Exclusive: मुर्दों का पुलिस की छुट्टियों से क्या कनेक्शन? गाजियाबाद में सड़ती रहती हैं लाशें; बदबू से आफत
गाजियाबाद में पुलिस की लापरवाही के कारण अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार में देरी हो रही है, जिससे निर्धारित 72 ...और पढ़ें

गाजियाबाद में पुलिस की लापरवाही से सड़ रही हैं लाशें। फोटो: एआई जनरेटेड
HighLights
गाजियाबाद में अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार में देरी
पुलिस सिपाहियों की लापरवाही से बढ़ रहा इंतजार
72 घंटे के बजाय 96 घंटे बाद हो रहा अंतिम संस्कार
हसीन शाह, गाजियाबाद। अज्ञात शवों की शिनाख्त नहीं होने पर नियमानुसार 72 घंटे इंतजार करने के बाद उनका अंतिम संस्कार कराया जाता है, लेकिन गाजियाबाद में पुलिस की लापरवाही से इस प्रक्रिया में देरी हो रही है।
पोस्टमार्टम से लेकर अंतिम संस्कार कराने तक एक सिपाही की ड्यूटी लगाई जाती है। आरोप है कि कई सिपाही अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय बिना अनुमति छुट्टी पर चले जाते हैं।
इससे निर्धारित समय पर अंतिम संस्कार नहीं हो पाता और शवों को 96 घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। एक मामले में शव चार दिन तक रखा रहा और उससे दुर्गंध फैलने लगी।
72 घंटे के बजाय 96 घंटे बाद अंतिम संस्कार
पुलिस को अज्ञात शव मिलने पर सबसे पहले उसकी पहचान करने का प्रयास किया जाता है। इसके लिए शव की तलाशी लेकर जेब आदि से मिले कागजात और अन्य सामान की जांच की जाती है।
पहचान संबंधी कोई जानकारी नहीं मिलने पर दूसरे थानों को सूचना दी जाती है। शव के फोटो भी लिए जाते हैं, ताकि उनकी मदद से शिनाख्त हो सके। इसके बाद दारोगा पंचनामा भरकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजता है।
पहचान नहीं होने पर 72 घंटे की निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद अंतिम संस्कार कराया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान शव की देखरेख और अंतिम संस्कार कराने के लिए एक सिपाही की ड्यूटी लगाई जाती है।
आरोप है कि कुछ सिपाही ड्यूटी के दौरान थाने से नदारद रहते हैं और बिना अनुमति घर चले जाते हैं। ऐसे में समय पर अंतिम संस्कार कराने की जिम्मेदारी प्रभावित होती है।
कुछ मामलों में 72 घंटे के बजाय 96 घंटे बाद अंतिम संस्कार कराए जाने की बात सामने आई है। अंकुर विहार थाना क्षेत्र में मिले शव के मामले में सहायक पुलिस आयुक्त अमरदीप कुमार मौर्य ने बताया कि अज्ञात शव का अंतिम संस्कार 72 घंटे बाद कराया जाता है। सामने आए प्रकरणों की जांच कराई जाएगी।
जनवरी से अब तक मिले 239 अज्ञात शव
पोस्टमार्टम हाउस के सूत्रों के मुताबिक जनवरी 2026 से अब तक गाजियाबाद में पुलिस को 239 अज्ञात शव मिल चुके हैं। इनकी पहचान कराने के लिए पुलिस ने इंटरनेट मीडिया पर फोटो साझा किए और दूसरे थानों को भी सूचना दी।
शिनाख्त नहीं होने पर शवों का अज्ञात में अंतिम संस्कार कराया गया। इनमें कुछ मामलों में निर्धारित 72 घंटे की अवधि के बजाय 96 घंटे बाद अंतिम संस्कार कराए जाने की बात सामने आई है।
सीन 1 : अंतिम संस्कार में एक दिन की देरी
अंकुर विहार थाना क्षेत्र में तीन अक्टूबर को एक अज्ञात शव मिला था। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और अंतिम संस्कार कराने के लिए एक सिपाही की ड्यूटी लगाई।
शव का अंतिम संस्कार सात अक्टूबर को कराया गया। नियमानुसार 72 घंटे की अवधि पूरी होने के बाद छह अक्टूबर को अंतिम संस्कार कराया जाना था, लेकिन इसमें एक दिन की देरी हुई।
सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान सिपाही ने अपनी जिम्मेदारी का ठीक से निर्वहन नहीं किया। देरी के कारण शव से अत्यधिक दुर्गंध फैलने लगी।
सीन 2 : कौशांबी में भी हुई देरी
कौशांबी थाना क्षेत्र में 22 जुलाई को नहर में एक अज्ञात शव मिला था। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। इसका अंतिम संस्कार 25 जुलाई को किया जाना था, लेकिन 26 जुलाई को कराया गया।
इस मामले में भी अंतिम संस्कार में एक दिन की देरी हुई। बताया गया कि शव से दुर्गंध फैलने लगी थी।
सीन 3 : चार दिन बाद कराया अंतिम संस्कार
ट्रानिका सिटी थाना क्षेत्र में नौ अक्टूबर की रात एक अज्ञात शव मिला था। पुलिस ने 10 अक्टूबर की शाम को शव का पंचनामा भरा। सवाल उठ रहा है कि पंचनामा नौ अक्टूबर की रात शव मिलने के बाद या 10 अक्टूबर की सुबह क्यों नहीं भरा गया।
इसके बाद शव का अंतिम संस्कार 13 अक्टूबर को शाम चार बजे कराया गया। इस मामले में भी शव मिलने से अंतिम संस्कार तक चार दिन का समय लगा।
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