विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

जिम्मेदारों की अनदेखी से लोनी के फेफड़े हुए बीमार, 17 लाख आबादी की सांसों पर संकट; क्या हैं प्रदूषण के 5 बड़े कारण?

Published: Wed, 25 Mar 2026 08:07 PM (IST)

स्विस कंपनी आइक्यू एयर की 2025 रिपोर्ट के अनुसार, लोनी विश्व का सबसे प्रदूषित क्षेत्र घोषित हुआ है, जहां वार्षिक ...और पढ़ें

लोनी में उड़ती धूल। जागरण

लोनी में उड़ती धूल। जागरण

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

जागरण संवाददाता, साहिबाबाद। लोनी की 17 लाख आबादी का वर्षभर दम घुटता रहा, लेकिन जिम्मेदार जानते हुए भी अनजान बने रहे। प्रदूषण रोकथाम के लिए कार्रवाई और योजनाओं के नाम पर केवल खानापूरी होती रही। न तो कोई योजना जमीन पर उतरी और न ही प्रदूषण फैलाने वालों को रोका गया।

यही कारण है कि स्विस वायु गुणवत्ता प्रौद्योगिकी की कंपनी आइक्यू एयर की वर्ष 2025 की रिपोर्ट में लोनी विश्व में सबसे प्रदूषित क्षेत्र रहा है। यहां का पीएम 2.5 का औसत 112.5 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया।

इस रिपोर्ट ने जिला प्रशासन और प्रदूषण बोर्ड समेत सभी जिम्मेदारों की कार्यशैली व दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि यह पहली बार नहीं है, बीते वर्षों में आईं ऐसी तमाम रिपोर्ट के आंकड़ों में लोनी देश और विश्व में सबसे प्रदूषित रहा है।

Ghaziabad AQI (3)

लोनी का सबसे प्रदूषित होने का कारण अधिकारियों से पूछा गया तो उनके पास भी इसका जवाब नहीं है। प्रदूषण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अभी हमारे पास ऐसी कोई सर्वे रिपोर्ट नहीं है, जिसमें ये बताया जा सके कि लोनी में किस कारण कितना प्रदूषण होता है।

जब तक कारण और उनका अनुपात पता नहीं चलेगा प्रदूषण पर पूरी तरह से अंकुश लगाना संभव नहीं है। इसके लिए सीपीसीबी के आदेश पर एक सर्वे करा रहे हैं। सभी विभागों को अपने-अपने स्तर से कार्रवाई के लिए कई बार पत्र लिख चुके हैं। प्रदूषण बोर्ड का कार्य केवल निगरानी करना है। साहिबाबाद से रिपोर्ट...

लोनी में प्रदूषण के ये हैं पांच बड़े कारण

1. अवैध फैक्ट्रियां : लोनी के कृष्णा विहार, अमित विहार, हंस गार्डन, रूप नगर, ट्रोनिका सिटी अप्रेल पार्क आदि क्षेत्रों में सैंकड़ों अवैध फैक्ट्रियां संचालित होती हैं। इनसे निकलने वाला धुआं प्रदूषण को बढ़ावा देता है। अवैध फैक्ट्रियों के जेनरेटर सेट भी सड़कों पर खड़े रहते हैं। वह भी दोहरी ईंधन किट के बजाय केवल डीजल के हैं।

2. ई-वेस्ट व तार जलाना : लोनी के बेहटा गाजीपुर, शिव वाटिका, पूर्वी संगम विहार, राहुल गार्डन, कृष्णा विहार, उत्तरांचल विहार आदि कालोनियों में घर-घर में तार छीलने और जलाकर धातु निकालने का अवैध कारोबार किया जाता है। इसके अलावा दिल्ली से ई-वेस्ट लाकर उसे जलाकर प्रदूषण बढ़ाया जा रहा है।

3. जाम व वाहनों का दबाव : लोनी तिराहा, गाजियाबाद रोड, लोनी बार्डर, दिल्ली-सहारनपुर रोड स्थित शिव विहार मेट्रो स्टेशन के बाहर आदि मुख्य मार्गों पर दिनभर वाहनों का दबाव व जाम की समस्या बनी रहती है। प्रशासन से लोनी तिराहे को जाम मुक्त करने के लिए आटो स्टैंड भी बनाया, लेकिन इसके बाद भी ज्यादातर आटो बेतरतीब तरीके से मुख्य मार्ग पर ही खड़े रहते हैं, इससे जाम रहता है। इसके अलावा भी लोनी को जाम मुक्त करने के लिए योजना बनीं, लेकिन वह परवान नहीं चढ़ सकीं।

4. बदहाल सड़कें : लोनी में कई मार्ग ऐसे हैं जो करीब 20 वर्ष से अधिक से बदहाल स्थिति में हैं। इनकी मरम्मत के लिए लोगों ने समय-समय पर मांग उठाईं, लेकिन स्थिति जस की तस रही। बेहटा-हाजीपुर नहर रोड, चिरोड़ी रोड, गढ़ी कटैया रोड, दिल्ली-सहारनपुर मार्ग लोनी बार्डर से लोनी तिराहे तक सबसे अधिक बदहाल स्थिति में हैं। इन मार्गों पर धूल रोकने के लिए पानी का छिड़काव करने के नाम पर खानापूरी होती है। फोटो खींचने के नाम पर ऐसे मार्गों का छिड़काव कर दिया जाता है, जहां धूल नहीं है।

5. ग्रीन बेल्ट : लोनी के ज्यादातर क्षेत्रों में हरियाली न होना भी प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण हैं। यहां मार्गों के किनारे ग्रीन बेल्ट के बजाय अतिक्रमण ही दिखाई देता है। लाल बाग कालोनी के पास वन विभाग अधिकृत भूमि है। यहां भी हरियाली के नाम पर कीकर के पेड़ हैं। अधिकांश भूमि में नालों का पानी भरा हुआ है। इस कारण घास भी नहीं होती। अगर हरियाली बढ़ाई जाए तो प्रदूषण से काफी हद तक राहत मिलेगी।

विधायक बोले- सभी जिम्मेदार विभागों से कर चुके प्रदूषण रोकने की मांग

लोनी विधायक नंद किशोर गुर्जर का कहना है कि हम जिला प्रशासन, तहसील और प्रदूषण बोर्ड से लगातार लोनी की हवा को खराब होने से रोने की मांग कर रहे हैं। दिल्ली से तार लाकर लोनी में जलाया जाता है। बीते दिनों मैंने खुद मौके पर पहुंचकर छापेमारी कराई थी। डीएम को काल करके मैंने शिकायत की है, उन्होंने कमेटी गठित करने की बात कही है।

लोनी का प्रदूषण मापक ही कर दिया बंद

जिले में लोनी, इंदिरापुरम, वसुंधरा व संजय नगर में प्रदूषण मापक यंत्र लगाए गए हैं। बुधवार को लोनी का मापक यंत्र बंद रहा। अधिकारियों ने इसके पीछे तकनीकी कारण बताया। लोगों का कहना है कि आए दिन यहां का मापक यंत्र बंद कर दिया जाता है।

विशेषज्ञों ने प्रदूषण कम करने के ये दिए सुझाव

  • सार्वजनिक परिवहन और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना चाहिए।
  • निर्माण स्थलों पर डस्ट कंट्रोल के नियम सख्ती से लागू होने चाहिए।
  • अवैध फैक्ट्रियों के संचालन पर पूरी तरह से रोक लगे।
  • ई-वेस्ट व तार जलाने पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।
  • लोनी में हरित क्षेत्र बढ़ाने से हवा की गुणवत्ता में सुधार संभव।

ये कार्य करने के हैं दावे

  • अवैध फैक्ट्री सील करना।
  • ई-वेस्ट को जलाने से रोकने के लिए छापेमारी।
  • सड़कों पर पानी का छिड़काव।
  • पुराने वाहनों पर कार्रवाई।

यह भी पढ़ें- गाजियाबाद के लोनी में प्रदूषण फैलाने वाली चार फैक्ट्रियां सील, प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

यह भी पढ़ें- गाजियाबाद के वसुंधरा में UPPCB की नाक के नीचे प्रदूषण बेकाबू, साफ हवा को तरसे लोग 

 

 

टूटी सड़कों व कच्चे फुटपाथों पर वाहन गुजरते ही धूल का गुबार उड़ता है, जो सीधे हमारे फेफड़ों में पहुंच रहा है। विभागों के पास धूल को रोकने की कोई योजना नहीं है।


-

-राजीव शर्मा, स्थानीय निवासी

घरों में अवैध रूप से एल्युमिनियम ढलाई और ई-वेस्ट व तारों को जलाकर धातु निकालने का अवैध कार्य किया जा रहा है। इससे सांस लेना तक दूभर हो गया है। अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं करते।


-

-देवेंद्र, स्थानीय निवासी

यहां जाम सबसे बड़ी समस्या है। घर से बाहर निकलते ही जाम में फंस जाते हैं। पुलिस-प्रशासन को जाम मुक्त करने के लिए ठोस योजना बनानी चाहिए।


-

-केपी सिंह, स्थानीय निवासी

निर्माण कार्यों से प्रदूषण को बढ़ावा दिया जा रहा है। धूल और मिट्टी उड़ती है। निर्माण सामग्री ले जाने वाले वाहन भी धूल उड़ाते जाते हैं।


-

-राजकुमार, स्थानीय निवासी

लोनी व अन्य क्षेत्रों में प्रदूषण रोकने के लिए हमें कोई बजट नहीं मिला। प्राथमिकता से कार्रवाई की जा रही है। यहां बीते एक वर्ष में सैंकड़ों अवैध फैक्ट्रियों को सील किया गया है। छिड़काव की जिम्मेदारी नगर पालिका की है। प्रदूषण रोकथाम के लिए निगरानी बढ़ाई जाएगी


-

-अंकित सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड