जमीन खरीदने से पहले सिर्फ खतौनी नहीं, ये 7 दस्तावेज भी देखें; एक कागज की कमी पड़ सकती है भारी
जमीन खरीदते समय केवल खतौनी पर भरोसा न करें; विवादों से बचने के लिए पुराने दस्तावेज, गाटा नंबर, नामांतरण और ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
HighLights
वर्तमान खतौनी और विक्रेता के नाम का विवरण मिलाएं।
पुरानी रजिस्ट्री, नामांतरण रिकॉर्ड और गाटा संख्या की जांच करें।
जमीन पर कोई विवाद या ऋण तो नहीं, सुनिश्चित करें।
विवेक शुक्ला, गोरखपुर। जमीन खरीदते समय लोग अक्सर खतौनी में नाम देखकर संतुष्ट हो जाते हैं। लेकिन सिर्फ खतौनी में नाम दर्ज होना ही जमीन खरीदने के लिए पर्याप्त जांच नहीं है। जमीन का सौदा करने से पहले उसके पुराने दस्तावेज, गाटा नंबर, क्षेत्रफल और स्वामित्व से जुड़े रिकॉर्ड को आपस में मिलाना जरूरी है। थोड़ी सी सावधानी खरीदार को बाद के विवाद से बचा सकती है।
1- वर्तमान खतौनी जरूर देखें
सबसे पहले जमीन की वर्तमान खतौनी निकालकर देखें। इसमें दर्ज खातेदार का नाम, गाटा संख्या और जमीन का क्षेत्रफल विक्रेता द्वारा बताए गए विवरण से मिलाएं। नाम या जमीन के विवरण में अंतर हो तो पहले इसकी वजह पता करें।
2- पुरानी रजिस्ट्री या बैनामा देखें
विक्रेता को जमीन कैसे मिली, यह जानना भी जरूरी है। उसकी पुरानी रजिस्ट्री या बैनामा देखकर पता करें कि उसने जमीन किससे और कब खरीदी थी। दस्तावेज में दर्ज गाटा नंबर और क्षेत्रफल को वर्तमान रिकॉर्ड से मिलाएं।
3- नामांतरण का रिकॉर्ड जांचें
अगर विक्रेता ने जमीन खरीदने या विरासत में मिलने के बाद अपना नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कराया है तो उससे संबंधित नामांतरण का रिकॉर्ड भी देखें। इससे पुराने दस्तावेज और वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड के बीच कड़ी समझने में मदद मिलती है।
4- गाटा नंबर और रकबा मिलाएं
एक ही गांव में कई जमीनों के गाटा नंबर होते हैं। इसलिए केवल जमीन का नाम या स्थान बताकर सौदा न करें। गाटा नंबर, रकबा और खाता संख्या दस्तावेजों में एक समान हैं या नहीं, यह जांचें।
5- जमीन का नक्शा देखें
भू-नक्शे में जमीन की स्थिति और गाटा नंबर को मौके की जमीन से मिलाना भी जरूरी है। जमीन पर जाकर उसकी सीमा और आसपास की जमीन की स्थिति देखें। इससे कागज और मौके की स्थिति में अंतर का पता लगाने में मदद मिल सकती है।
6- जमीन पर कोई भार या विवाद तो नहीं
खरीद से पहले यह भी पता करें कि जमीन किसी ऋण, बंधक या न्यायालयी विवाद से जुड़ी तो नहीं है। सिर्फ विक्रेता के कहने पर भरोसा करने के बजाय संबंधित रिकॉर्ड और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच करें। किसी मुकदमे या कानूनी विवाद की जानकारी मिले तो विशेषज्ञ से दस्तावेजों की जांच कराएं।
7- रजिस्ट्री कार्यालय के रिकॉर्ड से मिलान
अंत में उपलब्ध दस्तावेजों का पंजीकरण संबंधी रिकॉर्ड से मिलान कराना महत्वपूर्ण है। खासकर तब, जब विक्रेता के पास पुरानी रजिस्ट्री की प्रति हो और जमीन कई बार खरीदी-बेची जा चुकी हो।
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दस्तावेजों में अंतर मिले तो क्या करें
अगर खतौनी में नाम कुछ और है, पुरानी रजिस्ट्री में कुछ और विवरण है या गाटा नंबर और रकबे में अंतर दिखाई देता है तो जल्दबाजी में एडवांस या पूरी रकम देने से बचें। पहले अंतर की वजह स्पष्ट कराएं और जरूरत पड़ने पर संबंधित राजस्व या पंजीकरण कार्यालय से सत्यापन कराएं।
