गोरखपुर में गुंबद हादसे की वैज्ञानिक जांच, ISRO से रिपोर्ट मंगाकर तय होगी आकाशीय बिजली की सच्चाई
गोरखपुर में राप्ती नदी के तट पर गुरु गोरक्षनाथ घाट पर गुंबदनुमा छज्जा गिरने से दो अधिवक्ताओं की मौत के ...और पढ़ें

इसरो से मंगाई जाएगी रिपोर्ट, आकाशीय बिजली के संकेतों से होगी घटना की पुष्टि। जागरण
HighLights
गुरु गोरक्षनाथ घाट पर छज्जा गिरने से दो अधिवक्ताओं की मौत।
प्रशासन घटना के कारण की वैज्ञानिक पुष्टि कराएगा, इसरो से रिपोर्ट।
आकाशीय बिजली के दावे पर सवाल, निर्माण गुणवत्ता की भी जांच।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। राप्ती नदी के तट पर गुरु गोरक्षनाथ घाट में छह सितंबर को गुंबदनुमा छज्जा गिरने से दो अधिवक्ताओं की मौत के मामले में प्रशासन अब घटना के कारण की वैज्ञानिक पुष्टि कराएगा। मौके पर मौजूद लोगों ने बिजली गिरने के बाद छज्जा गिरने की बात कही थी, लेकिन घटना के बाद कुछ अधिवक्ताओं ने इस दावे पर सवाल उठाए।
उनका कहना है कि मौके पर आकाशीय बिजली गिरने के स्पष्ट निशान नहीं मिले हैं। इन चर्चाओं पर विराम लगाने के लिए प्रशासन राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (एनआरएससी), इसरो या भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आइआइटीएम), पुणे से रिपोर्ट मंगाने की तैयारी में है।
गोरखपुर निवासी अधिवक्ता विनोद तिवारी की माता के निधन के बाद छह सितंबर को गुरु गोरक्षनाथ घाट पर अंतिम संस्कार किया जा रहा था। इसमें उनके साथी अधिवक्ता आलोक अस्थाना और संजय सिंह भी शामिल हुए थे। इसी दौरान बारिश शुरू हो गई। बारिश से बचने के लिए दोनों गुंबदनुमा छज्जे के नीचे बैठ गए। कुछ देर बाद बारिश तेज हुई और अचानक छत भरभरा कर गिर गई। मलबे में दबकर दोनों गंभीर रूप से घायल हुए और उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
बिजली गिरने की बात पर उठे सवाल
घटना के तत्काल बाद मौके पर मौजूद लोगों ने तेज कड़कड़ाहट सुनने और इसके बाद गुंबद गिरने की बात बताई थी। प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर प्रशासन ने भी प्रथम दृष्टया आकाशीय बिजली गिरने को हादसे का कारण माना था। इसी आधार पर दोनों दिवंगत अधिवक्ताओं के परिवारों को आपदा विभाग से आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई गई।

हालांकि बाद में कुछ अधिवक्ताओं ने मौके पर बिजली गिरने के निशान नहीं होने का तर्क देते हुए निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। प्रशासन ने इस पहलू को भी जांच के दायरे में रखा। पांच वर्ष पहले निर्माण कराने वाली फर्म मेसर्स अनीता सिंह, दो जेई और एक एई के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई है। सभी को हिरासत में लेकर पुलिस पूछताछ कर रही है।
रेडियो तरंगों से तलाशे जाएंगे बिजली गिरने के संकेत
प्रशासन अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि घटना के समय वास्तव में उस स्थान पर आकाशीय बिजली गिरी थी या नहीं। इसके लिए ऐसी वैज्ञानिक रिपोर्ट ली जाएगी, जिसमें आकाशीय बिजली के दौरान उत्पन्न होने वाले रेडियो सिग्नल का विश्लेषण किया जाता है। जमीन पर लगे सेंसर बिजली चमकने से उत्पन्न वीएलएफ/वीएचएफ सिग्नल पकड़ते हैं।
कई सेंसर से मिले संकेतों के समय का मिलान कर बिजली गिरने के स्थान के अक्षांश-देशांतर का निर्धारण किया जा सकता है। हालांकि इसके लिए यह भी देखा जाएगा कि घटना वाले क्षेत्र में संबंधित सेंसर उपलब्ध था या नहीं। सेंसर नहीं होने की स्थिति में वैज्ञानिक पुष्टि में कठिनाई आ सकती है।
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डीएम दीपक मीणा ने कहा कि घटना के कारण की वैज्ञानिक तरीके से पुष्टि कराई जाएगी। मौके पर मौजूद सभी लोगों ने बिजली गिरने की बात कही है, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठे हैं। निर्माण कराने वाले ठेकेदार, जेई और एई के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है। उच्चस्तरीय समिति सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
