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AIIMS गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक की अचानक बिगड़ी तबीयत, निजी अस्पताल में कराना पड़ा भर्ती

Published: Fri, 30 Oct 2026 08:31 AM (IST)Updated: Fri, 30 Oct 2026 09:00 AM (IST)

एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता को तबीयत बिगड़ने पर निजी अस्पताल रेफर करना पड़ा, क्योंकि एम्स में ...और पढ़ें

एम्स की इमरजेंसी के सामने ईडी डा. विभा दत्ता को एंबुलेंस में शिफ्ट करते डाक्टर व कर्मचारी। सौ. इंटरनेट मीडिया

एम्स की इमरजेंसी के सामने ईडी डा. विभा दत्ता को एंबुलेंस में शिफ्ट करते डाक्टर व कर्मचारी। सौ. इंटरनेट मीडिया

HighLights

  1. एम्स ईडी डॉ. विभा दत्ता को निजी अस्पताल रेफर किया गया।

  2. एम्स गोरखपुर में सात साल बाद भी कैथ लैब नहीं।

  3. संस्थान की स्वास्थ्य सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े हुए।

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए पूर्वांचल की उम्मीद बने एम्स की स्वास्थ्य सुविधाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अब तक संसाधनों की कमी का सामना आम मरीजों को करना पड़ता था, लेकिन बुधवार को संस्थान की कार्यकारी निदेशक (ईडी) डा. विभा दत्ता को भी उपचार के लिए निजी अस्पताल जाना पड़ा।

तबीयत बिगड़ने पर उन्हें पहले एम्स की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। वहां उपचार के बाद अपेक्षित सुधार नहीं होने पर उन्हें एक निजी अस्पताल के लिए डाक्टरों ने रेफर कर दिया, क्योंकि एम्स में सात साल बाद भी कैथ लैब नहीं बन पाई है। कैथ लैब होती तो ईडी का एम्स में ही उपचार संभव होता।

अपने आवास पर डा. विभा दत्ता अचानक बेहोश हो गईं। उन्हें तत्काल एम्स की इमरजेंसी में पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों की टीम ने उपचार शुरू किया। बाद में उन्हें निजी अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया गया।

इसके लिए एंबुलेंस के रास्ते को खाली कराया गया और चिकित्सकों की टीम के साथ उन्हें दूसरे अस्पताल पहुंचाया गया। मीडिया सेल के अनुसार वह स्वस्थ हैं, सभी जांच रिपोर्ट सामान्य आई है। गुरुवार को वह कार्यालय आईं थी, कामकाज किया। आयुष विंग में मेडिकल आफिसर के इंटरव्यू में भी बैठी थीं।

एम्स जैसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान के शीर्ष अधिकारी को उपचार के लिए निजी अस्पताल भेजे जाने की घटना दिनभर चर्चा का विषय बनी रही। मरीजों और उनके तीमारदारों के बीच भी इसे लेकर सवाल उठते रहे। आमतौर पर गंभीर मरीज दूसरे अस्पतालों से रेफर होकर एम्स पहुंचते हैं, लेकिन यहां से कार्यकारी निदेशक को निजी अस्पताल भेजे जाने से संस्थान की तैयारी और उपचार सुविधाओं पर सवाल उठने लगे हैं।

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कैथ लैब की अनुपलब्धता को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। एम्स की शुरुआत फरवरी 2029 में हुई थी, सात साल बाद भी कैथ लैब न बन पाने का दंश का एम्स के ईडी को ही झेलना पड़ा। डा. विभा दत्ता ने 30 जनवरी 2025 को एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक का पदभार संभाला था। इससे पहले वह वर्ष 2018 से 2023 तक एम्स नागपुर की निदेशक रह चुकी हैं। वह गोरखपुर एम्स की पांचवीं कार्यकारी निदेशक हैं।

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