गोरखपुर में GDA के सामने ट्रांसफार्मर से फिर तेल चोरी, चार महीने के अंदर दो बार हो चुकी है वारदात
गोरखपुर में जीडीए के सामने स्थापित ट्रांसफार्मर से गुरुवार देर रात फिर तेल चोरी हो गई, जो चार महीने में ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
HighLights
जीडीए के सामने ट्रांसफार्मर से फिर तेल चोरी हुई।
चार महीने में यह चौथी बार तेल चोरी की घटना।
बिजली आपूर्ति के दौरान हुई चोरी, पुलिस निष्क्रिय।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) के सामने स्थापित ट्रांसफार्मर से एक बार फिर तेल चाेरी हो गया है। चार सौ केवीए क्षमता के ट्रांसफार्मर से गुरुवार देर रात तेल चोरी हुई है। चार महीने में ट्रांसफार्मर से तेल चोरी की यह चौथी घटना है। यह ट्रांसफार्मर देवरिया बाईपास फोरलेन के बिल्कुल किनारे स्थापित हैं और यहां दिन-रात लोगों का आवागमन रहता है। तेल चोरी की घटना तब हुई है जब बिजली की आपूर्ति हो रही थी। गंभीर बात यह है कि तेल चोरी की घटना में एफआइआर दर्ज होने के बाद भी पुलिस कुछ नहीं कर पा रही है।
देवरिया बाईपास पर जीडीए के सामने चार-चार सौ केवीए क्षमता के दो ट्रांसफार्मर अगल-बगल में स्थापित हैं। इन ट्रांसफार्मर से जीडीए के सामने ही सामने की अश्वमेघनगर कालोनी में बिजली दी जाती है। चार महीने पहले एक ट्रांसफार्मर से तेल चोरी हुई। सुबह टहलने निकले लोगों ने इसकी जानकारी बिजली निगम के अभियंताओं को दी तो आपूर्ति बंद कराई गई।
गनीमत रही कि ट्रांसफार्मर जलने से बच गया। तत्कालीन जेई ने एफआइआर दर्ज कराई लेकिन पुलिस न तो चोरों को पकड़ सकी और न ही तेल बरामद कर सकी। एक हफ्ते बाद बगल में रखे दूसरे ट्रांसफार्मर से तेल चोरी हो गया। ट्रांसफार्मर जलने के बाद इसकी जानकारी हुई। इस मामले में भी एफआइआर दर्ज कराई गई लेकिन कुछ नहीं हुआ। तकरीबन एक महीने पहले जीडीए के सामने सड़क के दूसरी तरफ केनरा बैंक के पास स्थापित चार सौ केवीए क्षमता के ट्रांसफार्मर से तेल चुरा लिया गया। गोलघर के एसडीओ अजीत पटेल ने कहा कि तारामंडल के जेई विजय सिंह को एफआइआर दर्ज कराने के लिए कहा गया है।
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पुलिस की सक्रियता पर सवाल
बिजली आपूर्ति के बीच ट्रांसफार्मर से तेल चोरी होने की घटनाओं के बाद भी पुलिस द्वारा कार्रवाई न होने से व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब सड़क किनारे के ट्रांसफार्मर नहीं सुरक्षित हैं तो कालोनियों के अंदर के ट्रांसफार्मरों की सुरक्षा की कौन कहे।
