अब 25 हजार तक वेतन वालों को PF, पेंशन और बीमा का सुरक्षा कवच
केंद्र सरकार ने ईपीएफओ की अनिवार्य कवरेज के लिए मासिक वेतन सीमा 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर ...और पढ़ें

12 साल बाद बढ़ी ईपीएफ की वेतन सीमा, 17 सितंबर से लागू हुई नई व्यवस्था। इंटरनेट मीडिया
HighLights
ईपीएफओ की वेतन सीमा 15 हजार से बढ़कर 25 हजार हुई।
नियोक्ताओं को 31 अक्टूबर तक ईईसी-2026 में चूक सुधारने का अवसर।
विश्वास-2026 योजना से लंबित क्षतिपूर्ति मामलों का निपटारा 28 दिसंबर तक।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। अब 25 हजार रुपये तक मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों को भी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलेगा। केंद्र सरकार ने ईपीएफ में अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दी है। नई व्यवस्था 17 सितंबर 2026 से प्रभावी हो गई है। सितंबर 2014 के बाद करीब 12 वर्ष में पहली बार वेतन सीमा में संशोधन किया गया है। इससे 15 हजार से अधिक और 25 हजार रुपये तक वेतन पाने वाले पात्र कर्मचारियों के लिए भविष्य निधि, पेंशन और बीमा का रास्ता खुल गया है।
ईपीएफओ के क्षेत्रीय कार्यालय गोरखपुर में मंगलवार को आयोजित प्रेस वार्ता में क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त अभिषेक कुमार मिश्र ने बताया कि नई व्यवस्था से पात्र कर्मचारियों को कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ), कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) और कर्मचारी जमा बीमा योजना (ईडीएलआई) का लाभ मिलेगा।
कर्मचारी के लिए सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा के साथ मासिक पेंशन और परिवार के लिए पेंशन का प्रावधान होगा। ईडीएलआई के तहत पात्र सदस्य की मृत्यु होने पर परिवार को सात लाख रुपये तक के जीवन बीमा की सुरक्षा भी मिल सकती है।
पहले 15 हजार से अधिक वेतन वाले थे दायरे से बाहर
अब तक 15 हजार रुपये से अधिक वेतन पर नियुक्त कई कर्मचारी ईपीएफ के अनिवार्य दायरे से बाहर रह जाते थे। वेतन सीमा बढ़ने से ऐसे कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलेगा। नियोक्ताओं को 25 हजार रुपये तक वेतन पाने वाले सभी पात्र कर्मचारियों का ईपीएफ में नामांकन सुनिश्चित करना होगा। यूएएन बनाने के लिए उमंग एप पर फेस आथेंटिकेशन की सुविधा का उपयोग किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि नियोक्ताओं को पूर्व की चूक सुधारने का अवसर देने के लिए कर्मचारी नामांकन अभियान (ईईसी)-2026 चलाया जा रहा है। यह अभियान 31 अक्टूबर तक प्रभावी रहेगा। इसके तहत एक अप्रैल 2009 से 31 मार्च 2026 के बीच नियुक्त ऐसे पात्र कर्मचारियों को घोषित किया जा सकेगा, जिनका पहले ईपीएफ में नामांकन नहीं हुआ है।
पूर्व में वेतन से नहीं काटे गए कर्मचारी अंश की राशि माफ रहेगी। नियोक्ता को अपना अंशदान, ब्याज और प्रशासनिक शुल्क जमा करना होगा। पूरी अवधि की क्षतिपूर्ति केवल 100 रुपये निर्धारित की गई है।
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साथ ही कहा कि विश्वास-2026 योजना के तहत लंबित क्षतिपूर्ति मामलों के एकमुश्त निपटारे का अवसर 28 दिसंबर तक है। 14 जून 2024 से पहले की चूक पर विलंब अवधि के अनुसार क्षतिपूर्ति 0.25, 0.50 और एक प्रतिशत प्रतिमाह निर्धारित की गई है। न्यायालय में लंबित, वसूली लंबित और नोटिस जारी या लंबित मामलों को भी योजना में शामिल किया गया है। क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त ने नियोक्ताओं से निर्धारित समयसीमा में दोनों योजनाओं का लाभ उठाकर कर्मचारियों का नामांकन सुनिश्चित करने की अपील की।
