पहलगाम आतंकी हमले के विरोध से और ज्यादा पीछे पड़े थे कट्टरपंथी, सलीम पर हमला कर लगाए 'सर तन से जुदा' के नारे
साहिबाबाद में सलीम वास्तिक पर हुए हमले को मुस्लिम कट्टरता की सोची-समझी साजिश माना जा रहा है। उन्होंने पहलगाम आतंकी ...और पढ़ें
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आशुतोष गुप्ता, साहिबाबाद (गाजियाबाद)। मुस्लिम कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाने वाले सलीम उर्फ सलीम वास्तिक पर हमला किसी निजी कारणों से नहीं हुआ बल्कि इसके पीछे मुस्लिम कट्टरता की सोची-समझी साजिश है।
सलीम द्वारा लगातार मुस्लिम कुरीतियों के खिलाफ की जाने वाली बयानबाजी व विरोध के चलते कई संगठन पसंद नहीं कर रहे थे। इस हमले के पीछे भी मुस्लिम कट्टरपंथी संगठनाें की बू आ रही है।
दरअसल, पिछले साल जम्मू-कश्मीर में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सलीम वास्तिक अपने साथियों के साथ कश्मीर गए थे। उन्होंने धर्म पूछकर आतंकियों द्वारा मारे गए लोगों का विरोध किया था और उनके खिलाफ आवाज उठाई थी।
इसके बाद वहां के कुछ कट्टरपंथी संगठनाें ने सलीम व उनके साथियों का विरोध करते हुए उनके साथ अभद्रता कर दी थी। उन्होंने मामले में जम्मू पुलिस से शिकायत की थी लेकिन जम्मू पुलिस ने कार्रवाई नहीं की थी।
मामले को रफा-दफा कर दिया
इसके बाद हताश होकर वह गाजियाबाद लौटे और लोनी पुलिस समेत अन्य अधिकारियों से शिकायत की लेकिन पुलिस ने जम्मू-कश्मीर का होने की बात कहकर मामले को रफा-दफा कर दिया था। इसके बाद से वह कट्टरपंथी संगठनों ने निशाने पर और अधिक आ गए थे।
वहीं, शुक्रवार को हुए हमले के पीछे अब इन्हीं कट्टरपंथी संगठन की होने की आशंका और बढ़ गई है। मामला चर्चित होने के कारण पुलिस समेत अन्य जांच एजेंसियां मामले की जांच में जुटी हैं।
मुस्लिम कुरीतियों व कट्टरपंथ से नाराज थे सलीम
सूत्र बता रहे हैं कि सलीम को कुरान समेत अन्य धर्माें के ग्रंथों के साथ हिंदू शास्त्रों का बेहतर ज्ञान है। उन्होंने कुरान शरीफ का भी बेहतर ज्ञान है और समाज के लोग उनके साथ अक्सर धार्मिक विषयों पर शास्त्रार्थ भी करते हैं। सलीम पिछले कुछ समय में मुस्लिम कुरीतियों व कट्टरपंथ से नाराज थे।
इसके बारे में करीब तीन साल पहले उन्हें एक न्यूज चैनल पर डिबेट में बोलने का मौका मिला तो उन्होंने अपनी बात को खुलकर रखा। इसके बाद वह सुर्खियों में आए और उन्होंने अपना यूट्यूब चैनल शुरू कर दिया। इसके बाद वह लगातार प्रसिद्ध होते चले गए।
वर्ष 2025 में हुए पहलगाम हमले के बाद वह अपनी कुछ साथियों के साथ जम्मू-कश्मीर पहुंचे और हमले का विरोध करते हुए उन्होंने पाकिस्तानी आतंकियों पर भड़ास निकाली। इसके बाद उन्हें धमकी मिलनी शुरू हुई और उन्होंने इसकी शिकायत जम्मू पुलिस से की।
जम्मू पुलिस ने मदद नहीं की तो वह वापस लौट आए और गाजियाबाद पुलिस से शिकायत की। यहां की पुलिस ने मामले को हल्के में लिया और मामला जम्मू का बताते हुए पल्ला झाड़ लिया। सूत्र बता रहे हैं कि इसके बाद से ही कट्टरपंथी संगठन सलीम के पीछे लग गए थे। इस हमले के पीछे की वजह भी यही मानी जा रही है।
परिवार ने भी बना ली थी काफी समय पहले दूरी
पुलिस जांच में सामने आया है कि पिछले कुछ समय से सलीम के परिवार ने भी उनसे दूरी बना ली थी। सलीम के मुस्लिम कुरीतियों व कट्टरपंथ के बार में बोलना परिवार के लोगों को पसंद नहीं था। जब उनकी इस बारे में प्रसिद्धि बढ़ी तो परिवार उनसे अलग हो गया और अलग रह रहा था और वह स्वयं अपना अलग मकान व कार्यालय बनाकर रह रहे थे। सलीम काफी मिलनसार व्यक्ति हैं, उनका पुलिस अधिकारियों के पास भी खूब उठना बैठना था।
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सर तन से जुदा के नारे लगाने की है चर्चा
सूत्रों का कहना है कि जिस समय सलीम पर जानलेवा हमला किया गया, उस समय आरोपितों ने तन सर से जुदा के नारे लगाए थे और सलीम के बेहोश होने तक उनपर ताबड़तोड़ वार करते रहे थे। शोर मचने पर आसपास के लोग एकत्र होने पर आरोपी मौके से फरार हुए।
