गोरखपुर में रोल्स-रॉयस पर पर निकली माई, देखते बनी मां दुर्गा की विदाई
गोरखपुर के गोलघर स्थित बलदेव प्लाजा के व्यापारियों ने मां दुर्गा की विदाई यात्रा को शाही अंदाज दिया, जहां प्रतिमा ...और पढ़ें
HighLights
गोरखपुर में रोल्स-रॉयस कार में निकली मां दुर्गा की विदाई।
बलदेव प्लाजा के व्यापारियों ने दिया विसर्जन को शाही अंदाज।
ढोल-नगाड़ों और रोशनी से सजी यात्रा बनी आकर्षण का केंद्र।
संगम दूबे, गोरखपुर। नौ दिन तक जिस मां की आराधना में बाजार की रौनक और श्रद्धालुओं की आस्था एकाकार रही, बुधवार को उनकी विदाई का अंदाज भी शाही रहा। गोलघर के बलदेव प्लाजा में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा जब रोल्स रायस कार पर सवार होकर विसर्जन के लिए निकली तो सड़क पर चल रहे लोगों के कदम ठिठक गए।
किसी ने सेल्फी में इस सवारी के साथ स्वयं को कैद कर इस दृश्य को स्मृति में संजो लिया, तो कोई इस अनूठी सवारी को निहारने में व्यस्त दिखा। इस तरह ढोल-नगाड़ों की गूंज, गाजे-बाजे की धुन और रोशनी से सजी यह विसर्जन यात्रा जहां से गुजरी आकर्षण का केंद्र बनी रही।
आमतौर पर प्रतिमाओं को ट्रक, ट्रैक्टर या हाथगाड़ी पर सजाकर विसर्जन के लिए ले जाया जाता है। भक्तिमय गीतों के बीच श्रद्धालु मां को विदा करते हैं, लेकिन बलदेव प्लाजा के व्यापारियों ने इस बार परंपरागत दृश्य में एक अलग रंग भर दिया। मां की प्रतिमा के लिए रोल्स रायस कार को सवारी बनाया गया। कार के साथ चलते श्रद्धालु, गूंजते ढोल-नगाड़े और राह को रोशन करती रोड लाइट इस यात्रा को खास बना रहे थे। गोलघर की व्यस्त सड़कों पर गुजरती इस सवारी ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

नौ दिन की भक्ति, विदाई में भी वही भव्यता
यह सिर्फ प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जाने का दृश्य नहीं था, बल्कि नौ दिनों तक चली आराधना को विदाई देने का भाव भी था। जिन मां के दरबार में श्रद्धालुओं ने शीश झुकाया, जिनके सामने सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की, उन्हीं को विदा करने के लिए व्यापारियों ने खास इंतजाम किया था।
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बलदेव प्लाजा के व्यापारियों की यह अनूठी पहल बाजार में चर्चा का विषय बनी रही। विंटेज कार पर सवार मां दुर्गा की प्रतिमा और उसके साथ उमड़ा श्रद्धालुओं का हुजूम शहर में विसर्जन के परिचित दृश्य से अलग नजर आया।
आस्था, उल्लास और भव्यता के मेल ने इस यात्रा को यादगार बना दिया। आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि जिस भव्यता के साथ नौ दिन मां की आराधना की जाती है, उसी भव्यता के साथ उन्हें विदाई भी दी जाती है। उनके लिए यह आयोजन मां के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का एक विशेष तरीका था।
