गोरखपुर में मिठाई-नमकीन निर्माताओं पर खाद्य सुरक्षा विभाग की सख्ती, मिलावट पर होगी कड़ी कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा विभाग ने गोरखपुर में मिठाई और नमकीन निर्माताओं के लिए सख्त नियम लागू किए हैं। अब मिलावट, प्रतिबंधित ...और पढ़ें

खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिठाई-नमकीन निर्माताओं के लिए लागू किए सख्त प्रावधान। जागरण
HighLights
मिठाइयों में कैंसरकारी रंग रोडामाइन बी पर पूर्ण प्रतिबंध।
मावा, पनीर 4 डिग्री सेल्सियस पर रखना अनिवार्य, बासी मावे पर रोक।
तेल को तीन बार से अधिक गर्म करने पर कार्रवाई, उपयोग तिथि प्रदर्शित करें।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। मिठाई और नमकीन में मिलावट, प्रतिबंधित रसायनों के इस्तेमाल और ग्राहकों को गुमराह करने वाले खाद्य कारोबारियों के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई की जाएगी। लाल-गुलाबी मिठाइयों में कैंसरकारी रंग रोडामाइन बी, पीली मिठाइयों में मेटानिल यलो, मावा-पनीर में हानिकारक रसायन और नमकीन तलने में मानक से अधिक खराब तेल का इस्तेमाल करने वालों पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत विधिक और दंडात्मक कार्रवाई होगी। खुले मिठाई काउंटर पर उपयोग की अंतिम तिथि प्रदर्शित नहीं करने, खाद्य पदार्थों को अखबार में लपेटने और बिना वैध लाइसेंस कारोबार करने पर भी विभाग कार्रवाई करेगा।
लाल-पीले रंग की मिठाइयों पर रहेगी नजर
सहायक आयुक्त ने विभाग ने मिठाइयों में रोडामाइन बी और मेटानिल यलो जैसे प्रतिबंधित रंगों के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। रोडामाइन बी का इस्तेमाल लाल और गुलाबी मिठाइयों में, जबकि मेटानिल यलो का प्रयोग पीली मिठाइयों और जलेबी में किया जा सकता है। ये गैर-खाद्य रंग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। मावा और पनीर बनाने में डिटर्जेंट, यूरिया, टिनोपाल, रानीपाल तथा प्रतिबंधित ब्लीचिंग एजेंट का इस्तेमाल करने वालों पर भी कार्रवाई होगी।
चार डिग्री तापमान पर रखना होगा मावा
मावा, छेना और पनीर जैसे जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थों को चार डिग्री सेल्सियस या उससे कम तापमान पर रेफ्रिजरेटर में रखना अनिवार्य किया गया है। बासी मावे की दुर्गंध छिपाने के लिए प्रतिबंधित एसेंस का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। मिठाई और नमकीन बनाने में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल भी गुणवत्तापूर्ण होना चाहिए।
तीन बार से अधिक गर्म नहीं होगा तेल
नमकीन और अन्य स्नैक्स तलने के लिए इस्तेमाल होने वाले तेल में टोटल पोलर कंपाउंड्स (टीपीसी) की मात्रा 25 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। तेल को तीन बार से अधिक गर्म करके इस्तेमाल न करने का निर्देश दिया गया है। खराब हो चुके इस्तेमाल किए गए तेल का निस्तारण एफएसएसएआइ के अधिकृत एग्रीगेटर्स के माध्यम से करना होगा। वनस्पति घी और मार्जरीन में ट्रांस फैट की मात्रा अधिकतम दो प्रतिशत तक ही अनुमन्य है।
खुले काउंटर पर बतानी होगी अंतिम तिथि
मिठाई की दुकानों पर खुले उत्पादों के काउंटर के पास उपयोग की अंतिम तिथि यानी ''यूज बाय डेट'' प्रदर्शित करनी होगी। पैकेट बंद मिठाई और नमकीन पर सामग्री की सूची, पोषण संबंधी जानकारी, शाकाहारी चिह्न, बैच नंबर, लाइसेंस नंबर और उत्पाद की शेल्फ लाइफ स्पष्ट रूप से दर्ज करनी होगी। खाद्य पदार्थों को अखबार या रद्दी कागज में लपेटने पर रोक लगाई गई है। इसके स्थान पर खाद्य पदार्थों के लिए सुरक्षित पैकेजिंग सामग्री का इस्तेमाल करना होगा।
चांदी का वर्क और मेवों की शुद्धता भी जरूरी
मिठाइयों पर इस्तेमाल होने वाला चांदी का वर्क 99.9 प्रतिशत शुद्ध चांदी का होना चाहिए। इसमें निकल, एल्यूमीनियम या अन्य भारी धातुओं की मिलावट नहीं होनी चाहिए। काजू और बादाम के नाम पर मूंगफली का चूरा या एसेंस इस्तेमाल करके ग्राहकों को भ्रमित करना भी प्रतिबंधित है।
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सभी खाद्य कारोबारियों को रखना होगा एफएसएसएआइ लाइसेंस
सभी खाद्य कारोबारियों के पास वैध एफएसएसएआइ लाइसेंस होना चाहिए। बेसन, मैदा, मावा और तेल सहित कच्चे माल के खरीद बिल, गारंटी प्रमाणपत्र, कीट नियंत्रण के अभिलेख और खाद्य पदार्थ बनाने वाले कर्मचारियों के स्वास्थ्य प्रमाणपत्र सुरक्षित रखने होंगे। निर्माण स्थलों पर साफ-सफाई, पर्याप्त हवा की व्यवस्था, सुरक्षित पेयजल और कच्चे माल से तैयार उत्पाद तक अलग-अलग कार्य क्षेत्रों की व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी होगी।
नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत विधिक और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
- सुधीर कुमार सिंह, सहायक आयुक्त खाद्य
