गोरखपुर में खुल सकती है 100 से अधिक प्लाटिंग को वैध कराने का राह, GDA करेगा कालोनाइजर्स से संवाद
गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA) शहर के बाहरी क्षेत्रों में बिना लेआउट स्वीकृत कराए हो रही अवैध प्लाटिंग को लेकर कार्रवाई ...और पढ़ें

70 से अधिक कालोनाइजर्स के साथ जल्द बैठक करेंगे जीडीए उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल। जागरण
HighLights
जीडीए अवैध प्लाटिंग पर कार्रवाई के साथ संवाद का रास्ता अपनाएगा।
उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल 70 से अधिक कालोनाइजर्स से बैठक करेंगे।
प्लाटर्स की समस्याओं को समझकर वैधता की संभावनाएं तलाशी जाएंगी।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। शहर के बाहरी क्षेत्रों में बिना लेआउट स्वीकृत कराए हो रही प्लाटिंग को लेकर गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) अब कार्रवाई के साथ संवाद का रास्ता भी अपनाएगा। प्राधिकरण ऐसे प्लाटर्स से बातचीत कर उनकी समस्याएं समझेगा और जो नियमों का पालन करने के लिए तैयार होंगे, उनकी प्लाटिंग को वैध कराने की संभावनाएं तलाशेगा। इस संबंध में जल्द ही 70 से अधिक कालोनाइजर्स के साथ प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल बैठक करेंगे।
दरअसल, शहर के बाहरी इलाकों में बड़ी संख्या में प्लाटिंग की जा रही है। इनमें लोग जमीन खरीद भी रहे हैं। ऐसी प्लाटिंग को लेकर लगातार शिकायतें जीडीए तक पहुंच रही हैं। प्राधिकरण की जांच में बिना लेआउट स्वीकृत कराए की जा रही प्लाटिंग सामने आने पर कार्रवाई भी की जा रही है। कई स्थानों पर अवैध प्लाटिंग ध्वस्त की जा चुकी है। नियम के अनुसार लेआउट स्वीकृत कराए बिना प्लाटिंग करना अवैध है।
प्लाटर्स की समस्याओं और अड़चनों की होगी पड़ताल
प्लाटिंग करने वालों की ओर से अक्सर यह शिकायत की जाती है कि प्राधिकरण उनके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई करता है और उनकी समस्याएं नहीं सुनी जातीं। इसी को ध्यान में रखते हुए उपाध्यक्ष पहली बार सीधे कालोनाइजर्स के साथ बैठक करेंगे। बैठक की तिथि अभी तय नहीं हुई है, लेकिन जल्द आयोजन की संभावना है। इसमें प्लाटर्स से पूछा जाएगा कि वे लेआउट स्वीकृत क्यों नहीं करा पा रहे हैं और इसमें किस तरह की दिक्कतें आ रही हैं।
प्राधिकरण का मानना है कि कई प्लाटर्स को लेआउट स्वीकृत कराने के लिए आवश्यक मानकों और प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं होती। बैठक में उन्हें इसकी जानकारी दी जाएगी। साथ ही जहां कोई व्यावहारिक या प्रक्रियागत व्यवधान होगा, उसे दूर कर लेआउट स्वीकृति का रास्ता निकालने का प्रयास किया जाएगा।
जमीन के अनुपात में देनी होंगी सुविधाएं
नए नियमों में प्लाटिंग के लिए न्यूनतम क्षेत्रफल की कोई शर्त नहीं रखी गई है। यानी जमीन का क्षेत्रफल जितना भी हो, उसके अनुपात में आवश्यक आधारभूत सुविधाएं विकसित करनी होंगी। इनमें मानक के अनुरूप सड़क और नाली जैसी सुविधाएं प्रमुख हैं।
यह भी पढ़ें- गोरखपुर से गोंडा और छपरा तक ट्रेनों का नियंत्रण, एक क्लिक से तैयार होगा रूट
जीडीए प्लाटर्स को यह भी समझाएगा कि केवल पतला रास्ता छोड़कर प्लाटिंग करना पर्याप्त नहीं है। मानकों के अनुसार सड़क और नाली की व्यवस्था करने पर लेआउट स्वीकृत कराया जा सकता है। इससे संबंधित जमीन का मूल्य भी बढ़ने की संभावना रहेगी।
