520 KM लंबे गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के निर्माण में आई तेजी, 'चिकन नेक' तक का सफर बनेगा आसान
गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के निर्माण में तेजी आई है, क्योंकि इसकी राह में आ रही 132 केवी क्षमता की चार पारेषण लाइनों को हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

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HighLights
एक्सप्रेसवे के रास्ते से चार पारेषण लाइनें हटाई जा रही हैं।
520 किमी लंबा एक्सप्रेसवे यूपी को पूर्वोत्तर से जोड़ेगा।
यात्रा समय घटेगा, व्यापार और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे की राह में 132 केवी क्षमता की चार पारेषण लाइन आ रही हैं। इनमें एक लाइन गोरखपुर और तीन लाइन कुशीनगर जिले में है। इन लाइन को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
बिजली निगम का पारेषण खंड लाइन हटवाएगा। सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे गोरखपुर के जगदीशपुर से शुरू होकर बिहार के रास्ते पश्चिम बंगाल जाएगा। इस एक्सप्रेसवे की लंबाई 520 किलोमीटर है।
भारत माला परियोजना के दूसरे चरण में सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे का निर्माण होगा। यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश को पूर्वोत्तर से जोड़ेगा। इसके शुरू होने से यात्रा और व्यापार सुगम होगा। इससे आर्थिक विकास बढ़ेगा।
यहां है लाइन
- गोरखपुर- 132 केवी मोतीराम अड्डा-एफसीआई की लाइन
- कुशीनगर- हाटा-कुशीनगर लाइन, कसया-राजापाकड़ लाइन और राजापाकड़-तरयासुजान लाइन
सीता की धरती से मां कामाख्या के द्वार तक जुड़ाव
सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे से उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल की दूरी तो कम होगी ही पूर्वोत्तर के राज्य भी जुड़ जाएंगे। प्रस्तावित रूट सीतामढ़ी और मधुबनी जैसे मिथिला क्षेत्र से होकर सीमांचल की तरफ बढ़ेगा। आगे सिलीगुड़ी के रास्ते असम और पूर्वोत्तर के अन्य हिस्सों तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है। यानी मां सीता की धरती से मां कामाख्या के द्वार तक का सीधा जुड़ाव सड़क मार्ग से हो जाएगा।
‘चिकन नेक’ के पास पहुंचेगी गोरखपुर की सड़क
सिलीगुड़ी का इलाका पूर्वोत्तर भारत के लिए बेहद अहम है। प्रस्तावित गोरखपुर-सिलीगुड़ी कॉरिडोर उत्तर भारत और पूर्वोत्तर के बीच सड़क संपर्क को मजबूत करने वाली परियोजनाओं में शामिल है। यही वजह है कि इसे रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत का 'चिकन नेक' पश्चिम बंगाल में स्थित सिलीगुड़ी कॉरिडोर को कहते हैं। यह देश की मुख्य भूमि को उत्तर-पूर्वी राज्यों से जोड़ता है। पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी शहर के पास जमीन की एक बेहद पतली पट्टी है। इसकी चौड़ाई मात्र 20 से 22 किलोमीटर है। यह पूर्वोत्तर के आठ राज्यों (असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम) के लिए एकमात्र स्थलीय संपर्क मार्ग और जीवन रेखा है।
एक्सप्रेसवे से यह जिले जुड़ रहे
- उत्तर प्रदेश में गोरखपुर और कुशीनगर
- बिहार में पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज
- पश्चिम बंगाल में उत्तर दिनाजपुर (इस्लामपुर) और दार्जिलिंग (सिलीगुड़ी/बागडोगरा)
120 किलोमीटर प्रति घंटे रफ्तार
सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे छह लेन का बनेगा। इस पर वाहनों की अधिकतम गति सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटे होगी।
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फैक्ट फाइल
- लंबाई: 520 से 568 किलोमीटर
- लागत: तकरीबन 32 हजार करोड़ रुपये
- घटेगा समय: अभी गोरखपुर से सिलीगुड़ी का सफर 15 घंटे का है। यह घटकर छह से आठ घंटे रह जाएगा।
