लखीमपुर खीरी में भालू बनकर खेतों की निगरानी कर रहे किसान, आधा दर्जन गांवों में बंदरों का आतंक
लखीमपुर खीरी के महेशपुर वन रेंज के किसान बंदरों के आतंक से परेशान हैं। प्रशासन और वन विभाग से मदद ...और पढ़ें

HighLights
महेशपुर रेंज के किसान बंदरों के आतंक से त्रस्त।
प्रशासन से मदद न मिलने पर किसानों ने खुद संभाला मोर्चा।
फसलों को बचाने के लिए भालू की पोशाक पहनकर कर रहे निगरानी।
आनंद अग्निहोत्री, लखीमपुर। महेशपुर वन रेंज के अंतर्गत क्षेत्र के दर्जनों गांवों में किसान बंदरों के आतंक से त्रस्त हैं। प्रशासन और वन विभाग की ओर से कोई सहायता न मिलने के कारण, किसानों ने स्वयं इसका समाधान निकालने का निर्णय लिया है। वे भालू की पोशाक पहनकर खेतों में बंदरों को भगाते हुए दिखाई दे रहे हैं।
भगतपुर, बाबरपुर और बरगदिया गांव के लोग अपनी फसलों को बंदरों से बचाने के लिए भालू के वस्त्र पहनकर खेतों में घूमते हैं। किसानों का कहना है कि इलाके में सैकड़ों की संख्या में बंदर झुंड बनाकर धान, गन्ना, सब्जी और मक्का जैसी फसलों को बर्बाद कर रहे हैं।
विभाग नहीं उठा रहा कोई कदम
विभागीय अधिकारी इस समस्या के समाधान के लिए कोई कदम नहीं उठा रहे हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए किसानों ने गांव में चंदा इकट्ठा कर एक भालू का वस्त्र मंगवाया है और उसे पहनकर दिन-रात अपनी फसलों की रक्षा कर रहे हैं।
किसानों का आरोप है कि उनकी समस्या को हल करने के लिए न तो कोई जनप्रतिनिधि और न ही ब्लॉक के अधिकारी या वन विभाग के अधिकारी सुनते हैं। इस कारण किसानों को स्वयं ही यह कदम उठाना पड़ा है।
सैकड़ों की संख्या में बंदर खेतों में पहुंचकर फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। किसान कई बार वन विभाग और जिला प्रशासन को इस समस्या के बारे में अवगत करा चुके हैं, लेकिन उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया गया है।
इन गांवों में है बंदरों का आतंक
रोशननगर, ममरी, बरगदिया, बाबरपुर, लखैया, जमुनहां, शेखवापुर, जनकपुर, सौखिया, अंबरपुर, दुलीपुर, कैमा, रामपुर, भगतपुर, परेली सहित कई गांवों में हजारों बंदर उत्पात मचा रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि वे बंदरों को अपने स्तर से पकड़वाकर उपाय करते हैं, तो उनकी मदद की जा सकती है। बाहर से लोग बंदरों को यहां छोड़ देते हैं, जिससे उनकी संख्या बढ़ गई है।
-निर्भय प्रताप शाही, रेंजर महेशपुर रेंज
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