नल से कब आएगा जल? गाजीपुर में 3 साल से नल से जल का इंतजार, करोड़ों खर्च के बावजूद जल जीवन मिशन लटका
गाजीपुर के सादात ब्लॉक में जल जीवन मिशन की दो करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली पेयजल परियोजनाएं तीन साल बाद भी अधूरी हैं।

3 साल में भी हर घर नल का सपना अधूरा
HighLights
गाजीपुर में जल जीवन मिशन की परियोजनाएं अधूरी।
डोरा में 700 घरों को नल कनेक्शन का इंतजार।
डढ़वल में पानी की टंकी का निर्माण अधूरा।
जागरण संवाददाता, गाजीपुर। हर घर तक नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए शुरू की गई जल जीवन मिशन की योजना सादात ब्लाक में जिम्मेदारों की कार्यशैली की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। डोरा और डढ़वल ग्राम पंचायतों में दो-दो करोड़ रुपये से अधिक की लागत से शुरू हुई पेयजल परियोजनाएं 3 साल बाद भी ग्रामीणों की प्यास बुझाने में नाकाम हैं।
डोरा में टंकी और पंप हाउस तैयार होने के बावजूद सैकड़ों घर कनेक्शन से वंचित हैं, वहीं डढ़वल में टंकी का निर्माण ही अधूरा है। यहां अभी पाइपलाइन बिछाने का काम भी पूरा नहीं हो सका है। ऐसे में करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद ग्रामीणों को घर पर नल से पानी मिलने का इंतजार है।
जल जीवन मिशन के तहत दोनों ग्राम पंचायतों में पानी की टंकी बनाकर पाइपलाइन के जरिये घर-घर जलापूर्ति की योजना बनाई गई थी। निर्माण कार्य करीब 3 साल पहले शुरू हुआ, लेकिन अब तक इसका अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आया है। डोरा ग्राम पंचायत में 5 पुरवों के करीब 800 घरों तक पानी पहुंचाने की योजना है।
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ग्राम पंचायत प्रशासक के प्रतिनिधि डॉ. अनिल कुमार राय का कहना है कि यहां टंकी, पंप हाउस और सोलर पैनल कक्ष के साथ बाउंड्रीवाल का काम पूरा हो चुका है। अब तक महज 100 घरों में ही कनेक्शन दिए गए हैं। शेष 700 घरों में कनेक्शन का इंतजार है। पाइपलाइन बिछाने के दौरान खोदे गए रास्तों को भी ठीक से दुरुस्त नहीं किया गया है, जिससे लोगों को परेशानी हो रही है।
डढ़वल में सिर्फ पिलर खड़े, पाइपलाइन भी अधूरी
डढ़वल ग्राम पंचायत की स्थिति और खराब है। ग्राम पंचायत प्रशासक शीला वर्मा के मुताबिक, यहां दलित बस्ती, श्यामपुरा, राजभर बस्ती और पाल बस्ती समेत छह बड़े पुरवों के करीब 700 घरों में जलापूर्ति होनी है। लेकिन तीन साल बाद भी पानी की टंकी का निर्माण अधूरा है। मौके पर केवल पिलर खड़े किए गए हैं।
गांव में पाइपलाइन भी पूरी तरह नहीं बिछाई गई है। जहां पाइप डाले गए, वहां इंटरलॉकिंग सड़कें खोदकर छोड़ दी गईं, जिनकी मरम्मत ग्राम पंचायत की ओर से करानी पड़ी।
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