गोरखपुर मंडल में नदियां उठान पर, बाढ़ की आहट से तटवर्ती गांवों में बढ़ी चिंता
गोरखपुर मंडल में सितंबर की बारिश के बाद राप्ती, रोहिन, सरयू और गोर्रा नदियां उफान पर हैं, जिससे तटवर्ती गांवों ...और पढ़ें

राप्ती नदी किनारे स्थित बहरामपुर गांव में नाव से आते जाते लोग। -संगम दूबे
HighLights
गोरखपुर मंडल की राप्ती, सरयू सहित कई नदियां उफान पर।
तटवर्ती गांवों में बाढ़ का खतरा, आवागमन हुआ प्रभावित।
प्रशासन द्वारा राहत कार्य और निगरानी तेज की गई।
विवेक शुक्ला, गोरखपुर। सितंबर के आखिरी दिनों में हुई तेज बारिश के बाद गोरखपुर मंडल की नदियां एक बार फिर उठान पर हैं। नेपाल और पूर्वांचल में हुई बारिश का असर राप्ती, रोहिन, सरयू और गोर्रा के जलस्तर पर दिखाई दे रहा है। कई स्थानों पर नदियों का पानी तटवर्ती इलाकों की ओर बढ़ा है, जबकि कुछ जगह संपर्क मार्गों पर भी पानी पहुंचने से ग्रामीणों की आवाजाही प्रभावित हुई है।
गोरखपुर के बड़हलगंज क्षेत्र में सरयू और राप्ती के बढ़ते जलस्तर से बगहा देवार, ज्ञानकोल, कोलखास और नेतवारपट्टी समेत कई गांव प्रभावित हुए हैं। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में नावों की व्यवस्था की है। कोटियानिरंजन, गोनहा, जैतपुर, बल्थर और मुसाडोही समेत कई गांवों के संपर्क मार्गों पर भी पानी पहुंचने की सूचना है।
गोरखपुर में उफान पर राप्ती, कटान तेज
गोरखपुर में राप्ती नदी का पानी महानगर के बहरामपुर में तेजी से घुसने लगा है। नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण लोगों को घरों से निकलने में दिक्कत हुई तो स्टीमर लगाया गया है। प्रशासन ने प्रयागराज से सात स्टीमर मंगा लिया है। इस बीच राप्ती नदी के जलस्तर में मंगलवार रात 15 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई है। इधर, सरयू नदी का भी जलस्तर बढ़ने लगा है। हालांकि सरयू नदी अभी कतरनिया घाट पर खतरे के निशान से 1.38 मीटर नीचे है लेकिन जलस्तर में बढ़ोतरी से बड़हलगंज के कछार में बाढ़ का खतरा गहराने लगा है।
यहां पहले से ही 12 गांव बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। पीपीगंज क्षेत्र के हिरुआ गांव के सामने राप्ती नदी का कटान तेज हुआ है। ग्रामीणों के मुताबिक कई एकड़ उपजाऊ जमीन नदी में समा चुकी है। इससे ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। सिंचाई विभाग की ओर से प्रभावित स्थानों पर निगरानी की जा रही है।

देवरिया में राप्ती और गोर्रा नदियों में उफान, मंडराने लगा बाढ़ का खतरा
नेपाल से पानी छोड़े जाने के बाद दोआबा में राप्ती व गोर्रा नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। दोनों नदियां खतरे के निशान के करीब पहुंच गई हैं। मंगलवार शाम राप्ती खतरे के निशान से महज 85 सेंमी और गोर्रा 40 सेंमी दूर रह गई थी। जलस्तर में इसी तरह वृद्धि जारी रही तो दोनों नदियां खतरे के निशान को पार कर सकती हैं। इससे दोआबा के 52 गांवों की करीब डेढ़ लाख आबादी पर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता राधेश्याम निषाद ने बताया कि तटबंधों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। विभागीय टीम लगातार स्थिति पर नजर रख रही है।
कुशीनगर में एपी बांध के किमी 3.4 पर भी 14 मीटर कटान, पानी से घिरे 15 गांव
कुशीनगर में उफनाई नारायणी नदी ने सोमवार की रात एपी बांध के किमी 6.00 पर दस मीटर कटान के बाद दायरा बढ़कर 100 मीटर हो गया। इससे 15 से गांव पानी से से घिर गए। विभाग और प्रभावित परिवारों के बीच मची इस तबाही को लेकर हायतौबा मची ही थी कि, पहले कटान स्थल से महज 400 मीटर की दूरी पर मंगलवार की सुबह लगभग सात बजे किमी 4.400 पर बांध का लगभग 14 मीटर भाग और कट गया। इसके बाद बड़ी अनहोनी की आशंका खड़ी हो गई।
गनीमत रही कि विभाग ने तत्परता दिखाते हुए यहां हालात बिगड़ने नहीं दिए और बचाव कार्य शुरू कर दिया। मरम्मत कार्य ने धारा के वेग को रोक लिया। अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड महेश कुमार सिंह ने बताया कि, मरम्मत कार्य तेजी से कराया जा रहा है। स्थिति पहले से काफी ठीक हुई है। शीघ्र ही बांध को मजबूत स्थिति में खड़ा कर दिया जाएगा।

महराजगंज में पानी घटा, लेकिन घर वापसी का इंतजार
नारायणी नदी का जलप्रवाह घटने लगा है, लेकिन सोहगीबरवा में बाढ़ की मुश्किलें अभी बरकरार हैं। मंगलवार सुबह नदी का जलप्रवाह 2.12 लाख क्यूसेक दर्ज किया गया, जो शाम चार बजे घटकर 1.79 लाख क्यूसेक रह गया। जलप्रवाह में कमी से प्रशासन ने राहत की सांस ली है, लेकिन गांव के कई हिस्सों में अब भी पानी भरा होने से करीब 800 घर प्रभावित हैं। घरों में पानी होने के कारण ग्रामीणों की वापसी नहीं हो सकी है। सोहगीबरवा के कुंडहवां, भोथहा, मुजा टोला, कटवासी और शिकारपुर में बाढ़ का पानी अभी जमा है। जलस्तर घटने के बावजूद जलनिकासी धीमी है। ऐसे में ग्रामीणों के सामने घर लौटने की समस्या बनी हुई है।
एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों ने नाव के सहारे करीब तीन हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया है। कुछ ग्रामीण अब भी घरों की छतों पर रात गुजारने को मजबूर हैं। प्रशासन की ओर से नाव के माध्यम से प्रभावित लोगों तक भोजन और पेयजल पहुंचाया जा रहा है। राहत केंद्र पर भी भोजन व पानी की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। मंगलवार को तहसीलदार अमित कुमार सिंह ने गांव पहुंचकर ग्रामीणों के बीच पानी और भोजन वितरित कराया। पशुओं के लिए भूसे की भी व्यवस्था कराई गई है।

शहर से सटे इलाकों में भी दिख रहा असर
राप्ती और रोहिन के बढ़ते जलस्तर का असर शहर से सटे इलाकों में भी दिखाई दे रहा है। राजघाट पर नदी किनारे बने प्लेटफार्म पानी में डूब गए हैं। डोहरिया-डोमिनगढ़ मार्ग पर भी पानी ओवरफ्लो होने से आवागमन प्रभावित हुआ है।
प्रशासन की बढ़ी निगरानी
नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए बाढ़ चौकियों को सक्रिय रखा गया है। बाढ़ संभावित क्षेत्रों में अधिकारियों की ओर से निरीक्षण किया जा रहा है। सहजनवां में कालेसर-बरहुआ बांध की निगरानी और रेनकट भरने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं शहर में बढ़ते नदी जलस्तर के मद्देनजर कुछ रेग्युलेटर बंद कर पंपिंग स्टेशनों को पूरी क्षमता से चलाया गया है।
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कुल मिलाकर मंडल में इस समय सबसे बड़ा सवाल यह है कि नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी कब तक जारी रहती है। बारिश थमने के बावजूद नेपाल और ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से आने वाले पानी का असर अगले कुछ समय तक दिखाई दे सकता है। ऐसे में तटबंधों, कटान वाले स्थानों और निचले इलाकों में निगरानी महत्वपूर्ण हो गई है।
