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पिंक बस सेवा: महिलाओं के लिए बनी बसें अब पुरुषों से भरी, जानें क्यों नहीं मिली महिला यात्री

Published: Fri, 06 Nov 2026 08:18 AM (IST)

गोरखपुर में 2019 में महिलाओं के लिए शुरू हुई पिंक बस सेवा अब पुरुषों से भरी रहती है, क्योंकि महिला ...और पढ़ें

सिर्फ महिलाओं के लिए 2019 में गोरखपुर में शुरू हुई थी एसी पिंक बस सेवा। जागरण

सिर्फ महिलाओं के लिए 2019 में गोरखपुर में शुरू हुई थी एसी पिंक बस सेवा। जागरण

HighLights

  1. 2019 में महिलाओं के लिए शुरू हुई थी पिंक बस सेवा।

  2. महिला यात्रियों की कमी से बसें पुरुषों के लिए खुलीं।

  3. कम किराया, पर सुविधाओं के अभाव से महिलाएं दूर।

प्रेम नारायण द्विवेदी, गोरखपुर। महिला यात्रियों की सुविधा के लिए रोडवेज ने 2019 में पिंक बसों का संचालन शुरू किया। एसी बस सेवा में केवल महिलाओं को यात्रा की अनुमति थी। रोडवेज को जब महिला यात्री नहीं मिली तो पिंक बसों को सामान्य एसी बस की तरह संचालित करने लगा।

रंग देखकर जो महिला यात्री इस बस में चढ़ जाती हैं, उन्हें पुरुषों की ठसाठस भीड़ के बीच सकुचाते-सिमटते यात्रा करनी पड़ती है। हालांकि, रोडवेज ने इसका किराया अन्य एसी बसों से 20 प्रतिशत कम निर्धारित किया है, इसके बाद भी महिलाओं का रुझान नहीं बढ़ पाया।

इसे सुविधाओं का अभाव कहें या साधारण (जनरल) बसों से अधिक किराया। सामान्य एसी बसों से किराया कम होने के बाद भी पिंक बसों को महिला यात्री नहीं मिली। जब, महिला यात्रियों का रुझान नहीं बढ़ा तो परिवहन निगम ने महिला यात्री के साथ चलने वाले पुरुषों को भी यात्रा की हरी झंडी दे दी। इसके बाद भी बात नहीं बनी।

बसें खाली चलने लगीं। इसका सीधा असर रोडवेज की कमाई पर पड़ने लगा। घाटा देखकर रोडवेज ने पिंक बस में पुरुष यात्रियों को भी आवागमन की सुविधा प्रदान कर दी। पुरुष यात्री, लगभग जर्जर हो चुकी इन बसों का लाभ उठा रहे हैं। गोरखपुर से लखनऊ के बीच छह पिंक बसें चल रही हैं। इनमें एक की वर्कशाप में मरम्मत हो रही है।

जानकारों का कहना है कि रोडवेज ने किराया तो कम कर दिया लेकिन बसों में महिलाओं के लिए प्रसाधन केंद्र आदि की व्यवस्था नहीं की। साधारण बसों से अधिक किराया देने के बाद भी महिला यात्रियों को प्रसाधन की सुविधा नहीं मिल पाती है।

रास्ते में उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। बसों की स्थिति भी ठीक नहीं है। कभी कूलिंग नहीं होती तो कभी गंदगी और बदहाल सीटें। यहां जान लें कि वित्त मंत्रालय की ताजा मासिक रिपोर्ट में महिलाओं की मोबिलिटी के साधन बढ़ाने और सुरक्षित सफर सुनिश्चित कराने की सिफारिश की गई हैं।

60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को फ्री यात्रा
परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक लव कुमार सिंह बताते हैं कि पिंक बसों में सभी यात्रियों पुरुष व महिला को यात्रा करने की अनुमति है। महिला यात्रियों का विशेष ख्याल रखा जाता है। शासन के निर्देश पर रक्षा बंध पर्व से ही 60 वर्ष व उससे अधिक उम्र की महिलाओं को सभी श्रेणी की बसों में फ्री यात्रा की सुविधा दी जा रही है। उन्हें रास्ते में आधार कार्ड व मतदाता पहचान पत्र दिखाना होता है। जल्द ही उनके लिए अलग से पहचान पत्र भी बनना शुरू हो जाएगाा। रक्षा बंधन पर्व के दौरान सभी महिला यात्रियों को निश्शुल्क यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।

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ट्रेन की बोगियों में पुरुष बैठे तो दो हजार जुर्माना
ट्रेनों में महिला यात्रियों की सुविधा के लिए अलग से महिला कोच लगाए जाते हैं। महिला कोचों में पुरुष भी बैठ जा रहे थे। ऐसे में रेलवे बोर्ड ने महिला कोच में बैठने वाले पुरुषों के खिलाफ जुर्माने का प्रविधान सुनिश्चित कर दिया। अब, अगर ट्रेन की बोगी में पुरुष बैठे तो रेलवे सुरक्षा बल के जवान दो हजार रुपये जुर्माना वसूल लेते हैं। जब से जुर्माना लगना शुरू हुआ है, महिलाओं की यात्रा सुगम हो गई है। रेलवे सुरक्षा बल ने 19 जून से 19 सितंबर तक महिला कोचों में अनधिकृत प्रवेश वाले 73 लोगों से 1 लाख 82 हजार का जुर्माना लगा चुका है।

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