दाह संस्कार से पहले अर्थी के पास आया बंदर, कफन हटाकर छुआ पैर फिर चला गया वापस, वीडियो देख लोग हैरान
गाजीपुर में दाह संस्कार से पहले एक बंदर ने मृतका मालती की अर्थी से कफन हटाकर उनके पैर छुए, जिसका ...और पढ़ें
HighLights
बंदर ने मृतका के पैर छूकर सबको चौंकाया।
दाह संस्कार से पहले हुई यह अनोखी घटना।
ग्रामीणों ने चंदा जुटाकर अंतिम संस्कार कराया।
जागरण संवाददाता, गाजीपुर। गरीबी के बीच जिंदगी गुजार रहे एक परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटा तो गांव वालों ने आगे बढ़कर अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाई। सुशीला की मौत से परिवार पहले ही गम में डूबा था, इसी बीच अर्थी के पास पहुंचे एक बंदर की हरकत ने वहां मौजूद लोगों को हैरान कर दिया।
बंदर ने मृतका का कफन हटाया, उनके पैरों को छुआ और फिर पेड़ पर जाकर बैठ गया। इस घटना का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो रहा है। हालांकि, दैनिक जागरण इस प्रसारित वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।
यह है पूरा मामला
शहर कोतवाली क्षेत्र के सरैया छावनी लाइन निवासी दुखंती कुशवाहा की काफी वर्ष पहले मौत हो चुकी है। उनकी 55 वर्षीय पत्नी सुशीला एक माह से बीमार चल रही थीं। रविवार को उनका निधन हो गया। सोमवार की सुबह स्वजन और ग्रामीण दाह संस्कार की तैयारी में जुटे थे। स्नान कराने के बाद मालती को अर्थी पर लिटाया गया।
परिवार और गांव के लोग अर्थी उठाने की तैयारी कर ही रहे थे कि अचानक पेड़ पर बैठा एक बंदर नीचे पहुंच गया। उसने सुशीला का कफन हटाया और उनके पैरों को हाथ लगाया। इसके बाद वह दोबारा पेड़ पर चला गया। वहां मौजूद कुछ लोगों ने इस घटना को मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया। देर शाम वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होने लगा।
चंदा जुटाकर ग्रामीणों ने कराया अंतिम संस्कार
दुखंती कुशवाहा का परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। उनकी दो बेटियों की किसी तरह शादी हुई। बेटा सुनील भी बेरोजगार है। परिवार का गुजारा मुश्किल से चलता है। ऐसे में मालती की मौत के बाद अंतिम संस्कार की व्यवस्था करना भी परिवार के लिए चुनौती बन गया।
परिवार की इस मजबूरी को देखते हुए ग्रामीण आगे आए और आपस में चंदा जुटाकर सुशीला का अंतिम संस्कार कराया। दुख की इस घड़ी में ग्रामीणों की मदद परिवार के लिए बड़ा सहारा बनी।
यह भी पढ़ें- गोरखपुर में कुतिया बनी दुल्हन, कुत्ते की धूमधाम से निकली बारात; अनोखी शादी में लोगों ने खूब उड़ाई दावत
यह भी पढ़ें- लखीमपुर खीरी में भालू बनकर खेतों की निगरानी कर रहे किसान, आधा दर्जन गांवों में बंदरों का आतंक
