गोरखपुर एम्स में पहली बार दूरबीन विधि से हायाटल हर्निया का सफल ऑपरेशन, मरीज को सीने में जलन और उल्टी से मिली राहत
एम्स गोरखपुर के गैस्ट्रोसर्जरी विभाग ने पहली बार लैप्रोस्कोपिक नाइसेन फंडोप्लीकेशन सर्जरी सफलतापूर्वक की है। इस अत्याधुनिक दूरबीन तकनीक से ...और पढ़ें

इस फोटो को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
एम्स गोरखपुर में पहली लैप्रोस्कोपिक नाइसेन फंडोप्लीकेशन सर्जरी।
हायाटल हर्निया और गंभीर गैस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स का उपचार।
रोगी को एसिड रिफ्लक्स, उल्टी, सीने में जलन से राहत।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। एम्स के गैस्ट्रोसर्जरी विभाग ने पहली बार लैप्रोस्कोपिक नाइसेन फंडोप्लीकेशन सर्जरी सफलतापूर्वक की है। हायाटल हर्निया और गंभीर गैस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज से पीड़ित रोगी का अत्याधुनिक दूरबीन तकनीक से ऑपरेशन कर उसे एसिड रिफ्लक्स, उल्टी और सीने में जलन की समस्या से राहत दिलाई गई।
विभाग के सहायक आचार्य डॉ. अजय यादव ने बताया कि रोगी कई महीनों से गंभीर समस्या से परेशान था। हायाटल हर्निया में पेट का ऊपरी हिस्सा डायाफ्राम के रास्ते छाती की ओर खिसक जाता है। इससे पेट का अम्ल और भोजन वापस खाने की नली में आने लगता है। कई जगह उपचार कराने के बाद भी राहत नहीं मिलने पर रोगी एम्स पहुंचा।

कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल डा. विभा दत्ता के मार्गदर्शन में डॉ. अजय यादव ने दूरबीन विधि से ऑपरेशन किया। इसमें छोटे छिद्रों के माध्यम से छाती की ओर खिसके पेट को वापस सामान्य स्थान पर लाया गया। साथ ही डायाफ्राम के कमजोर हिस्से को टांकों से ठीक किया गया।
पेट के ऊपरी हिस्से को खाने की नली के निचले भाग के चारों ओर लपेटकर प्राकृतिक वाल्व बनाया गया, जिससे अम्ल का वापस आना रोका जा सके। ऑपरेशन के बाद रोगी की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ। उसे दर्द भी कम हुआ और एसिड रिफ्लक्स व उल्टी की समस्या से राहत मिली। इस सफलता में गैस्ट्रोसर्जरी और एनेस्थीसिया विभाग की टीम का योगदान रहा।
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