गोरखपुर के गुरु गोरक्षनाथ घाट का द्वार 5 साल में ही टूटा, अब आरसीसी से बनेगा नया मजबूत गेट
गोरखपुर के महायोगी गुरु गोरक्षनाथ घाट का पांच साल पुराना पत्थर का द्वार बेकार हो गया है। सिंचाई विभाग अब ...और पढ़ें
HighLights
गुरु गोरक्षनाथ घाट का पत्थर का द्वार पांच साल में बेकार।
सिंचाई विभाग अब आरसीसी का नया, मजबूत द्वार बनाएगा।
घाट के सुंदरीकरण पर 48 करोड़ से अधिक खर्च हुए थे।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। महायोगी गुरु गोरक्षनाथ घाट पर बना पत्थर का द्वार पांच साल में ही बेकार हो गया है। सिंचाई विभाग इस द्वार को गिराकर अब नया द्वार बनाने जा रहा है। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। नया द्वार पत्थर का नहीं आरसीसी का बनेगा। यह पहले से ज्यादा चौड़ा, ज्यादा मजबूत और ज्यादा ऊंचा होगा।
आरसीसी के द्वार पर नक्काशीदार पत्थर लगाए जाएंगे। घाट की तरफ गजीबो और अन्य निर्माण की जांच की जा रही है। घाट पर सभी गजीबो की बैरिकेडिंग करा दी गई है। पुरातत्व विभाग की टीम भी जांच कर रही है। सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता विकास कुमार सिंह ने कहा कि काम शुरू कराया गया है।
जिस महायोगी गुरु गोरक्षनाथ घाट पर गजीबो गिरा है, उसका सुंदरीकरण सिंचाई विभाग ने कराया है। महायोगी गुरु गोरक्षनाथ घाट के साथ ही राप्ती नदी के किनारे नौसढ़ की तरफ रामघाट के सुंदरीकरण पर 48 करोड़ 83 लाख 71 हजार रुपये खर्च हुए हैं। घाट के हैंडओवर को लेकर नगर निगम और सिंचाई विभाग में मामला फंसा था। सिंचाई विभाग का कहना है कि नौ अक्टूर 2025 को नगर निगम को घाट हैंडओवर हो चुका है तो नगर निगम का कहना है कि अभी हैंडओवर नहीं हुआ है।
राप्ती नदी के तट पर दोनों घाटों के सुंदरीकरण का कार्य मार्च 2019 में शुरू कराया गया था। 16 फरवरी 2021 को इसका लोकार्पण हुआ था। निर्माण के साथ ही गुणवत्ता को लेकर सवाल भी उठने लगे थे।

लाल पत्थर से हुआ है निर्माण
राप्ती तट पर राजघाट कभी सिर्फ श्मशान के कारण ही जाना जाता था। यहां पार्थिव शरीर लेकर ही लोग पहुंचते थे। मार्च 2019 में राप्ती नदी के दोनों तरफ के घाटों के सुंदरीकरण की सिंचाई विभाग ने शुरुआत कराई। राजघाट पर श्मशान स्थल की तरफ 27 करोड़ 85 लाख 71 हजार रुपये की लागत से महायोगी गुरु गोरक्षनाथ घाट का सुंदरीकरण कराया गया। लाल पत्थर से बनीं चौड़ी सीढ़ियों के साथ ही पर्यटकों के बैठने के लिए गजीबो बनाया गया।
महायोगी गुरु गोरक्षनाथ घाट की तरफ सात गजीबो का निर्माण कराया गया था। इनमें से एक गजीबो अब क्षतिग्रस्त हो चुका है। घाट पर कपड़े बदलने के लिए तीन कक्ष भी बनाए गए हैं। यहां काफी दिन तक नौकायन की भी सुविधा उपलब्ध कराई गई थी। हालांकि बनने के बाद ही अव्यवस्था भी सामने आने लगी। इसके साथ ही 11 करोड़ 60 लाख 93 हजार रुपये की लागत से अन्त्येष्टि स्थल और प्रदूषण मुक्त लकड़ी एवं गैस आधारित शवदाह संयंत्र की स्थापना भी हुई है। इन सभी कार्यों का लोकार्पण एक साथ हुआ था।
नगर निगम ने असुरक्षित घोषित किया था मुख्य द्वार
गजीबो गिरने से दो अधिवक्ताओं की मृत्यु के बाद नगर निगम ने घाट के मुख्य द्वार को असुरक्षित घोषित कर दिया है। इस द्वार पर बैनर लगाकर लोगों को इससे दूर रहने के लिए सजग किया जा रहा है।
नगर निगम ने यह काम कराया
- राजघाट पर अन्त्येष्टि स्थल का निर्माण - 1054.63 लाख
- प्रदूषण मुक्त लकड़ी एवं गैस आधारित शवदाह संयंत्र की स्थापना - 106.3 लाख
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सिंचाई विभाग ने यह काम कराया
- राप्ती नदी के बाएं तट पर महायोगी गुरु गोरक्षनाथ घाट का निर्माण - 2785.71 लाख
- राप्ती नदी के बाएं तट पर राज घाट का निर्माण - 499 लाख
- राप्ती नदी के दाएं तट पर रामघाट का निर्माण - 1599.00 लाख
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