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गोरखपुर में प्रॉपर्टी का सौदा करने से पहले ऐसे जांचें, ना रहेगा कानूनी विवाद, ना बैंक का कर्ज

Published: Wed, 21 Oct 2026 02:27 PM (IST)

जमीन खरीदने से पहले कानूनी विवादों, बैंक बंधक या अन्य दावों की जांच करना महत्वपूर्ण है। न्यायालय, निबंधन कार्यालय, राजस्व ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

HighLights

  1. न्यायालय में चल रहे जमीन संबंधी मुकदमों की जांच करें।

  2. बैंक के पास जमीन बंधक होने की स्थिति पता करें।

  3. खतौनी, खसरा और रजिस्ट्री दस्तावेजों का सत्यापन करें।

विवेक शुक्ला, गोरखपुर। जमीन खरीदना जिंदगी के बड़े निवेश में शामिल है। लोग अपनी जमा-पूंजी लगाकर प्लाट, मकान या कृषि भूमि खरीदते हैं, लेकिन कई बार कागजात सही नजर आने के बावजूद बाद में कानूनी विवाद का सामना करना पड़ता है। किसी जमीन पर न्यायालय में मुकदमा चल रहा हो, वह बैंक के पास बंधक रखी गई हो या उस पर किसी दूसरे व्यक्ति का अधिकार हो तो खरीदार की परेशानी बढ़ सकती है। ऐसे में केवल खतौनी, खसरा और रजिस्ट्री देखकर जमीन खरीदने का फैसला करना पर्याप्त नहीं है।

जमीन का सौदा करने से पहले यह पता करना जरूरी है कि संपत्ति पर कोई मुकदमा तो नहीं चल रहा, जमीन बैंक में गिरवी तो नहीं है और उस पर किसी अन्य व्यक्ति का दावा तो नहीं है। इसके लिए न्यायालय, निबंधन कार्यालय, राजस्व विभाग और संबंधित बैंक के रिकॉर्ड की जांच करनी चाहिए। थोड़ी सी सावधानी भविष्य में होने वाले आर्थिक नुकसान और लंबी कानूनी लड़ाई से बचा सकती है।

न्यायालय में जमीन से जुड़ा मुकदमा तो नहीं, ऐसे करें जांच

जमीन के मालिकाना हक, बंटवारे, कब्जे या बिक्री पर रोक से संबंधित विवाद न्यायालय में चल सकता है। ऐसी स्थिति में जमीन खरीदने से पहले संबंधित पक्षों के नाम, जमीन के पते और उपलब्ध मुकदमे के विवरण के आधार पर न्यायालय के रिकॉर्ड की पड़ताल करनी चाहिए।

इसके लिए जिला न्यायालय की वेबसाइट और ई-कोर्ट्स पोर्टल पर उपलब्ध केस की जानकारी देखी जा सकती है। उत्तर प्रदेश में संबंधित राजस्व न्यायालय के रिकॉर्ड की भी जांच करानी चाहिए। यदि जमीन के संबंध में कोई मुकदमा सामने आता है तो उसके आदेश, वर्तमान स्थिति और जमीन की बिक्री पर किसी प्रकार की रोक है या नहीं, इसकी पुष्टि अधिवक्ता से करानी चाहिए।

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ध्यान रखें कि केवल ऑनलाइन रिकॉर्ड में मुकदमा नहीं मिलने का अर्थ यह नहीं है कि जमीन पूरी तरह विवादमुक्त है। नाम की वर्तनी, पुराने रिकॉर्ड और अलग-अलग न्यायालयों में चल रहे मामलों के कारण जानकारी छूट सकती है।

बैंक के पास जमीन बंधक तो नहीं, ऐसे लगाएं पता

कई लोग बैंक से ऋण लेने के लिए अपनी जमीन या मकान को बंधक रखते हैं। कुछ मामलों में कर्ज चुकाए बिना ही संपत्ति बेचने का प्रयास किया जाता है। खरीदार को बाद में पता चलता है कि जमीन पर बैंक का अधिकार है या ऋण की वसूली की कार्रवाई चल रही है।

ऐसी स्थिति से बचने के लिए विक्रेता से लिखित जानकारी लें कि जमीन किसी बैंक या वित्तीय संस्था के पास बंधक नहीं है। संबंधित बैंक से भी संपत्ति पर बकाया ऋण और बंधक की स्थिति की पुष्टि कराएं। जरूरत पड़ने पर केंद्रीय बंधक सूचना व्यवस्था (CERSAI) के उपलब्ध रिकॉर्ड में भी जांच कराई जा सकती है।

यदि जमीन पर ऋण है तो केवल विक्रेता के आश्वासन पर भरोसा न करें। बैंक से बकाया राशि, ऋण चुकाने की प्रक्रिया और बंधक हटाने के दस्तावेजों की पुष्टि किए बिना सौदा आगे न बढ़ाएं।

रजिस्ट्री कार्यालय में पुराने दस्तावेजों की पड़ताल करें

संबंधित उपनिबंधक कार्यालय में जमीन की पिछली रजिस्ट्री और उपलब्ध निबंधित दस्तावेजों की जांच कराएं। इससे पता चल सकता है कि जमीन पहले किसके नाम थी, विक्रेता को संपत्ति किस दस्तावेज के आधार पर मिली और उपलब्ध रिकॉर्ड में कोई अन्य निबंधित लेनदेन तो नहीं है।

संपत्ति के इतिहास की जांच के लिए भार प्रमाणपत्र या उपलब्ध पंजीकरण रिकॉर्ड भी उपयोगी हो सकते हैं। हालांकि, केवल रजिस्ट्री रिकॉर्ड में किसी बंधक या विवाद का उल्लेख न मिलने से यह सुनिश्चित नहीं होता कि जमीन पर कोई कानूनी बाधा नहीं है। इसलिए इसे अन्य जांच के साथ मिलाकर देखना चाहिए।

तहसील से खतौनी और राजस्व विवाद की जांच करें

खतौनी और खसरे से जमीन के दर्ज खातेदार, गाटा संख्या, रकबा और उपलब्ध राजस्व विवरण की जानकारी मिलती है। उत्तर प्रदेश के भूलेख पोर्टल पर खतौनी देखी जा सकती है। इसके बाद संबंधित तहसील में राजस्व अभिलेखों का सत्यापन कराएं।

यह भी जांचें कि जमीन के नामांतरण, बंटवारे, सीमांकन या स्वामित्व को लेकर कोई विवाद तो नहीं है। जमीन पर किसी अन्य व्यक्ति का कब्जा हो या अभिलेखों में दर्ज रकबे और मौके की स्थिति में अंतर हो तो उसे नजरअंदाज न करें। जरूरत पड़ने पर राजस्व अधिकारी और अधिवक्ता की मदद लें।

जमीन पर किसी दूसरे व्यक्ति का अधिकार तो नहीं

कई बार संपत्ति संयुक्त परिवार की होती है या उसमें एक से अधिक सह-स्वामी होते हैं। ऐसे में केवल एक व्यक्ति के दस्तावेज दिखाने से यह साबित नहीं होता कि उसे पूरी जमीन बेचने का अधिकार है।

विक्रेता के स्वामित्व की पूरी कड़ी, विरासत या बंटवारे के दस्तावेज और अन्य सह-स्वामियों के अधिकारों की जांच करें। यदि जमीन पर किरायेदारी, पट्टे, वसीयत या किसी अन्य व्यक्ति के दावे की जानकारी मिले तो उसकी कानूनी स्थिति स्पष्ट कराएं। जमीन पर वास्तविक कब्जा किसका है, यह भी मौके पर जाकर पता करें।

जमीन खरीदने से पहले इन दस्तावेजों को जरूर मिलाएं

  • नवीनतम खतौनी और खसरा।
  • विक्रेता के स्वामित्व से जुड़े मूल या प्रमाणित दस्तावेज।
  • पिछली रजिस्ट्री और उपलब्ध निबंधित दस्तावेजों का रिकॉर्ड।
  • राजस्व न्यायालय और संबंधित न्यायालयों में विवाद की जानकारी।
  • बैंक ऋण या बंधक की स्थिति से संबंधित पुष्टि।
  • जमीन का नक्शा, गाटा संख्या, रकबा और मौके की स्थिति।
  • विरासत, बंटवारे या सह-स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज, जहां लागू हों।

सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव

जमीन खरीदने से पहले सभी दस्तावेजों की जांच किसी संपत्ति संबंधी मामलों के जानकार अधिवक्ता से कराना उपयोगी है। विक्रेता से मिले कागजात और सरकारी रिकॉर्ड का आपस में मिलान करें। यदि कोई मुकदमा, बंधक या स्वामित्व संबंधी संदेह सामने आए तो उसकी स्थिति स्पष्ट होने तक भुगतान और रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे न बढ़ाएं। याद रखें, रजिस्ट्री हो जाना अपने आप में जमीन के निर्विवाद मालिकाना हक की गारंटी नहीं है।

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