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यादों में केएल गुप्ता: तीन बार बर्खास्तगी और जेल झेली, पर जीवनभर अड़े रहे रेलकर्मियों के हक के लिए

Published: Sat, 07 Nov 2026 11:03 AM (IST)

केएल गुप्ता, एक समर्पित रेलकर्मी नेता, ने रेलवे की नौकरी तीन बार गंवाने और जेल जाने के बावजूद कर्मचारियों के ...और पढ़ें

1982 में दे दी नौकरी से स्वेच्छा सेवानिवृत्ति, कर्मचारियों के लिए जीवन कर दिया समर्पित। जागरण

1982 में दे दी नौकरी से स्वेच्छा सेवानिवृत्ति, कर्मचारियों के लिए जीवन कर दिया समर्पित। जागरण

HighLights

  1. केएल गुप्ता ने तीन बार नौकरी गंवाई, एक माह जेल काटी।

  2. 1982 में स्वेच्छा से सेवानिवृत्त होकर पूरा जीवन समर्पित किया।

  3. दुनिया के सबसे बुजुर्ग सक्रिय ट्रेड यूनियन नेता के रूप में जाने गए।

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। रेलकर्मियों के लिए अपने परिवार को हासिए पर रखने वाले एनई रेलवे मजदूर यूनियन के अध्यक्ष व पूर्व महामंत्री केएल गुप्ता ने रेलवे की नौकरी भी छोड़ दी थी। वे नि:स्वार्थ रेलवे के विकास और रेल कर्मचारियों के हितों की लड़ाई लड़ते रहे। वर्ष 1964, 1968 और 1974 रेल रोको आंदोलन के समय उन्हें तीन बार रेलवे की नौकरी से बर्खास्त होना पड़ा था।

इस दौरान एक माह तक जेल में रहना पड़ा। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। पीछे नहीं हटे और अनवरत रेल कर्मचारियों की लड़ाई लड़ते रहे। जीवन पर्यंत रेलकर्मियों के लिए संघर्ष करते रहे। 1972 में उनकी पत्नी का निधन हो गया। वे नई दिल्ली में संगठन की बैठक में शामिल थे। रेलवे की तरफ से उन्हें सूचना मिली। इसके बाद भी वे बैठक करते रहे।

उन्होंने कहा कि बेटा घर पर है न। इस जीवट के थे, केएल गुप्ता। वर्ष 1980-81 में वे नौकरी से उब गए और नौकरी छोड़ने की ठान ली। परिवान वालों और मित्रों ने समझाया लेकिन वे अड़े रहे। अंतत: पूर्वोत्तर रेलवे के लेखा विभाग में कार्य करते हुए उन्होंने 1982 में रेल सेवा से स्वेच्छा से सेवानिवृत्ति ले ली और अपना पूरा जीवन रेलकर्मियों के लिए समर्पित कर दिया।

लोकनायक जय प्रकाश नारायण और जार्ज फर्नांडीज जैसे दिग्गज नेताओं के साथ ट्रेड यूनियन करने वाले केएल गुप्ता ने जीवन में कभी हार नहीं मानी। वे इतिहास पुरुष बन गए हैं, जिनके संघर्षों की गाथा, कर्मचारी हितों के लिए लड़ी जाने वाली लड़ाई, सादगी भरा जीवन और बेदाग चरित्र आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायी बनेंगी। वर्ष 1924 में आल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन का गठन हुआ। 1951 में एनई रेलवे मजदूर यूनियन (नरमू) अस्तित्व में आई।

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केएल गुप्त नरमू और एआइआरएफ के पदाधिकारी चुने गए। तब पूर्वोत्तर रेलवे अवध-तिरहुत रेलवे के नाम से जाना जाता था। उस दौर में केएल गुप्त को जय प्रकाश नारायण, बीबी गिरि, जार्ज फर्नाडीज और बसावन सिन्हा का सानिध्य लाभ मिला था। यह सभी अपने समय में एआइआरएफ के अध्यक्ष रह चुके हैं।

बिहार के दानापुर में एआइआरएफ में उनके साथ ओटी मेंस यूनियन के पदाधिकारी भी चले गए। जय प्रकाश नारायण ने उन्हें पूर्वोत्तर रेलवे के ओटी मेंस यूनियन का महामंत्री बना दिया था। केएल गुप्ता को दुनिया के सबसे बुजुर्ग सक्रिय ट्रेड यूनियन नेता के रूप में जाना जाता है, और उनका नाम लिम्का बुक आफ रिकार्ड्स और गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड्स के लिए प्रस्तावित किया गया था।

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