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गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक चुनाव: 33 घंटे तक क्यों फंसी रही सांसें? जानिए कांटे की मतगणना का अंदर का सच

Published: Fri, 30 Oct 2026 03:47 PM (IST)

गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना में मतपत्रों की छंटाई, विवादों और अवैध मतों की जांच जैसी जटिल प्रक्रियाओं ...और पढ़ें

मतपत्रों की छंटाई और विवादों ने रोकी रफ्तार, फिर अवैध मतों की जांच में लगा समय। जागरण

मतपत्रों की छंटाई और विवादों ने रोकी रफ्तार, फिर अवैध मतों की जांच में लगा समय। जागरण

HighLights

  1. मतगणना में मतपत्रों की छंटाई और विवादों से हुई देरी।

  2. प्रथम वरीयता में कोटा न मिलने पर दूसरी वरीयता की गिनती।

  3. भाजपा के ध्रुव कुमार त्रिपाठी 33 घंटे बाद विजयी घोषित।

अरुण चन्द, गोरखपुर। गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना मंगलवार सुबह आठ बजे शुरू हुई, लेकिन परिणाम आने में करीब 33 घंटे लग गए। इसकी वजह सिर्फ मतों की गिनती में लगने वाला समय नहीं, बल्कि मतपत्रों की छंटाई, गड्डियां बनाने, अभिलेखों से मिलान, विवादों के निस्तारण और अवैध मतों की जांच जैसी कई प्रक्रियाएं रहीं। प्रथम वरीयता के मतों में किसी प्रत्याशी को जीत के लिए जरूरी कोटा नहीं मिलने से दूसरी वरीयता की गिनती भी करनी पड़ी।

इसके बाद भी निर्धारित कोटा पूरा नहीं हुआ तो सबसे कम मत पाने वाले प्रत्याशियों को क्रमशः बाहर करते हुए मुकाबला अंतिम दो प्रत्याशियों तक पहुंचा। नतीजे की आधिकारिक घोषणा के लिए निर्वाचन आयोग की अनुमति का इंतजार भी करना पड़ा।

मतगणना की शुरुआत के बाद ही प्रक्रिया की जटिलता सामने आने लगी। सुबह आठ बजे से मतपेटियों से मतपत्र निकालने, उनकी छंटाई करने और गड्डियां बनाने का काम शुरू हुआ। इसमें करीब साढ़े आठ घंटे लग गए और वास्तविक गणना शाम 4:30 बजे शुरू हो सकी। इस दौरान दो बार हंगामे के कारण दो टेबलों पर करीब डेढ़ से दो घंटे तक काम प्रभावित रहा।

दो विवादों ने शुरुआत में ही रोकी रफ्तार
पहला विवाद देवरिया के बनकटा बूथ की मतपेटी पर सील नहीं होने को लेकर हुआ। दूसरा मऊ के एक बूथ की मतपेटी से फार्म-16 में दर्ज संख्या से अधिक मतपत्र निकलने पर उठा। इन विवादों के कारण मतगणना की शुरुआत में ही समय लगा। प्रथम वरीयता के पहले राउंड की गिनती पूरी होने के बाद प्रक्रिया ने गति पकड़ी, लेकिन अगले दिन सुबह करीब 5:30 बजे चौथे राउंड के 1612 मतों की गिनती में फिर विवाद खड़ा हो गया।

इस राउंड में भाजपा प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी को अकेले 970 मत मिलने और उनकी बढ़त करीब 466 मत होने पर दूसरे प्रत्याशियों और उनके एजेंटों ने आपत्ति जताई। उनका सवाल था कि करीब 14-14 हजार मतों वाले पिछले तीन राउंड में इतनी बड़ी बढ़त नहीं बनी तो महज 1612 मतों में यह अंतर कैसे आया। इस विवाद के चलते करीब दो घंटे तक हंगामा हुआ और गणना प्रभावित रही।

अवैध मतों की जांच और दूसरी वरीयता ने बढ़ाया इंतजार
मतगणना की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए रिटर्निंग आफिसर और कमिश्नर इन्द्र विक्रम सिंह हर राउंड के बाद प्रत्याशियों की मौजूदगी में अवैध मतपत्रों की जांच करते रहे। इस दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतते हुए अन्य टेबलों पर भी गणना रोक दी जाती थी। अवैध मतों की जांच पूरी होने के बाद ही संबंधित राउंड को पूरा मानकर अगले राउंड की गिनती शुरू होती थी। इस प्रक्रिया में भी काफी समय लगा।

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प्रथम वरीयता के चारों राउंड पूरे होने के बाद भी किसी प्रत्याशी को जीत के लिए जरूरी वैध मतों का 50 प्रतिशत और एक मत नहीं मिला। ऐसे में दूसरी वरीयता के मतों की गिनती करनी पड़ी। इसमें भी निर्धारित कोटा पूरा नहीं होने पर सबसे कम मत पाने वाले प्रत्याशियों को एक-एक कर बाहर किया गया। दूसरी वरीयता की गिनती में अधिकतम पांच टेबलों का इस्तेमाल होने से भी प्रक्रिया धीमी रही।

अंत में भाजपा के ध्रुव कुमार त्रिपाठी और निर्दलीय राजीव यादव के बीच मुकाबला सिमट गया। निर्धारित कोटा पूरा नहीं होने के बावजूद दोनों के मतों की तुलना में ध्रुव को 307 मत अधिक मिलने पर विजयी घोषित किया गया। आधिकारिक घोषणा से पहले रिटर्निंग आफिसर ने पूरी स्थिति निर्वाचन आयोग को बताई। वहां से अनुमति मिलने में भी करीब डेढ़ से दो घंटे लग गए।

इसके अलावा हर आठ घंटे पर मतगणना कर्मचारियों की शिफ्ट बदलने की प्रक्रिया ने भी समय बढ़ाया। इस तरह कई चरणों, विवादों और अनिवार्य जांच से गुजरने के बाद करीब 33 घंटे में चुनाव परिणाम सामने आ सका।

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