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गोरखपुर में राप्ती नदी का रौद्र रूप जारी, सरयू का जलस्तर घटा

Published: Fri, 02 Oct 2026 09:14 AM (IST)

राप्ती नदी गोरखपुर में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिससे कई गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ ...और पढ़ें

राप्ती-आमी का रौद्र रूप, आबादी में पहुंचा बाढ़ का पानी। जागरण

राप्ती-आमी का रौद्र रूप, आबादी में पहुंचा बाढ़ का पानी। जागरण

HighLights

  1. राप्ती नदी खतरे के निशान से 37 सेमी ऊपर बह रही।

  2. सरयू और रोहिन नदियों का जलस्तर अब कम हुआ।

  3. डीएम ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत कार्य का जायजा लिया।

जागरण टीम, गोरखपुर। राप्ती नदी में उफान गुरुवार को भी जारी रहा। बर्डघाट में नदी खतरे के निशान से 37 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। नदी में अभी बढ़त जारी रहने की आशंका है। राहत की बात यह है कि सरयू नदी का जलस्तर फिर कम होने लगा है। सरयू नदी त्रिमुहानी घाट पर खतरे के निशान से 1.59 मीटर नीचे बह रही है। रोहिन नदी के जलस्तर में भी कमी आई है। बड़हलगंज के कछार में बाढ़ की विभीषिका को देखते हुए डीएम दीपक मीणा ने नाव से निरीक्षण किया और लोगों से मिले।

महानगर से सटे बहरामपुर उत्तरी, बहरामपुर दक्षिणी और शेरगढ़ गांव में गुरुवार को राप्ती नदी का पानी और बढ़ने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। लहसड़ी की तरफ भी नदी के क्षेत्र में जलस्तर बढ़ रहा है। मंझरिया बिस्टौली, चक्की, खैरा, अजवनिया आदि गांव पानी से घिर गए हैं। कई घरों में पानी घुस गया है। होरी लाल और राम भवन आदि ग्रामीणों ने बताया कि प्रशासन के लोग अभी तक गांव में नहीं पहुंचे हैं। नाव की व्यवस्था नहीं है। लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो गई है। आवागमन ठप हो गया है। पशुओं को चारा नहीं मिल रहा है।

राप्ती और आमी नदियों के बढ़ते जलस्तर से सहजनवा क्षेत्र में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। तटवर्ती गांवों की आबादी के करीब पानी पहुंचने से ग्रामीण चिंतित हैं। कुछ घरों में पानी घुसने के बावजूद संपर्क मार्ग खुले होने के कारण गांवों को बाढ़ग्रस्त घोषित नहीं किया गया है।

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प्रभावित परिवार राहत और बचाव की उम्मीद में जलस्तर पर नजर रखे हुए हैं। सहजनवा ब्लाक में आमी के उफान से हाईवे-भुआ शहीद मार्ग और हरदी-मगहर मार्ग पर आवागमन ठप है। गहिरा और चक चोहरा की आबादी के करीब पानी पहुंच गया है।

पिपरौली ब्लाक के उत्तरी कोलिया और शेरगढ़ में कई घरों में पानी घुस चुका है, लेकिन संपर्क मार्ग चालू होने के कारण दोनों गांव बाढ़ग्रस्त घोषित नहीं किए गए हैं। जरलही में भी पानी आबादी के करीब पहुंच गया है। जलस्तर बढ़ने पर विद्यालय बंद करना पड़ सकता है। खेतों में पानी फैलने से फसलों के साथ पशुओं के चारे और सुरक्षित स्थान की समस्या भी बढ़ रही है।

उधर, राप्ती ने भक्सा गांव में कटान तेज कर दिया है। सुरगहना में निर्माणाधीन पुल का एप्रोच भी नदी की धारा की चपेट में है। जलस्तर बढ़ने से सहजनवा-डुमरिया बाबू बांध पर दबाव बना हुआ है। चोरमा रेगुलेटर उफान की ओर है, जिससे पाली ब्लाक में फसलों के डूबने का खतरा है। बोक्टा-बरवार बांध पर बरवार के पास भी नदी का दबाव बना हुआ है।

एसडीएम नमन मेहता ने उत्तरी कोलिया बाढ़ चौकी का निरीक्षण कर बंधे की स्थिति देखी। उन्होंने रेनकट भरने, किनारे लगाए गए पत्थर के ठोकरों की निगरानी करने और बाढ़ चौकी कर्मियों को सक्रिय रहने के निर्देश दिए।

मंदिर स्थानांतरण पर दो गांवों में बनी सहमति
राप्ती के कटान की जद में भक्सा-तुर्कवलिया सीमा स्थित समय माता मंदिर आ गया है। मंदिर के नदी में समाने की आशंका के बीच स्थानांतरण को लेकर दोनों गांवों के लोग आमने-सामने आ गए थे। दो दिन की पंचायत और लंबी जद्दोजहद के बाद सहमति बनी। तय हुआ कि तुर्कवलिया के लोग मंदिर की मिट्टी ले जाएंगे, जबकि भक्सा के ग्रामीण घंट और मूर्तियां लेकर दूसरे स्थान पर नया मंदिर बनाएंगे। इसके बाद निर्माण की तैयारी तेज कर दी गई है।

सिंहोरवा में बढ़ा नदी का पानी, बच्चों के लिए मिली मोटर नाव
ब्रह्मपुर क्षेत्र के सिंहोरवा गांव में नदी का जलस्तर बढ़ने से आवागमन प्रभावित है। विधायक ई. सरवन निषाद ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर ग्रामीणों की समस्याएं जानीं। उन्होंने बच्चों के लिए इलेक्ट्रिक मोटर नाव उपलब्ध कराई। विधायक ने जलस्तर पर लगातार निगरानी रखने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए।

बाढ़ प्रभावित गांवों में पहुंचे विधायक, राहत तेज करने के निर्देश
बांसगांव विधायक डा. विमलेश पासवान ने गुरुवार को कौड़ीराम क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित कतरारी, करंजहीं, नवापार, करपइया और कारपूर्वा गांवों का भ्रमण कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत कर समस्याएं जानीं और अधिकारियों को आवश्यक राहत उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। एसडीएम बांसगांव मलखान सिंह को बाढ़ पीड़ित परिवारों में तत्काल राहत सामग्री वितरित कराने को कहा।

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डीएम ने बड़हलगंज के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का लिया जायजा
जिलाधिकारी दीपक मीणा ने बड़हलगंज के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत एवं बचाव कार्यों की स्थिति देखी। उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए। डीएम सबसे पहले पटनाघाट पहुंचे, जहां उन्होंने बाढ़ बचाव और राहत सामग्री वितरण की जानकारी ली। डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित लोगों की सुरक्षा, आवागमन, भोजन और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों में किसी तरह की कमी नहीं होनी चाहिए।

सभी प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाने के लिए भी कहा। पटनाघाट के निरीक्षण के बाद डीएम, विधायक राजेश त्रिपाठी के साथ स्टीमर से बगहा देवार गांव पहुंचे। वहां रीता, शीला, सुमन, होशिला, सुरसती, उमा और पाना समेत ग्रामीणों ने बताया कि वे सड़क किनारे पटरी पर छप्पर डालकर जीवनयापन कर रहे हैं। उन्होंने पुनर्वास की मांग की। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के निरीक्षण के बाद डीएम ने बड़हलगंज ब्लाक सभागार में अधिकारियों के साथ बैठक की।

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इसमें फसल मुआवजा, बाढ़ बचाव, सुरक्षा, नावों की उपलब्धता, पशुओं के चारे और स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों की समीक्षा की गई। डीएम ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री, भूसा और पशु चारा उपलब्ध कराने तथा पशुओं का टीकाकरण तेज करने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य विभाग को गांवों में शिविर लगाकर खांसी, बुखार, टीबी और अन्य मौसमी बीमारियों की दवाएं उपलब्ध कराने को कहा। फसल मुआवजे में देरी पर संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाते हुए जल्द भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। डीएम ने गांवों में नियमित छिड़काव और फागिंग कराने के लिए भी अधिकारियों को निर्देशित किया।

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