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जागरण एजेंडा: गोरखपुर के पार्क बदहाल, हरियाली की जगह झाड़ियां और टूटे वाकवे

Published: Sun, 27 Sep 2026 10:40 AM (IST)

गोरखपुर के 188 पार्कों की बदहाली पर रिपोर्ट, जहां बच्चों के झूले और बुजुर्गों की सुविधाएं नदारद हैं। टूटे वाकवे, ...और पढ़ें

वीर बहादुर पुरम कॉलोनी का बदहाल पार्क। जागरण

वीर बहादुर पुरम कॉलोनी का बदहाल पार्क। जागरण

HighLights

  1. गोरखपुर के अधिकांश पार्कों में बुनियादी सुविधाओं का गंभीर अभाव।

  2. बच्चों के झूले टूटे, बुजुर्गों के लिए पर्याप्त बेंच नदारद।

  3. टूटे वाकवे, खराब लाइटें और झाड़ियाँ पार्कों की बदहाली दर्शाती हैं।

राजीव रंजन,  गोरखपुर। शहरवासियों को सुकून के कुछ पल देने, बच्चों को खेलने की जगह उपलब्ध कराने और वातावरण को हरा-भरा रखने के लिए विकसित किए गए पार्क ही अब अपनी बदहाली की कहानी कह रहे हैं। नगर निगम क्षेत्र में कुल 188 पार्क हैं, लेकिन अधिकांश में बुनियादी सुविधाओं का अभाव नजर आता है। कहीं टहलने के लिए वॉकवे नहीं है तो कहीं बना रास्ता टूट चुका है।

कई पार्कों में बैठने के लिए पर्याप्त बेंच नहीं हैं और हरियाली की जगह झाड़-झंखाड़ ने ले ली है। बच्चों के लिए लगाए गए झूले भी कई जगह या तो गायब हैं या टूटकर खतरनाक हो चुके हैं। शहर को बेहतर और सुविधायुक्त बनाने की योजनाओं के बीच पार्कों की यह तस्वीर सवाल खड़े करती है। जिन जगहों पर सुबह-शाम लोगों की चहलकदमी, बच्चों की किलकारी और हरियाली नजर आनी चाहिए, वहां कई पार्क उपेक्षा के कारण वीरान से दिखाई देते हैं।

नगर निगम क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर पार्क होने के बावजूद उनकी स्थिति में एकरूपता नहीं दिखाई देती। कुछ पार्क बेहतर स्थिति में हैं तो कई जगह बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। इससे पार्कों के रखरखाव की नियमित व्यवस्था पर सवाल उठते हैं।

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नाम पार्क का, सुविधाएं नदारद
वार्ड नंबर एक महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर एक में कई पार्क हैं, लेकिन ज्यादातर अपनी बदहाली से जूझ रहे हैं। वीर बहादुर पुरम पार्क में बैठने के लिए पर्याप्त बेंच नहीं हैं। बच्चों के लिए झूले भी नहीं हैं। पार्क में हरियाली विकसित करने के बजाय जगह-जगह जंगली घास और झाड़ियां दिखाई देती हैं। चाणक्यपुरी पार्क की बाउंड्री कई जगह से टूटी हुई है। इससे पार्क की सुरक्षा और रखरखाव दोनों प्रभावित हो रहे हैं। महादेव पुरम पार्क की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। नियमित देखभाल के अभाव में पार्कों का उद्देश्य ही प्रभावित हो रहा है।

कहीं गेट टूटा, कहीं पार्क में जलकल का पंप
दिग्विजय नगर वार्ड के शहीद भगत सिंह पार्क में पार्क की दीवार और गेट दोनों टूटे हुए हैं। पार्क के अंदर जलकल विभाग का पंप वर्षों से मौजूद है, जिससे पार्क का उपयोगी हिस्सा भी प्रभावित हो रहा है। बुजुर्गों के बैठने के लिए कुछ बेंच हैं, लेकिन बच्चों के मनोरंजन के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। मदन मोहन मालवीय नगर के गोपाल पार्क में बाउंड्री टूटी होने के कारण वर्षा के दौरान पानी भरने की समस्या सामने आती है। इससे पार्क में टहलना मुश्किल हो जाता है। हनुमंत पार्क की स्थिति भी बेहतर नहीं है। यहां भी रखरखाव और बुनियादी सुविधाओं की कमी साफ दिखाई देती है।

टूटे वाकवे और खराब लाइट से बढ़ी परेशानी
पार्कों में सबसे बड़ी जरूरत टहलने के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित रास्ते की है। कई जगह वाकवे नहीं बने हैं और जहां बने हैं, वहां टूट-फूट के कारण लोगों को परेशानी होती है। बुजुर्गों के लिए यह स्थिति अधिक परेशानी वाली है। शाम के समय पार्कों में पर्याप्त रोशनी भी जरूरी है, लेकिन कई पार्कों में लाइटें खराब पड़ी हैं। अंधेरा होने के बाद लोग पार्क का इस्तेमाल करने से बचते हैं। इससे शाम की सैर, योग और व्यायाम जैसी गतिविधियां प्रभावित होती हैं।

बच्चों के लिए खेल की जगह भी नहीं
शहर के तेजी से बढ़ते कंक्रीट के बीच बच्चों के लिए खुले में खेलने की जगह लगातार सीमित होती जा रही है। ऐसे में पार्क ही बच्चों के खेल और शारीरिक गतिविधियों का सुरक्षित स्थान बन सकते हैं। लेकिन कई पार्कों में झूले ही नहीं हैं और जहां हैं, वहां रखरखाव के अभाव में उनकी हालत खराब है। टूटे या क्षतिग्रस्त झूलों से बच्चों को चोट लगने का खतरा भी बना रहता है। पार्कों में खेल उपकरण, बैठने की व्यवस्था और साफ-सफाई नियमित रूप से सुनिश्चित करने की जरूरत है।

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पार्क सिर्फ हरियाली नहीं, शहर की जरूरत
दिग्विजयनगर वार्ड के पार्षद ऋषिमोहन वर्मा, दिव्यनगर के पंकज राय आदि लोगों का कहना है कि पार्कों का महत्व केवल खूबसूरती तक सीमित नहीं है। सुबह-शाम की सैर, योग और व्यायाम के लिए बड़ी संख्या में लोग इनका इस्तेमाल करते हैं। बच्चों के लिए ये खेलने की जगह हैं और बुजुर्गों के लिए घर से बाहर समय बिताने का सुरक्षित माध्यम। शहर में बढ़ती आबादी और कंक्रीट के विस्तार के बीच हरियाली के इन छोटे-छोटे हिस्सों का महत्व और बढ़ जाता है। ऐसे में पार्कों की नियमित सफाई, पौधारोपण, वाकवे की मरम्मत, पर्याप्त लाइट, बेंच और बच्चों के लिए सुरक्षित खेल उपकरण उपलब्ध कराना जरूरी है।

बोले क्षेत्रवासी

नगर निगम क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर पार्क होने के बावजूद उनकी स्थिति में एकरूपता नहीं दिखाई देती। कुछ पार्क बेहतर स्थिति में हैं तो कई जगह बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। -अमरनाथ तिवारी, महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर एक

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जरूरत इस बात की है कि सभी पार्कों का सर्वे कराकर उनकी स्थिति के आधार पर मरम्मत और सुंदरीकरण की कार्ययोजना बनाई जाए। वार्ड में स्थित पार्क की स्थिति बदहाल है।-विवेक कुमार दीक्षित, जनप्रियविहार

टूटे वाकवे, बाउंड्री और गेट की मरम्मत के साथ खराब लाइटें ठीक हों और झाड़ियों की नियमित कटाई हो। इसकी वजह से पार्क में लोग जाना तक पसंद नहीं करते। -चंद्रकांत, दिग्विजयनगर

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बच्चों के लिए सुरक्षित झूले और बुजुर्गों के लिए पर्याप्त बेंच लगाई जाएं। तभी पार्क शहरवासियों के लिए वास्तव में सुकून और स्वस्थ वातावरण का ठिकाना बन सकेंगे। -विजय शुक्ला मोनू, दिव्यनगर