गोरखपुर में दलालों ने नवजात को पहुंचाया निजी अस्पताल, संचालकों ने बनाया बंधक
गोरखपुर में एक निजी एंबुलेंस चालक ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर की गई नवजात बच्ची को धोखे से एकता मल्टीस्पेशलिटी ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
HighLights
नवजात को बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बजाय निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
अस्पताल ने उपचार के लिए 96 हजार लिए, फिर 90 हजार और मांगे।
पैसे न देने पर बच्ची को बंधक बनाया, पुलिस ने हस्तक्षेप कर छुड़ाया।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कालेज में उपचार के लिए रेफर की गई नवजात बच्ची को एंबुलेंस चालक ने बेहतर उपचार का झांसा देकर फातिमा बाईपास स्थित निजी अस्पताल पहुंचा दिया। स्वजन का आरोप है कि अस्पताल में उपचार के नाम पर 96 हजार रुपये जमा करा लिए गए।
जब बच्ची को डिस्चार्ज कराने का अनुरोध किया गया तो 90 हजार रुपये और मांगे गए। रकम न देने पर बच्ची को बंधक बना लिया और छोड़ नहीं रहे थे। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद 30 हजार रुपये और लेकर बच्ची को डिस्चार्ज किया गया।
मामला शाहपुर क्षेत्र के फातिमा बाईपास स्थित एकता मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल का है। कुशीनगर के गोपालपुर निवासी बच्ची के बाबा अर्जुन कुशवाहा ने बताया कि उनके बेटे शशिभूषण कुशवाहा की पत्नी गुड़िया देवी को 29 अगस्त को प्रसव पीड़ा हुई थी। कसया स्थित वरदान अस्पताल में आपरेशन से बच्ची का जन्म हुआ। जन्म के बाद सांस लेने में परेशानी होने पर बच्ची को नियोनेटल इंटेसिव केयर यूनिट (एनआइसीयू) में भर्ती कराने की सलाह दी गई।
बच्ची को जिला अस्पताल, पडरौना ले गए, वहां करीब छह दिन तक उपचार चला। हालत में अपेक्षित सुधार नहीं होने पर चिकित्सकों ने पांच सितंबर को बच्ची को बीआरडी मेडिकल कालेज रेफर कर दिया। अर्जुन कुशवाहा का आरोप है कि इसी दौरान निजी एंबुलेंस चालक ने मेडिकल कालेज में बेहतर इलाज मिलने की बात कहकर उन्हें गुमराह किया और बच्ची को फातिमा बाईपास स्थित एकता मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती करा दिया।
स्वजन के मुताबिक पांच सितंबर से अस्पताल में बच्ची का उपचार चल रहा था। इस दौरान इलाज और दवा के नाम पर 96 हजार रुपये लिए गए। आर्थिक स्थिति खराब होने पर बच्ची को मेडिकल कालेज ले जाने के लिए डिस्चार्ज करने का अनुरोध किया। अस्पताल प्रबंधन ने 90 हजार रुपये और जमा करने पर ही डिस्चार्ज करने की बात कही।
इससे परेशान हम लोगों ने शनिवार को डायल-112 पर सूचना दी। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद दोनों पक्षों को थाने बुलाया गया। शाहपुर थानाध्यक्ष अंजय कुमार सिंह ने बताया कि दोनों पक्षों को थाने बुलाकर समझाया गया और नवजात को डिस्चार्ज करा दिया गया।
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अस्पताल संचालक ने आरोपों से किया इन्कार
एकता मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल के संचालक मैनुद्दीन ने स्वजन के आरोपों को गलत बताया। उनका कहना है कि बच्ची के उपचार में जितना खर्च हुआ, उतनी ही धनराशि ली गई है। कोई अतिरिक्त रकम नहीं मांगी गई। उनके अनुसार परिजन बेवजह आरोप लगा रहे हैं।
