मिला। फोटो- स्वयं

नौ महीने में तैयार स्मार्ट मशीन का एक मरीज पर महीने भर का परीक्षण हुआ सफल, पेटेंट भी मिला। फोटो- स्वयं

HighLights

  1. MMMUT छात्रों ने किफायती पोर्टेबल कोहनी फिजियोथेरेपी मशीन विकसित की।

  2. मशीन मोबाइल नियंत्रित, घर पर व्यायाम और उपचार लागत घटाती है।

  3. भारतीय पेटेंट प्राप्त, एक मरीज पर सफल परीक्षण किया गया।

डा. राकेश राय,  गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के छात्रों ने चोट या सर्जरी के बाद कोहनी की फिजियोथिरैपी आसान बनाने वाली किफायती मशीन तैयार की है। यांत्रिक अभियांत्रिकी विभाग के सहायक आचार्य डा. आरवी प्रसाद के मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय के छात्र रुद्रांश नाथ त्रिपाठी, सौरभ दुबे, राहुल कुमार मिश्रा, गर्वित चौहान और ओम पांडेय को मात्र नौ महीने में यह मशीन विकसित करने में सफलता मिली है। यह मशीन कोहनी को 10 से 110 डिग्री तक मोड़ने में मदद करेगी।

मशीन में मोबाइल फोन से नियंत्रण, अभ्यास की गिनती और हाथ की लंबाई के अनुसार समायोजन की सुविधा होगी। पोर्टेबल होने के कारण मरीज घर पर भी निर्धारित व्यायाम कर सकेगा। इससे बार-बार फिजियोथेरेपी केंद्र जाने की जरूरत और उपचार का खर्च कम करने में मदद मिलेगी। एक मरीज पर एक माह के परीक्षण में सकारात्मक परिणाम मिले हैं। मशीन को भारतीय पेटेंट विभाग से पेटेंट का प्रमाण-पत्र भी मिल चुका है।

डा. आरवी प्रसाद के अनुसार कोहनी की चोट और सर्जरी के बाद मरीज के लिए नियमित व्यायाम बेहद जरूरी होता है। इसके लिए इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक मशीनें सामान्य तौर पर महंगी होने के साथ भारी भी होती हैं। ऐसे में टीम ने ऐसी मशीन विकसित करने पर काम शुरू किया, जिसे मरीज अपनी जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल कर सके। करीब नौ महीने के प्रयास के बाद तैयार मशीन को पोर्टेबल स्वरूप दिया गया है।

डा. प्रसाद ने बताया कि मशीन में हाथ की अलग-अलग लंबाई के अनुरूप बदलाव की सुविधा होने से इसे मरीज के शरीर के अनुसार समायोजित किया जा सकता है। मोबाइल फोन से संचालन की सुविधा अभ्यास को नियंत्रित करने में मदद करेगी। मशीन में व्यायाम की संख्या दर्ज होने से मरीज अपने अभ्यास की प्रगति भी देख सकेगा। एक मरीज पर एक महीने के परीक्षण के दौरान मिले सकारात्मक परिणामों ने इसके व्यावहारिक उपयोग की संभावनाओं को मजबूत किया है।

किफायती निर्माण के कारण इसे सामान्य परिवारों के लिए भी उपयोगी बनाने का प्रयास किया गया है। छात्रों की टीम अब मशीन को और अधिक सुविधाजनक और उपयोगकर्ता-केंद्रित बनाने की दिशा में काम कर सकती है।

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तकनीक के इस्तेमाल से ऐसे तैयार हुई मशीनडा. आरवी प्रसाद ने बताया कि मशीन को विकसित करने से पहले बायोमैकेनिक्स के आधार पर कोहनी को उठाने के लिए आवश्यक बल का अध्ययन किया गया। इसके लिए 75 किलोग्राम-सेमी टार्क की गणना की गई। सालिडवर्क्स पर 3-डी सीएडी माडल तैयार किया गया।

निर्माण में स्टील राड, पीवीसी पाइप और बियरिंग जैसी सामग्री का इस्तेमाल किया गया। स्वचालन के लिए आर्डिनो माइक्रोकंट्रोलर और सर्वो मोटर का प्रयोग किया गया है। ब्लूटूथ आधारित आइओटी व्यवस्था से मोबाइल फोन नियंत्रण तथा एलसीडी स्क्रीन से अभ्यास की संख्या प्रदर्शित होती है।

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आजकल कोहनी में दर्द की समस्या आम है। ऐसे में विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा विकसित की गई फिजियोथिरैपी मशीन बेहद उपयोगी है। अन्य छात्रों को भी इस नवाचार से प्रेरणा लेनी चाहिए। समाज को सीधे लाभ पहुंचाने वाला नवाचार करना चाहिए।

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-प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा, कुलपति, एमएमयूटी