गोरखपुर साइबर ठग अनिक दत्ता की लंदन तक गूंजी करतूतें, ईडी ने कुर्क की संपत्ति
ब्रिटेन के नागरिकों को इंटरनेट की गति बढ़ाने का झांसा देकर ठगने वाले अनिक दत्ता की 3.72 करोड़ रुपये की ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
HighLights
ईडी ने अनिक दत्ता की 3.72 करोड़ की संपत्ति कुर्क की।
ब्रिटिश नागरिकों को इंटरनेट स्पीड बढ़ाने का झांसा देकर ठगा।
गोरखपुर में फर्जी कॉल सेंटर चलाकर करता था धोखाधड़ी।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। ब्रिटेन के नागरिकों को इंटरनेट की गति बढ़ाने का झांसा देकर ठगने वाले अनिक दत्ता की करतूतें लंदन के अखबारों की सुर्खियां बनी थीं। वहां ठगी के शिकार लोग पुलिस तक पहुंच रहे थे और अखबारों में घटनाओं की खबरें प्रकाशित हो रही थीं। लंदन में रहने वाले गिरोह के साथी जुनैद और अश्वनी इन खबरों की कटिंग वाट्सएप के जरिये अनिक तक भेजते थे। इधर, गोरखपुर के बेतियाहाता में फर्जी काल सेंटर चलाकर गिरोह ठगी कर रहा था। तीन वर्ष की जांच के बाद इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अनिक की 3.72 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की है।
कोलकाता के नरेंद्रपुर स्थित अर्जुन पार्क का रहने वाला अनिक दत्ता साधारण परिवार से है। उसने आठवीं तक पढ़ाई की थी, लेकिन फर्राटेदार अंग्रेजी बोलता है। इसी हुनर का इस्तेमाल वह ब्रिटेन के नागरिकों को झांसे में लेने के लिए करता था। पुलिस की पूछताछ में सामने आया था कि अनिक अपने साथी आकाश गुप्ता के साथ मिलकर गोरखपुर के बेतियाहाता में फर्जी काल सेंटर चलाता था।
आशीष पांडेय और कादिर अली प्रबंधक थे, जबकि राहुल, धीरज, इकरामुल और राजन सुपरवाइजर की भूमिका निभाते थे। काल सेंटर के कर्मचारियों को हर दिन मोबाइल नंबरों की सूची दी जाती थी। वे ब्रिटेन के नागरिकों को फोन कर खुद को इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनी ओपनरीच का प्रतिनिधि बताते और इंटरनेट की गति जांचने का भरोसा दिलाते थे। यदि कोई उपभोक्ता तैयार हो जाता तो उसकी बात सुपरवाइजर से कराई जाती।
ये लोग नीक, जोनस, हैरी और विलियम जैसे विदेशी नामों से बात करते थे। इसके बाद इंटरनेट की समस्या और सुरक्षा जांच का बहाना बनाकर उपभोक्ता को अपने जाल में फंसाते थे। आगे खुद को वीपीएन कंपनी या ब्रिटेन की अपराध जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर पीड़ित से रकम स्थानांतरित कराई जाती थी।
ईडी की जांच में सामने आया कि साइबर ठगी से हासिल रकम को वेस्टर्न यूनियन और मनीग्राम जैसी अंतरराष्ट्रीय धन हस्तांतरण सेवाओं तथा हवाला के जरिए भारत, बांग्लादेश और थाईलैंड भेजा गया।
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जांच में पता चला था कि आरोपित पहले कोलकाता के काल सेंटरों में काम करते थे। वहां जालसाजी का भंडाफोड़ होने के बाद उनका काम बंद हो गया। इसके बाद अनिक ने कोलकाता में कंपनी का पंजीकरण कराया और गोरखपुर के बेतियाहाता में उसकी शाखा खोलकर फर्जी काल सेंटर चलाने लगा।
यहां करीब 25 युवक-युवतियां काम करते थे। एक कर्मचारी से गिरोह की गतिविधियों की जानकारी मिलने के बाद साइबर थाना पुलिस और क्राइम ब्रांच ने तीन महीने तक निगरानी की। साक्ष्य जुटाने के बाद 17 अगस्त 2023 को छापा मारकर गिरोह का पर्दाफाश किया गया था।
