गोरखपुर में प्रतिबंधित 'थाई मांगुर' पर एक्शन: सड़े अंडों से तैयार हो रही थी जहरीली मछली, 3 पालकों पर केस
गोरखपुर में प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली पालन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई है। कैंपियरगंज में 15 क्विंटल से अधिक ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
HighLights
गोरखपुर में प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली पालन पर कार्रवाई।
सड़े अंडे-मांस खिलाकर पाली जा रही थीं 15 क्विंटल मछलियां।
तीन पालकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की तहरीर दी गई।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। जिले में प्रतिबंधित थाई मांगुर मछलियों को सड़े- गले अंडे, मुर्गों का खराब मांस खिलाकर पाला जा रहा है। बुधवार को कैंपियरगंज क्षेत्र के खजुरगांवा में मत्स्य, पुलिस और राजस्व विभाग की जांच में 15 क्विंटल से अधिक प्रतिबंधित थाई मछलियां मिलीं। अधिकारियों ने मछलियों को निकलवाकर गड्ढों में दबवाकर नष्ट करा दिया। इस मामले में तीन पालकों के खिलाफ केस दर्ज कराने के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी शिवरतन की ओर से कैंपियरगंज पुलिस को तहरीर दी गई है।
मिली जानकारी के अनुसार खजुरगांवा में प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली पालने की शिकायत अधिकारियों को मिली। इसके आधार पर मत्स्य, राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम ने जांच की। सामने आया कि ग्राम सभा खजुरगावां के टोला शिवरतनपुर, तिवारीपुर और पंडितपुर में मछली पालग अवैध तरीके से पोखरों में मछली पाल रहे हैं। उन मछलियों को बाजार में आसानी से उपलब्ध सड़ा- गला अंडा, मुर्गी- मुर्गों का बचा हुआ मांस इत्यादि उबालकर खिलाया जा रहा है।
इससे पूरे गांव में गंदगी और प्रदूषण की समस्या बनी हुई है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मत्स्य विभाग ने मछलियों को निकलवाकर नष्ट कराया। इस दाैरान पता चला कि महराजगंज जिले के फरेंदा, शनिचरहिया के रहने वाले सूरज सिंह शिवरतनपुर में पोखरा खोदवाकर मछली पालन करते हैं। कैंपिरयगंज के ग्राम पंचमा के शफीउलहक का पोखरा तिवारीपुर और पंडितपुर के आकाश सिंह का पोखरा पंडितपुर में है।
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तीनों लोग प्रतिबंधित थाई मांगुर का पालन करके हरित न्यायधिकरण एनजीटी के आदेशों का उल्लंघन कर रहे हैं। इसलिए उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाना आवश्यक है। इसको संज्ञान में लेते हुए मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने कैंपियरगंज थाना में तहरीर दी।
इस संबंध में उपनिदेशक मत्स्य बृजेश कुमार ने बताया कि नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। बीएनएस की धारा 272 के तहत ऐसे व्यक्ति, जो जानता है कि इससे जीवन के लिए खतरनाक किसी बीमारी का संक्रमण फैल सकता है। फिर भी वह जानबूझकर कार्य करता है। तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है।
