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गोरखपुर में इतिहास बना RRI, यादों में रह गया बटन वाला दौर

Published: Thu, 01 Oct 2026 09:17 AM (IST)

गोरखपुर जंक्शन पर रूट रिले इंटरलॉकिंग (RRI) पैनल भवन ध्वस्त कर दिया गया है, जिससे बटन से चलने वाली पुरानी ...और पढ़ें

रेलवे स्टेशन के पश्चिमी यार्ड में ध्वस्त आरआरआइ पैनल का भवन। जागरण

रेलवे स्टेशन के पश्चिमी यार्ड में ध्वस्त आरआरआइ पैनल का भवन। जागरण 

HighLights

  1. गोरखपुर में RRI पैनल भवन ध्वस्त, पुरानी व्यवस्था इतिहास बनी।

  2. अब ट्रेन संचालन कंप्यूटर माउस के एक क्लिक से होगा।

  3. इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग से परिचालन आसान, तेज और सुरक्षित होगा।

प्रेम नारायण द्विवेदी, गोरखपुर। रेलवे की बदलती तस्वीर के साथ अब यादों का एक अध्याय भी पीछे छूट गया। कभी जिन बटनों को दबाकर रेलकर्मी ट्रेनों के लिए रास्ता बनाते थे, अब वही काम कंप्यूटर के माउस के एक क्लिक से हो रहा है। पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्यालय गोरखपुर जंक्शन के पश्चिमी यार्ड में स्थित रूट रिले इंटरलाकिंग (आरआरआइ) पैनल भवन बुधवार को ध्वस्त कर दिया गया। भवन के साथ वह व्यवस्था भी इतिहास बन गई, जिसके बीच कई पीढ़ियों के रेलकर्मियों ने अपनी सेवाएं दीं।

रेलवे में वर्षों तक काम करने वाले पूर्व स्टेशन अधीक्षक अवधेश लाल श्रीवास्तव बताते हैं कि आरआरआइ पैनल पर ड्यूटी केवल बटन दबाने का काम नहीं था। हर संकेत पर नजर रखनी पड़ती थी। ट्रेनों की आवाजाही, प्वाइंट और सिग्नल की स्थिति पर लगातार ध्यान देना होता था। ड्यूटी के दौरान एकाग्रता और सहकर्मियों के बीच तालमेल बेहद जरूरी था। उनके लिए यह पैनल नौकरी का हिस्सा भर नहीं, बल्कि जीवन के कई महत्वपूर्ण वर्षों का साथी रहा।

स्टेशन प्रबंधक संजय गुप्ता के अनुसार, समय के साथ तकनीक बदलना जरूरी है। नई व्यवस्था से काम आसान और तेज हुआ है, लेकिन पुराने पैनल को हटते देख बीते दिनों की याद आना स्वाभाविक है। कभी जिन बटनों और संकेतों के बीच पूरा समय गुजरता था, अब उनकी जगह चमकती स्क्रीन (डिस्प्ले बोर्ड) ने ले ली है। पुराने कर्मचारियों के अनुभव और यादें ही उस दौर की पहचान बनकर रह जाएंगी।

गोरखपुर जंक्शन के साथ नकहा जंगल और गोरखपुर कैंट स्टेशन पर भी आरआरआइ की जगह इलेक्ट्रानिक इंटरलाकिंग (ईआइ) सिस्टम काम करने लगा है। बुधवार को भवन ध्वस्तीकरण के चलते सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक प्लेटफार्म नंबर पांच और छह पर ट्रेनों का संचालन बंद रहा। इस दौरान ट्रेनों को दूसरे प्लेटफार्मों से चलाया गया। रात आठ बजे के बाद परिचालन सामान्य हो गया। आरआरआइ भवन के पास रेक खड़ा करने के लिए नई रेल लाइन बिछाने की योजना है।

बटन से माउस तक पहुंचा रेलवे
इलेक्ट्रानिक इंटरलाकिंग लागू होने से ट्रेन परिचालन से जुड़े मैनुअल कार्य डिजिटल व्यवस्था में आ गए हैं। स्टेशन मास्टर अब कंप्यूटर के माउस से ट्रेनों का रूट बनाते हैं। सिग्नल और प्वाइंट भी इसी प्रणाली से नियंत्रित होते हैं। हाईटेक एलईडी स्क्रीन पर यार्ड की स्थिति देखकर परिचालन संबंधी निर्णय लेना आसान हुआ है।

नई व्यवस्था से सिग्नल और प्वाइंट में खराबी की समस्या कम करने तथा मानवीय त्रुटियों की आशंका घटाने में मदद मिल रही है। गोरखपुर जंक्शन से प्रतिदिन 100 से अधिक ट्रेनें चलती हैं और एक लाख से अधिक यात्री आवागमन करते हैं। ऐसे में सुरक्षित और व्यवस्थित परिचालन बेहद महत्वपूर्ण है।

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118 स्टेशनों पर ईआइ सिस्टम
पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्यालय गोरखपुर समेत 118 स्टेशनों पर इलेक्ट्रानिक इंटरलाकिंग सिस्टम कार्य करने लगा है। रेलवे की योजना सभी 505 स्टेशनों पर यह व्यवस्था लागू करने की है। ट्रेनों की गति बढ़ाने के लिए आटोमेटिक ब्लाक सिग्नल सिस्टम और कवच भी लगाए जा रहे हैं। आवश्यक आधारभूत संरचना विकसित होने के साथ संबंधित रेलखंडों पर अधिकतम गति 110 से बढ़ाकर 130 किलोमीटर प्रति घंटा करने का लक्ष्य है।

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