सीएम योगी की अपील- 3 से 6 साल के बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र भेजें, बोले- सुपोषण मिशन से मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 3-6 वर्ष के बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों में भेजने का आह्वान किया, जहां उन्हें पौष्टिक आहार और खेल-खेल में शिक्षा मिलेगी।
HighLights
मुख्यमंत्री योगी ने आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को भेजने का आह्वान किया।
गोरखपुर में 926 करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण, सुपोषण मिशन शुरू।
3-6 वर्ष के बच्चों को पौष्टिक आहार, खेल-खेल में शिक्षा मिलेगी।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीन से छह वर्ष की उम्र तक के बच्चों के स्वास्थ्य और शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाने का आह्वान किया है। कहा कि तीन वर्ष से छह वर्ष तक की उम्र के बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों में भेजा जाए। उन्हें पौष्टिक आहार दिया जाए।
खेल-खेल में सीखने, अक्षर ज्ञान प्राप्त करने को प्रेरित किया जाए। समग्र विकास के लिए बाल वाटिका तथा प्री-प्राइमरी शिक्षा के कार्यक्रम को भी तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री रविवार शाम वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स स्टेडियम में 926 करोड़ रुपये की लागत वाली 226 परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास करने के बाद जनसभा को संबोधित कर रहे थे। लोकार्पण व शिलान्यास के साथ ही सुपोषण मिशन के द्वितीय चरण का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना का लाभ आने वाले समय में प्रदेश के तकरीबन दो करोड़ बच्चों को मिलने वाला है।
हमें इस बात को गहराई से समझना होगा कि यदि बचपन सुरक्षित है, तो भविष्य भी सुरक्षित है। इस बचपन को मजबूत बनाने के लिए सबसे पहले गर्भवती में कुपोषण की समस्या का समाधान करना आवश्यक है। जब मां स्वस्थ होगी, तभी बच्चा स्वस्थ होगा।
बच्चे के जीवन के प्रारंभिक हजार दिन उसकी भावी नींव के निर्माण में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि इन हजार दिनों में उचित देखभाल की जाए, तो न केवल उस परिवार के लिए, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र के लिए एक सशक्त नींव तैयार होती है। क्योंकि वह बच्चा केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि समाज का और अंततः पूरे राष्ट्र का भविष्य होता है।
इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए हमने वर्ष 2022 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कर-कमलों से प्रयागराज में टेक होम राशन (टीएचआर) की प्रणाली शुरू की थी। इसके तहत चार हजार से अधिक महिला स्वयंसेवी समूहों द्वारा प्रदेश के विभिन्न विकास खंडों में प्लांट स्थापित किए गए।
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यहां गर्भवती और कुपोषित बच्चों के लिए पौष्टिक रेसिपी तैयार करके अनुपूरक पोषण आहार उपलब्ध कराया जा रहा है। जहां टीएचआर प्लांट से सीधे वितरण संभव नहीं है, वहां नेफेड के माध्यम से सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए प्रदेश सरकार ने कई कार्यक्रम शुरू किए हैं।
बेसिक शिक्षा परिषद में प्रवेश की आयु छह वर्ष है। प्रदेश भर में 70 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों में प्री-प्राइमरी और बाल वाटिका के कार्यक्रम सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों में तकरीबन दो करोड़ बच्चे न केवल अनुपूरक पौष्टिक आहार प्राप्त कर रहे हैं, बल्कि अक्षर ज्ञान, खेल-आधारित शिक्षा और स्कूली माहौल में तैयार होने की बेहतरीन व्यवस्था भी उपलब्ध है।
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