अब 'खामोश' दर्द भी सुनेगी पुलिस, गोरखपुर में पुलिसकर्मियों ने सीखे सांकेतिक भाषा के गुर
गोरखपुर पुलिस ने मूक-बधिर व्यक्तियों की समस्याओं को समझने के लिए भारतीय सांकेतिक भाषा का प्रशिक्षण लिया। अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
HighLights
पुलिसकर्मियों ने मूक-बधिरों से संवाद के लिए सांकेतिक भाषा सीखी।
अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित हुई।
प्रशिक्षण में अभिवादन, परिचय और समस्या समझने के संकेत सिखाए गए।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। जब जुबां खामोश हो और आवाज के बजाय हाथों के इशारे बात कहें तो पुलिसकर्मी भी अब उन इशारों को समझेंगे। थाने में पहुंचने वाले मूक-बधिर व्यक्ति की पीड़ित की बात समझने के लिए किसी दुभाषिए का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। गोरखपुर पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों ने गुरुवार को भारतीय सांकेतिक भाषा के जरिए संवाद करने की बारीकियां सीखीं।
अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस के अवसर पर गुरुवार को पुलिस लाइन में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित हुई। उत्तर प्रदेश एसोसिएशन आफ द डेफ के विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने पुलिसकर्मियों को सांकेतिक भाषा का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।
इसमें अभिवादन और परिचय से लेकर सामने वाले की परेशानी समझने, सवाल पूछने और जवाब जानने तक के सामान्य संकेतों का अभ्यास कराया गया। एसपी सिटी निमिष पाटील ने बताया कि किसी मूक-बधिर व्यक्ति के थाने पहुंचने पर सबसे पहली चुनौती उसकी बात समझना होती है।
प्रशिक्षण में पुलिसकर्मियों ने इसी चुनौती से निपटने के लिए सामान्य संकेत सीखे। व्यक्ति से उसका नाम, पता और समस्या पूछने के साथ घटना के बारे में जानकारी लेने के संकेतों का अभ्यास किया गया।
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शिकायतकर्ता क्या कहना चाहता है, इसे उसके हाव-भाव और संकेतों से समझने पर भी जोर दिया गया। कार्यशाला में जिले के सभी थानों से एक-एक पुलिसकर्मियों काे बुलाया गया था।
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