गाजीपुर में जिस तस्कर के खिलाफ वारंट उसी ने थाने पहुंचकर दर्ज कराया मुकदमा, 18 दिन बाद गिरफ्तारी
गाजीपुर में एक वांछित तस्कर, जिसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट था, थाने पहुंचकर खुद पर हमले का मुकदमा दर्ज कराता रहा ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
HighLights
गैर-जमानती वारंट वाला तस्कर थाने पहुंचा, दर्ज कराया मुकदमा।
पुलिस ने उसे गिरफ्तार नहीं किया, 18 दिन बाद हुई गिरफ्तारी।
कोर्ट ने पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए, जांच के आदेश दिए।
जागरण संवाददाता, गाजीपुर। जिस आरोपित को पुलिस महीनों से तलाश रही थी, जिसके खिलाफ अदालत से गैर जमानती वारंट जारी था, वही एक दिन बेखौफ होकर करंडा थाने पहुंच गया। उसने खुद पर हमला किए जाने की शिकायत दी और पुलिस ने उसका मुकदमा भी दर्ज कर लिया। हैरानी की बात यह रही कि पुलिस ने उसे गिरफ्तार नहीं किया।
करीब 18 दिन बाद उसकी गिरफ्तारी हुई तो पूरा मामला अदालत के सामने पहुंचा और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। 61 किलो गांजा बरामदगी मामले में आरोपित भीम सिंह के खिलाफ दो जून को गैर जमानती वारंट जारी हुआ था।
विवेचक ने अदालत को बताया था कि उसकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। इसके बावजूद आठ अगस्त को भीम सिंह करंडा थाने पहुंचा। उसने मेदनीपुर चौराहे से सामान लेकर लौटते समय चार लोगों पर डंडे और राड से हमला करने का आरोप लगाया।

पुलिस ने उसकी तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया, लेकिन यह नहीं देखा कि वह खुद एक अन्य मामले में वांछित है। 26 अगस्त को पुलिस ने आखिरकार उसे गिरफ्तार किया। जमानत के लिए मामला अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या-1 शक्ति सिंह की अदालत पहुंचा।
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अदालत ने जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा कि यह बेहद गंभीर स्थिति है कि गैर जमानती वारंट वाला फरार आरोपित थाने पहुंचकर मुकदमा दर्ज कराता रहा और पुलिस उसे पकड़ नहीं सकी। कोर्ट ने पुलिस अधीक्षक को करंडा पुलिस की भूमिका की सीओ स्तर के अधिकारी से जांच कराने और दोषी कर्मियों पर कार्रवाई कर 15 दिन में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।
