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गोरखपुर से गोंडा और छपरा तक ट्रेनों का नियंत्रण, एक क्लिक से तैयार होगा रूट

Published: Fri, 02 Oct 2026 08:22 AM (IST)

रेलवे में ट्रेन परिचालन को पूरी तरह डिजिटल बनाने के लिए केंद्रीयकृत यातायात नियंत्रण प्रणाली (सीटीसी) लागू की जा रही ...और पढ़ें

पूर्वोत्तर रेलवे में सेंट्रलाइज्ड ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम लगाने की जोरशोर से चल रही तैयारी। जागरण

पूर्वोत्तर रेलवे में सेंट्रलाइज्ड ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम लगाने की जोरशोर से चल रही तैयारी। जागरण

HighLights

  1. रेलवे में केंद्रीयकृत यातायात नियंत्रण प्रणाली (सीटीसी) लागू की जा रही है।

  2. गोरखपुर से गोंडा, छपरा तक ट्रेनों का नियंत्रण एक क्लिक से होगा।

  3. इससे ट्रेनों की गति बढ़ेगी, मानवीय त्रुटियां कम होंगी, सुरक्षा सुधरेगी।

प्रेम नारायण द्विवेदी, गोरखपुर। रेलवे में ट्रेन परिचालन को पूरी तरह डिजिटल प्लेटफार्म पर लाने की दिशा में कदम तेज हो गए हैं। आने वाले दिनों में छोटे स्टेशनों से भी ट्रेनों के रूट और प्वाइंट तैयार करने की व्यवस्था खत्म हो जाएगी। जंक्शन और बड़े स्टेशनों से ही छोटे स्टेशनों की ट्रेनों को नियंत्रित किया जाएगा।

गोरखपुर से गोंडा और छपरा तक ट्रेनें कंट्रोल हो सकेंगी। कंप्यूटर माउस के एक क्लिक से रूट और प्वाइंट तैयार किए जा सकेंगे। पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने केंद्रीयकृत यातायात नियंत्रण प्रणाली (सेंट्रलाइज्ड ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम-सीटीसी) लगाने की कवायद तेज कर दी है।

छपरा ग्रामीण से सीतापुर तक 18 स्टेशनों पर सीटीसी लगाए जाएंगे। वाराणसी मंडल प्रशासन ने विद्युत कार्य के लिए निविदा भी आमंत्रित की है। रेलवे बोर्ड ने गोरखपुर जंक्शन समेत प्रमुख स्टेशनों पर इस प्रणाली को स्थापित करने के कार्य को स्वीकृति दी है।

जानकारों का कहना है कि छोटी रेल लाइन के समय गोरखपुर जंक्शन पर सेंट्रलाइज्ड ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम लगा था। गोरखपुर से ही गोंडा और छपरा तक ट्रेनों को कंट्रोल किया जाता था। छोटी से बड़ी रेल लाइन हुई तो यह सिस्टम समाप्त हो गया। अब फिर से सेंट्रलाइज्ड ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम लगाने की तैयारी शुरू हो चुकी है।

अब नई व्यवस्था में छोटे स्टेशनों पर तैनात स्टेशन मास्टर (एसएम) की भूमिका भी बदल जाएगी। वे मुख्य रूप से स्टेशन प्रबंधन और ट्रेनों के सुरक्षित संचालन की निगरानी करेंगे। रूट और प्वाइंट तैयार करने का काम केंद्रीयकृत नियंत्रण केंद्र से कंप्यूटर के माध्यम से किया जा सकेगा। सीटीसी को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए रेलखंडों पर आटोमेटिक ब्लाक सिग्नल सिस्टम और स्टेशनों पर इलेक्ट्रानिक इंटरलाकिंग की व्यवस्था की जा रही है।

गोरखापुर जंक्शन, गोरखपुर कैंट और नकहा जंगल समेत पूर्वोत्तर रेलवे के 118 स्टेशनों पर इलेक्ट्रानिक इंटरलाकिंग सिस्टम कार्य कर रहे हैं। प्रमुख रेलमार्गों पर आटोमेटिक ब्लाक सिग्नल सिस्टम लगाने का काम भी तेजी से चल रहा है।

लखनऊ-गोरखपुर-छपरा, छपरा-बनारस-प्रयागराज और सीतापुर-बुढ़वल रेलखंडों पर आटोमेटिक ब्लाक सिग्नल सिस्टम लगाए जाने हैं। गोरखपुर के रास्ते चुरेब से चौरी चौरा तक आटोमेटिक ब्लाक सिग्नल प्रणाली पहले ही लगाई जा चुकी है।

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ट्रेनों को 130 की गति से चलाने की है तैयारी
पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने आवश्यक आधारभूत संरचना विकसित होने के साथ संबंधित रेलखंडों पर अधिकतम गति 110 से बढ़ाकर 130 किलोमीटर प्रति घंटा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। आटोमेटिक ब्लाक सिग्नल सिस्टम, इलेक्ट्रानिक इंटरलाकिंग सिस्टम, कवच और अब सेंट्रलाइज्ड ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम।

इन सभी सिस्टम के लग जाने से ट्रेनों का निर्बाध संचालन संभव हो सकेगा। ट्रैक क्षमता और ट्रेनों की गति बढ़ेगी। मानवीय चूक की गुंजाइश भी लगभग समाप्त हो जाएगी। संरक्षा और सुरक्षा मजबूत होने के साथ समय पालन दुरुस्त होगा।

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