गोरखपुर में CM योगी ने किया IMA चैरिटेबल ब्लड सेंटर का उद्घाटन, बोले- रक्त बनाया नहीं जा सकता
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में आइएमए चैरिटेबल ब्लड सेंटर का लोकार्पण किया। उन्होंने समाज सेवा में संस्थाओं की भूमिका ...और पढ़ें
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सीएम योगी आदित्यनाथ। जागरण
HighLights
सीएम योगी ने गोरखपुर में आइएमए ब्लड सेंटर का लोकार्पण किया।
स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने, पेशेवर रक्तदाताओं से बचने की अपील।
गोरखपुर में स्वास्थ्य सुविधाओं में व्यापक सुधार की बात कही।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को तारामंडल क्षेत्र में आइएमए चैरिटेबल ब्लड सेंटर का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि किसी संगठन या संस्था की वास्तविक पहचान इस बात से होती है कि वह अपनी विशेषज्ञता और संसाधनों का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए कितना योगदान देती है। सामान्य जीवन में चिकित्सक शासन की व्यवस्था से जुड़कर या निजी स्तर पर चिकित्सा सेवा देते हैं, लेकिन इससे अलग हटकर पूरी संस्था निश्शुल्क ओपीडी, ब्लड बैंक जैसी सेवाओं का संचालन करे तो यह समाज के प्रति अतिरिक्त दायित्वबोध को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर में आइएमए ने पहले निश्शुल्क ओपीडी शुरू की और अब चैरिटी के आधार पर ब्लड सेंटर स्थापित किया है। यह पूर्वी उत्तर प्रदेश के जरूरतमंद लोगों को आवश्यकता के अनुरूप रक्त उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने आइएमए गोरखपुर की पूरी इकाई और उसके सदस्यों को इसके लिए बधाई दी।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2017-18 में गोरखपुर के सीतापुर नेत्र चिकित्सालय में निश्शुल्क ओपीडी शुरू हुई थी। उस समय आइएमए ने कार्यालय के लिए भूमि की मांग की थी। बाद में उपलब्ध कराए गए भूखंड का उपयोग करते हुए संस्था ने चैरिटेबल ब्लड सेंटर स्थापित किया। गोरखपुर विकास प्राधिकरण के सहयोग से उपलब्ध कराए गए भूखंड का बेहतर उपयोग कर आइएमए ने उसके महत्व को बढ़ाया है।
रक्त बनाया नहीं जा सकता, रक्तदाता तैयार करना होगा
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं, तकनीक और संसाधन उपलब्ध कराए जा सकते हैं, लेकिन रक्त बनाया नहीं जा सकता। रक्तदान उस संवेदना का प्रतीक है, जिसमें चिकित्सक किसी जरूरतमंद की सहायता के लिए रक्तदाता को प्रेरित करता है और रक्तदान के माध्यम से किसी का जीवन बचाने का माध्यम बनता है।
उन्होंने बताया कि उन्हें वाराणसी, प्रयागराज और बरेली में आइएमए द्वारा संचालित ब्लड बैंकों को देखने का अवसर मिला है। प्रयागराज और वाराणसी में इन केंद्रों के उद्घाटन में भी वह शामिल हुए थे। उनकी इच्छा थी कि इसी तरह की व्यवस्था गोरखपुर में भी हो। आइएमए ने जब निश्शुल्क ओपीडी और बाद में अपने कार्यालय व ब्लड बैंक के लिए सहयोग मांगा तो प्रशासन के स्तर पर आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया गया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि गोरखपुर में आइएमए के सदस्यों की संख्या 1,400 से अधिक है। इतनी बड़ी संख्या में चिकित्सकों का संगठन के माध्यम से समाजसेवा में जुटना महत्वपूर्ण है। चैरिटेबल ब्लड सेंटर इसी सेवा अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी है।
स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने की अपील
मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्त की मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो पाती है। इसलिए चिकित्सकों को लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित करना चाहिए। इसके लिए सामाजिक माध्यमों का भी उपयोग किया जा सकता है। समय-समय पर लोगों से रक्तदान की अपील की जानी चाहिए।
उन्होंने पेशेवर रक्तदाताओं को लेकर भी चिकित्सकों को सजग रहने की अपील की। कहा कि विभिन्न बीमारियों से ग्रसित लोगों के रक्तदान पर प्रभावी अंकुश जरूरी है। अन्यथा भविष्य में संक्रमण का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों को शासन-प्रशासन के संज्ञान में लाने के साथ ही जागरूकता कार्यक्रमों में चिकित्सकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। चिकित्सा पेशे की संवेदनशीलता के साथ उसकी पवित्रता और विश्वसनीयता बनाए रखना भी चिकित्सकों की जिम्मेदारी है।
नौ वर्ष में बदली गोरखपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने कहा कि करीब नौ वर्ष पहले गोरखपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौतियां थीं। इंसेफ्लाइटिस को लेकर हर वर्ष अभिभावकों में भय रहता था। बीआरडी मेडिकल कालेज पूर्वी उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं का प्रमुख केंद्र था, लेकिन वहां एक बेड पर कई रोगियों के उपचार की स्थिति रही। सुविधाओं का भी अभाव था।
उन्होंने कहा कि आज वही बीआरडी मेडिकल कालेज सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं और इंसेफ्लाइटिस सहित विभिन्न रोगों के उपचार के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित हुआ है। गोरखपुर में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के साथ दो मेडिकल कालेज और चार विश्वविद्यालय संचालित हैं। आसपास के महराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, सिद्धार्थनगर, बस्ती, बलरामपुर, बहराइच, गोंडा, अयोध्या और अंबेडकरनगर समेत कई जिलों में मेडिकल कालेज शुरू हो चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 75 जिले हैं, जबकि 85 मेडिकल कालेज संचालित हैं। प्रदेश में दो अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान भी संचालित हैं। यह स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार का परिणाम है।
इंसेफ्लाइटिस पर प्रभावी नियंत्रण का दावा
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जिस इंसेफ्लाइटिस को लेकर कभी पूर्वी उत्तर प्रदेश में भय का वातावरण रहता था, उस पर प्रभावी नियंत्रण पाया गया है। उन्होंने कहा कि बच्चों को प्रभावित करने वाली इस बीमारी के कारण पहले हर वर्ष परिवार चिंतित रहते थे, लेकिन अब स्थिति में बड़ा बदलाव आया है।
उन्होंने कहा कि पहल करने से बड़े बदलाव संभव हैं। गोरखपुर के चिकित्सकों ने वर्षों से चैरिटी के क्षेत्र में भी उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रारंभ में 10 बेड से अस्पताल शुरू करने की चर्चा थी, लेकिन स्थानीय चिकित्सकों के सहयोग से इसे 100 बेड के अस्पताल के रूप में विकसित किया गया। इससे यह उदाहरण सामने आया कि चैरिटी के आधार पर भी गुणवत्तापूर्ण अस्पताल संचालित किया जा सकता है।
गोरखपुर में ही मिलने लगीं विशेषज्ञ सुविधाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय में पूर्वी उत्तर प्रदेश की पहली आइसीयू और बाद में डायलिसिस सुविधा शुरू हुई। आज गोरखपुर में कई अस्पताल गुणवत्तापूर्ण डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। सरकार ने भी जिला अस्पतालों में निश्शुल्क डायलिसिस सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में एमबीबीएस की सीटें पहले लगभग 4,600 थीं, जो अब बढ़कर 13,500 से अधिक हो गई हैं। स्नातकोत्तर सीटों में भी वृद्धि हुई है। नर्सिंग और पैरामेडिकल संस्थानों का विस्तार किया जा रहा है, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध हो सके।
उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में शोध और तकनीक को बढ़ावा देने के लिए आइआइटी कानपुर में मेडटेक सेंटर आफ एक्सीलेंस विकसित किए जाने और एसजीपीजीआइ में सेंटर आफ एक्सीलेंस विकसित करने की जानकारी भी दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवा के कार्यों से लोगों का विश्वास मजबूत होता है। उन्होंने आइएमए गोरखपुर से चैरिटेबल ब्लड सेंटर को निरंतर आगे बढ़ाने और अधिक से अधिक लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।
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कार्यक्रम में आइएमए गोरखपुर के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया। आइएमए अध्यक्ष डा. शुक्ला ने कहा कि मुख्यमंत्री के प्रेरणादायी संदेश को चिकित्सक केवल कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखेंगे, बल्कि इसे अपने जीवन में उतारने का प्रयास करेंगे। उन्होंने समाज के लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करने और ब्लड सेंटर को उच्च गुणवत्ता के साथ संचालित करने का संकल्प व्यक्त किया।
