जागरण एजेंडा: गोरखपुर में चार साल में बढ़ गए दस हजार ई-रिक्शा, फाइलों में बनते रहे रूट
गोरखपुर में पिछले चार साल में दस हजार ई-रिक्शा बढ़ने से शहर में जाम, दुर्घटनाएं और प्रदूषण की समस्या गंभीर ...और पढ़ें

ई-रिक्शा। जागरण
HighLights
गोरखपुर में चार साल में दस हजार ई-रिक्शा बढ़े।
ई-रिक्शा से शहर में जाम, दुर्घटनाएं और प्रदूषण बढ़ा।
रूट निर्धारण के प्रयास चालकों के विरोध से विफल रहे।
प्रेम नारायण द्विवेदी, गोरखपुर। कोर्ट ने यूं ही नहीं ई-रिक्शा के बेतहाशा बढ़ती संख्या पर चिंता जताई है। गोरखपुर में ही महज चार साल में करीब दस हजार ई-रिक्शा बढ़े हैं। वर्ष 2023 में परिवहन विभाग में 8500 ई- रिक्शा पंजीकृत थे। आज 18 हजार पार कर गए हैं। ई-रिक्शा बढ़ने के साथ महानगर में राह चलना मुश्किल होता गया।
ई-रिक्शा जाम के कारण बनते गए। हर पल दुर्घटनाओं को दावत देते रहे। पर्यावरण प्रदूषित होता रहा, लेकिन संबंधित विभागों और अधिकारियों की तंद्रा नहीं टूटी। परिवहन विभाग और यातायात पुलिस उदासीन बनी रही। उनकी फाइलों में ई-रिक्शा के रूट और जोन बनते रहे। पांच साल हो गए, लेकिन फाइलों से बाहर नहीं निकल पाए। सारी कवायदें धरी रह गईं। न जाम पर अंकुश लग पाया और न पर्यावरण संरक्षित हुआ। दुर्घटनाएं भी होती रहीं।
इसे परिवहन विभाग और यातायात पुलिस की दृढ़ इच्छाशक्ति का अभाव कहें या चालकों का व यूनियनों का दबाव। वर्ष 2022 से ही ई-रिक्शा के लिए रूट निर्धारित किए जा रहे हैं। वर्ष के आरंभ में भी परिवहन विभाग ने ई-रिक्शा के लिए महानगर में 19 रूट निर्धारित कर दिया था, लेकिन न चालकों ने कोई रुचि ली और न विभाग के अधिकारियों का संकल्प दिखा। चालकों के विरोध के बाद परिवहन विभाग भी बैकफुट पर आ गया।
रूट निर्धारण की योजना परवान चढ़ने से पहले ही धराशायी हो गई। एक दिसंबर, 2022 को संभागीय परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) की बैठक में ई-रिक्शा संचालन के लिए जोन व रूट निर्धारण का निर्णय लिया गया था। एक माह के अंदर प्रक्रिया पूरी होनी थी। 19 रूट भी निर्धारित कर लिए गए। पांच वर्ष हो गए, लेकिन प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। ऐसा नहीं है कि परिवहन विभाग ने प्रयास नहीं किए।
वर्ष 2023-24 और 2024-25 में परिवहन विभाग, यातायात पुलिस और यूनियनों की बैठकें हुईं। लेकिन, यूनियन फिर से विरोध में उतर आए। परिवहन विभाग ने भी बैठकों में रूट और जोन निर्धारण कर खानापूरी कर ली। जानकारों का कहना है कि, सभी चालक, रेलवे, बस और प्रमुख बाजार व चौराहों पर ही चलना चाहते हैं। ऐसे में रूट को लेकर सहमति ही नहीं बन पाती है।
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स्थिति यह है कि ई-रिक्शा के लिए कोई मानक ही नहीं है। चालक अपनी सुविधा के अनुसार ई-रिक्शा चला रहे हैं। जहां इच्छा होती है वहीं ई-रिक्शा रोक देते हैं। जिस रूट पर मन करता है, चल देते हैं। इनके लिए न कोई पार्किंग है और न रूट। मुख्य चौराहे वाली सड़कों पर इनका कब्जा रहता है। सरकार की दी हुई सुविधा आमजन के लिए असुविधा बन गई है। लोगों ने इसे कमाई का जरिया (व्यवसाय) बना लिया है। थोक में ई-रिक्शा खरीदकर भाड़े पर चलवा रहे हैं। परिवहन विभाग भी बिक्री पर रोक नहीं लगा पा रहा।
त्योहार बाद ई-रिक्शा का रूट और जोन निर्धारित कर दिया जाएगा। इसके लिए संबंधित से भी विचार-विमर्श किए जाएंगे। प्रयास किया जाएगा कि चालक जिस क्षेत्र के हैं, उसी क्षेत्र में ई-रिक्शा चलाएं। एक व्यक्ति के नाम पर दो से तीन ई-रिक्शा ही पंजीकृत किया जा रहा है।
- अरुण कुमार- सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी
छठ पर्व बाद ई-रिक्शा के लिए सख्ती से जोन का निर्धारण सुनिश्चित कर दिया जाएगा। शासन और परिवहन विभाग के दिशा-निर्देशों का अनुपालन कराया जाएगा। प्रयास किए जा रहे हैं कि महानगर में जाम न लगे। लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। कार्रवाई भी की जा रही है।
- अमित श्रीवास्तव- पुलिस अधीक्षक (यातायात)
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