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गोरखपुर में डेढ़ साल से आगे नहीं बढ़ पाई बेतिया राज के भूमि की पैमाइश, बिहार अधिग्रहण से बढ़ी हलचल

Published: Thu, 16 Jul 2026 08:55 AM (IST)

गोरखपुर में बेतिया राज की भूमि की पैमाइश डेढ़ साल से रुकी हुई है, जबकि बिहार में अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

HighLights

  1. गोरखपुर में बेतिया राज भूमि की पैमाइश डेढ़ साल से रुकी।

  2. बिहार में अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू होने से कब्जेदार हुए बेचैन।

  3. बेतियाहाता में तीन एकड़ अतिरिक्त भूमि की हुई पहचान।

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। बेतियाराज की संपत्ति को लेकर जिले में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। बुधवार को बिहार में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो जाने से कब्जेदारों की बेचैनी बढ़ गई है। बेतियाहाता में लंबे समय से बेतिया राज की भूमि पर काबिज लोग अलग-अलग माध्यमों से सूचनाएं जुटा रहे हैं।

फिलहाल जिले में डेढ़ साल से बेतिया राज की भूमि के पैमाइश का काम ठप है। लेकिन, इस बीच बेतिया राज की तीन एकड़ भूमि और चिह्नित होने का दावा किया गया है। यह भूमि भी बेतियाहाता क्षेत्र में ही है, जिसकी जानकारी तीन माह पूर्व अभिलेखागार से 1368 फसली के अभिलेखों के सत्यापन में सामने आई।

इसकी रिपोर्ट बिहार सरकार के अधिकारी, राजस्व परिषद को भेज चुके हैं। ऐसे में अब बेतियाहाता में बेतिया राज की संपत्ति 50.92 एकड़ से बढ़कर 54.07 एकड़ हो सकती है। बिहार सरकार की ओर से यहां तैनात किए गए राजस्व पदाधिकारी बद्री प्रसाद गुप्ता का गोरखपुर से तबादला हो गया है। वह पूर्वी चंपारण में सर्किल अफसर बनाए गए हैं।

यहां अभी तक किसी की तैनाती नहीं हुई है। फोन पर हुई बातचीत में बद्री प्रसाद ने दैनिक जागरण को बताया कि लेखपाल और पुलिस बल नहीं मिल पाने की वजह से करीब डेढ़ साल में अभी तक सिर्फ दो गाटों की ही पैमाइश हो सकी है।

यहां चिह्नित 41 लोगों की बेदखली के लिए एसडीएम सदर कोर्ट में वाद दाखिल किया गया था लेकिन, उसमें भी अभी तक कोई निर्णय नहीं हो सका है। सिर्फ तारीख मिल रही है। इस संबंध में भी राजस्व परिषद को अवगत कराया जा चुका है।

उधर, हाल ही में बिहार सरकार की ओर से बेतिया राज की संपत्तियों को निहित करने वाली नियमावली, 2026 के तहत करीब 40 साल पहले से संबंधित संपत्ति पर काबिज लोगों, जिनके पास वैध दस्तावेज हैं, उन्हें मालिकाना हक दिए जाने संबंधी फैसले को लेकर भी बद्री प्रसाद गुप्ता का कहना है कि इस संबंध में भी अभी कोई गाइडलाइन नहीं जारी हुई है।

जिले में बेतिया राज की संपत्ति सिर्फ बेतियाहाता में है। कुल 51 एकड़ भूमि के ज्यादातर हिस्से में कब्जा है। इनमें भी सरकारी निर्माण ज्यादा है। कहीं मकान बने हैं तो कहीं सड़क, नाली, स्कूल है।

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कुशीनगर में सर्वाधिक 61 एकड़ भूमि

गोरखपुर के बेतियाहाता में बेतिया राज की करीब 50.92 एकड़ भूमि, महराजगंज में 7.34 एकड़ भूमि और कुशीनगर के कप्तानगंज, हाटा और पडरौना क्षेत्र में सर्वाधिक 61 एकड़ भूमि है। सभी पर कब्जा है। गोरखपुर में तो ज्यादातर भूमि पर सरकारी भवन, स्कूल, कालेज, धार्मिक स्थल, सड़क, नाली आदि का निर्माण है। महराजगंज में निरीक्षण के दौरान खेती और मकान मिले। इसी तरह कुशीनगर में भी ज्यादातर भूमि पर निर्माण पाया गया है।

गोरखपुर में बेतिया राज की संपत्तियां (हेक्टेयर में)

  • कमिश्नर आवास परिसर- 4.799
  • सड़क- 4.649
  • आफिस आवास, कालोनी व पेड़-पौधे- 3.501
  • मकान- 2.237
  • आवास विकास कालोनी- 1.433
  • तुलसीदास इंटर कालेज- 1.526
  • पक्का मकान- 1.259
  • पानी की टंकी व स्कूल- 0.060
  • कब्रिस्तान- 0.080
  • नाली- 0.016
  • खंदक- 0.101
  • रास्ता- 0.380
  • (नोट- इसके अलावा बिहार राजस्व परिषद के अधिकारी तीन एकड़ भूमि और बेतिया राज की होने का दावा कर रहे हैं)