गोरखपुर में कांग्रेस का 'काला दिवस' प्रदर्शन, सपा रही दूर और कांग्रेसी भी नहीं जुटे भरपूर
कांग्रेस ने गोरखपुर में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने और विपक्षी नेताओं की हिरासत के विरोध में 'काला दिवस' मनाया। ...और पढ़ें

नगर निगम में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का धरना। जागरण
HighLights
कांग्रेस ने गोरखपुर में 'काला दिवस' मनाकर विरोध प्रदर्शन किया।
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने और नेताओं की हिरासत का विरोध।
सपा नेताओं की अनुपस्थिति और कांग्रेसियों की कम भागीदारी दिखी।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने और दिल्ली में विपक्षी दलों के नेताओं को जंतर-मंतर पर जाने से रोकने का कांग्रेसी दमदारी से विरोध नहीं कर सके। अखिलेश यादव के हिरासत में लिए जाने के और गठबंधन की संभावनों के बाद भी सपा नेता कांग्रेसियों के साथ विरोध में नहीं खड़े हुए।
कांग्रेसी भी बमुश्किल 50 ही आए और ज्ञापन लिए जाने का इंतजार करते रहे। यह संख्या तब है जब जिला के साथ ही महानगर कांग्रेस कमेटी ने भी धरना में हिस्सा लिया। यदि सिर्फ महानगर के ही सभी वार्डोंं के अध्यक्ष आ जाते तो संख्या 80 से ज्यादा होती क्योंकि महानगर में वार्ड की संख्या 80 है।
राहुल गांधी व प्रियंका गांधी वाड्रा को हिरासत में लिए जाने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने जाने की मांग को लेकर कांग्रेस नेतृत्व ने गुरुवार को काला दिवस मनाने के लिए सभी को निर्देश दिए थे। दोपहर तकरीबन 12 बजे कांग्रेसी नगर निगम स्थित रानी लक्ष्मीबाई पार्क में पहुंचे और धरना देना शुरू किया।
जिलाध्यक्ष राजेश कुमार तिवारी ने कहा कि भाजपा सरकार ने लोकतंत्र की हत्या कर दी है। प्रधानमंत्री को भी इस्तीफा देना चाहिए। कहा कि दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष के सांसदों द्वारा जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए निकले मार्च को प्रशासन द्वारा बलपूर्वक रोका गया और सभी से अभद्रता की गई। इसके विरोध में कांग्रेस लोकतंत्र के लिए काला दिवस के रूप में इसे मना रही है।
यह भी पढ़ें- 6 दशक पुराना लीज, 17 साल का बकाया; गोरखपुर में जलभराव का कारण बना दो मंजिला मकान दीपावली के बाद होगा ध्वस्त
इनको बुलाया गया था
सभी वरिष्ठ कांग्रेसी, एआइसीसी सदस्य, पीसीसी सदस्य, पूर्व सांसद, विधायक, सांसद प्रत्याशी, विधानसभा प्रत्याशी, जिला महानगर कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी, पूर्व जिला, महानगर अध्यक्ष पदाधिकारी सभी फ्रन्टल / विभाग / प्रकोष्ठ के अध्यक्ष पदाधिकारी महिला कांग्रेस आदि को धरना देने के लिए बुलाया गया था लेकिन महिला संगठन से इक्का-दुक्का नेताओं को छोड़कर कोई नहीं आया।
