गोरखपुर में कोर्ट ने मोबाइल फोन सुपुर्द करने को कहा...दारोगा ने एफएसएल भेज दिया
न्यायालय के आदेश के बावजूद मोबाइल फोन को विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजने पर गोरखपुर न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। ...और पढ़ें

न्यायालय के आदेश की अवहेलना पर तिवारीपुर थानेदार से जवाब तलब। जागरण
HighLights
न्यायालय ने मोबाइल फोन सुपुर्द करने का आदेश दिया था।
दारोगा ने बिना अनुमति मोबाइल एफएसएल वाराणसी भेज दिया।
तिवारीपुर थानेदार से न्यायालय ने व्यक्तिगत स्पष्टीकरण तलब किया।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। तिवारीपुर थाने के एक दारोगा की कार्रवाई पर न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। आरोपित के पास से बरामद मोबाइल फोन को नियमानुसार सुपुर्द करने का आदेश होने के बावजूद पुलिस ने उसे न्यायालय की अनुमति के बिना विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल), रामनगर वाराणसी भेज दिया।
आदेश की अवहेलना को प्रथमदृष्टया गंभीर मानते हुए प्रभारी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने तिवारीपुर थाना प्रभारी से व्यक्तिगत स्पष्टीकरण तलब किया है। न्यायालय ने चेतावनी दी है कि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर संबंधित के विरुद्ध अवमानना अधिनियम के तहत इलाहाबाद हाईकोर्ट में संदर्भ भेजा जाएगा।
मोबाइल रिलीज करने के प्रार्थनापत्र पर न्यायालय ने 21 अगस्त को मोबाइल फोन को नियमानुसार सुपुर्द करने का आदेश दिया था। इसकी प्रति 22 अगस्त को तिवारीपुर थाने के पैरोकार ने प्राप्त कर ली थी। इसके बावजूद आदेश का अनुपालन करने के बजाय पुलिस ने 31 अगस्त को मोबाइल फोन न्यायालय की अनुमति लिए बिना एफएसएल वाराणसी भेज दिया।
न्यायालय ने पुलिस से मोबाइल सुपुर्द करने के संबंध में आख्या भी मांगी थी। उस समय पुलिस की ओर से मोबाइल को एफएसएल भेजने की आवश्यकता या प्रस्तावित कार्रवाई के बारे में न्यायालय को कोई जानकारी नहीं दी गई। न्यायालय ने थाना प्रभारी से पूछा है कि 21 अगस्त के आदेश की जानकारी होने के बावजूद उसका अनुपालन क्यों नहीं किया गया और बिना अनुमति मोबाइल एफएसएल क्यों भेजा गया।
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साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि उनके विरुद्ध न्यायालय की अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 15(2) के तहत हाईकोर्ट में अवमानना कार्यवाही के लिए संदर्भ क्यों न भेजा जाए।
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