गोरखपुर रेलवे अस्पताल के बाहर चाय-पकौड़ी की दुकानों पर बिक रही 'उपचार पुस्तिका', गोपनीयता का खतरा
गोरखपुर में ललित नारायण मिश्र केंद्रीय रेलवे अस्पताल के बाहर चाय-पकौड़ी की दुकानों पर रेलकर्मियों की 'उपचार पुस्तिका' और 'रेफरल ...और पढ़ें

30 से 50 रुपये लेकर रेल कर्मचारियों को बेच रहे हैं दुकानदार। जागरण
HighLights
गोरखपुर में रेलवे अस्पताल के बाहर बिक रही उपचार पुस्तिकाएं।
रेलकर्मियों की गोपनीय जानकारी बाजार में पहुंचने का खतरा बढ़ा।
रेलवे प्रशासन से अवैध बिक्री रोकने और फॉर्म उपलब्ध कराने की मांग।
प्रेम नारायण द्विवेदी, गोरखपुर। ललित नारायण मिश्र केंद्रीय रेलवे अस्पताल (एलएनएम) गोरखपुर के बाहर असुरन चौराहा के पास चाय-पकौड़ी, पान-गुटखा व फोटो कापी की दुकानों पर धड़ल्ले से रेलकर्मियों की ''उपचार पुस्तिका'' और ''रेफरल फार्म'' बिक रहे हैं।
असुरन चौराहा से यांत्रिक कारखाना के गेट तक लगभग सभी दुकानों के काउंटरों पर ''उपचार पुस्तिका'' और ''रेफरल फार्म'' रखे हुए हैं। दुकानदार, 30 से 50 रुपये में ''उपचार पुस्तिका'' तथा दो से पांच रुपये में ''रेफरल फार्म'' बेच रहे हैं। कहीं कोई संज्ञान लेने वाला नहीं है।
दुकानों पर पुस्तिका और फार्म ही नहीं बिक रहे, बल्कि उन्हें भरने का भी कार्य किया जा रहा है। दुकानों पर बैठे लोग 50 से 100 रुपये लेकर भरने का भी कार्य कर रहे हैं। यही नहीं, सड़कों पर सजे साइबर कैफे में रेलवे की गोपनीयता भी भंग हो रही है। रेलकर्मी विशेषकर रिटायर्ड, ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम (एचआरएमएस) पर छुट्टी, सुविधा पास और पीएफ आदि के आनलाइन आवेदन भी कैफे से ही करा रहे हैं।
कैफे संचालक, बदले में मुंहमांगा कीमत वसूल रहे हैं। इसे सिस्टम की खामी कहें या रेलवे के विभागों की उदासीनता, जब से रेलवे के विभागीय कार्य आफलाइन (मैनुअल) से आनलाइन (एचआरएमएस) होने लगे हैं, तब से रेलकर्मियों से संबंधित गोपनीय रिकार्ड बाजार तक पहुंचने लगे हैं। हास्पिटल, कारखाना और इंजीनियरिंग आदि विभागों के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के आनलाइन कार्य कार्यालय की जगह दुकानों से हो रहे हैं।

मई 2026 में दीपक कुमार सिंह नाम के व्यक्ति ने यांत्रिक कारखाना गोरखपुर में आनलाइन भर्ती का विज्ञापन निकाल दिया था। विज्ञापन में उसके एचआरएमएस पर दर्ज पहचानपत्र, पासवर्ड और अभिलेख आदि का उल्लेख था। गोपनीय रिकार्ड सोशल मीडिया में कैसे पहुंचा, यह सवाल है। दीपक के विज्ञापन पर 70 से 80 युवा कारखाने में इंटरव्यू देने पहुंच गए थे।
फिलहाल, मामले की जांच पुलिस कर रही है। एनई रेलवे मजदूर यूनियन (नरमू) के मंडल मंत्री संजय कुमार पांडेय कहते हैं कि अधिकतर वरिष्ठ व सेवानिवृत्त रेलकर्मी अपने मोबाइल या कंप्यूटर सिस्टम पर विभाग से संबंधित आनलाइन कार्य नहीं कर पाते। ऐसे में भागकर बाजार पहुंचते हैं। रेलवे प्रशासन को इसपर विचार करना होगा। रेलवे प्रेस बंद होने के बाद विभागों में फार्म आदि का टोटा पड़ गया है।
अधिकतर विभागों में ''उपचार पुस्तिका'' आदि फार्म उपलब्ध नहीं है। रेलकर्मियों और पूर्व रेलकर्मियों को मजबूरी में दुकानों से ''उपचार पुस्तिका'' आदि खरीदनी पड़ रही है। इससे रेलवे की छवि धूमिल हो रही है। मंडल मंत्री ने रेलवे प्रशासन से विभागों व अस्पताल में पर्याप्त ''उपचार पुस्तिका'' व संबंधित फार्म आदि उपलब्ध कराने व बाहर की बिक्री पर रोक लगाने की मांग की है।
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निश्शुल्क मिलती है 'उपचार पुस्तिका'
नियमानुसार उपचार पुस्तिका संबंधित विभागों से इंचार्ज के माध्यम से निश्शुल्क जारी होती है, जिसपर रेलकर्मी का फोटो सहित पूरा विवरण दर्ज होता है। चिकित्सक ''उपचार पुस्तिका'' में रोगियों की उपचार हिस्ट्री दर्ज करते हैं। पुस्तिका में रोगियों के रोग, जांच और चल रही दवाइयों का उल्लेख होता है। पुस्तिका के आधार पर रोगी की आगे का उपचार संभव हो पाता है।
