गोरखपुर में आठ रेजीडेंट डॉक्टर 30 दिन व चार 10 दिन के लिए निलंबित, मारपीट करना पड़ा भारी
एम्स गोरखपुर प्रशासन ने पैडलेगंज में पुलिसकर्मियों से हाथापाई के मामले में सख्त कार्रवाई की है। अनुशासनहीनता के आरोप में ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
HighLights
एम्स गोरखपुर के 12 डॉक्टर निलंबित हुए।
पुलिसकर्मियों से हाथापाई मामले में हुई यह कार्रवाई।
आठ डॉक्टर 30 दिन, चार 10 दिन के लिए निलंबित।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। पैडलेगंज में मारपीट और पुलिसकर्मियों के साथ हाथापाई के मामले में एम्स प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। अनुशासनहीनता के आरोप में छह इंटर्न समेत 12 डाॅक्टरों को निलंबित कर दिया गया है। सभी रेजीडेंट डाॅक्टर हैं। इनमें आठ डाक्टरों पर 30 दिन और चार डाॅक्टरों पर 10 दिन के निलंबन की कार्रवाई हुई है। मीडिया सेल ने इसकी पुष्टि की है। घटना के बाद गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर यह निर्णय लिया गया है।
मामला 19 सितंबर की देर रात का है। एम्स के कई एमबीबीएस विद्यार्थी कैंट क्षेत्र स्थित एक होटल में जन्मदिन की पार्टी में शामिल होने गए थे। पार्टी समाप्त होने के बाद पैडलेगंज के पास सड़क पर कुछ छात्रों के बीच विवाद शुरू हो गया। देखते ही देखते कहासुनी ने मारपीट का रूप ले लिया।
इसी दौरान रात करीब डेढ़ बजे वहां से गुजर रहे कैंट थाने के दो सिपाहियों ने बीच-बचाव कर विवाद शांत कराने की कोशिश की। छात्रों ने उनके साथ भी हाथापाई की। उस समय दोनों सिपाही सादे कपड़ों में थे। स्थिति बिगड़ने पर पैडलेगंज पुलिस चौकी को सूचना दी गई। मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने आठ छात्रों को हिरासत में लेकर कैंट थाने पहुंचाया।
अगले दिन सभी छात्रों का शांतिभंग की आशंका में चालान किया गया। बाद में सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत से उन्हें जमानत मिल गई। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसी कैमरों की फुटेज भी खंगाली। फुटेज में कुछ छात्रों के पुलिसकर्मियों पर हेलमेट से हमला करते दिखाई देने की बात सामने आई थी।
घटना को गंभीरता से लेते हुए एम्स प्रशासन ने आंतरिक जांच कमेटी गठित की थी। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर 12 रेजीडेंट डाॅक्टरों के निलंबन का फैसला लिया गया। संस्थान की मीडिया सेल के अनुसार, छह इंटर्न समेत सभी 12 डाक्टरों पर अनुशासनहीनता के आरोप में कार्रवाई की गई है।
एक साथ इतनी बड़ी संख्या में डाक्टरों पर कार्रवाई से संस्थान के जूनियर और सीनियर रेजिडेंट डाॅक्टरों के बीच चर्चा तेज हो गई है। इस मामले को एम्स प्रशासन की अनुशासनहीनता के प्रति सख्त रुख के तौर पर देखा जा रहा है।
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छात्रावास के नियमों में भी की गई सख्ती
घटना के बाद एम्स प्रशासन ने छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए थे। विद्यार्थियों को रात 10 से 11 बजे के बीच वार्डन के सामने अपनी उपस्थिति दर्ज कराने को कहा गया था। साथ ही रात 11 बजे के बाद बिना अनुमति छात्रावास से बाहर जाने पर रोक लगाई गई थी। आरोपित विद्यार्थियों के अभिभावकों को संस्थान में बुलाया गया था। निलंबन की कार्रवाई से अभिभावकों को अवगत करा दिया गया है।
