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गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक चुनाव में 12 प्रत्याशियों के कुल मतों से भी ज्यादा निकले अवैध वोट, खड़े हुए बड़े सवाल

Published: Thu, 29 Oct 2026 12:44 PM (IST)

गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन में 2800 मत अवैध घोषित हुए, जो 12 प्रत्याशियों के कुल मतों से भी अधिक हैं। यह ...और पढ़ें

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HighLights

  1. गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक चुनाव में 2800 मत अवैध घोषित।

  2. यह संख्या 12 प्रत्याशियों के कुल मतों से अधिक।

  3. मतपत्रों में वरीयता दर्ज करने की गलतियाँ मुख्य कारण।

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना में अवैध मतों की बड़ी संख्या ने मतदान प्रक्रिया और मतपत्र भरने के तरीके पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रथम वरीयता के चौथे और अंतिम राउंड तक 2800 मत अवैध घोषित किए गए। यह संख्या 16 प्रत्याशियों में से 12 को अलग-अलग मिले कुल मतों से भी अधिक है। शिक्षक जैसे जागरूक मतदाता वर्ग के चुनाव में इतनी बड़ी संख्या में मतपत्रों का खारिज होना चौंकाने वाला है।

मतपत्रों के अवैध होने के पीछे वरीयता दर्ज करने में की गई गलतियां सामने आई हैं। किसी मतदाता ने वरीयता का नंबर लिखने के बजाय दस्तखत कर दिए, तो किसी ने निर्धारित कालम के बाहर वरीयता अंकित कर दी।

शिक्षक निर्वाचन में मतदाता को प्रत्याशियों के नाम के सामने अपनी पसंद के क्रम में वरीयता लिखनी होती है। ऐसे में निर्धारित तरीके से अलग अंकन होने पर मतपत्र अवैध हो सकता है। हालांकि, सभी 2800 मतपत्र किन-किन कारणों से खारिज हुए, इसका विस्तृत ब्योरा मिलने पर ही गलतियों की वास्तविक प्रकृति स्पष्ट होगी।

चौथे राउंड तक कुल 43,611 मतपत्रों की गणना हुई। इनमें 40,811 मत वैध पाए गए, जबकि 2800 अवैध घोषित हुए। इस तरह कुल मतपत्रों में करीब 6.4 प्रतिशत अवैध रहे।

अवैध मतों की संख्या 16 में से 12 प्रत्याशियों को मिले मतों से अधिक है। अजय सिंह को 2503, दिनेश कुमार मिश्र को 13, देव भास्कर तिवारी को 52, डा. निरंकार राम त्रिपाठी को 24, पंकज कुमार सिंह को 377, राकेश कुमार तिवारी को 62, डा. राकेश सिंह को 448, डा. राजेश पांडेय को 80, राम प्रताप राम को 477, डा. शरदेंदु कुमार त्रिपाठी को 112, शिव श्याम यादव को 37 और सत्यपाल सिंह को 322 मत मिले। इन सभी 12 प्रत्याशियों में प्रत्येक के मतों से अवैध मतों की संख्या अधिक रही।

इतने मतपत्र खारिज होने से मतदाताओं को वरीयता दर्ज करने की प्रक्रिया की जानकारी देने और मतपत्र भरने के तरीके पर भी सवाल उठ रहे हैं।