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गाजियाबाद के वसुंधरा में UPPCB की नाक के नीचे प्रदूषण बेकाबू, साफ हवा को तरसे लोग 

Published: Tue, 17 Mar 2026 04:43 PM (IST)

गाजियाबाद के वसुंधरा में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) कार्यालय के पास ही वायु प्रदूषण बेकाबू है। पिछले पांच वर्षों में ...और पढ़ें

वसुंधरा में छाए धुंध का नजारा। (फाइल फोटो)

वसुंधरा में छाए धुंध का नजारा। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. UPPCB कार्यालय के पास भी प्रदूषण नियंत्रण में विफल

  2. वसुंधरा के लोगों को पांच वर्ष में महज 56 दिन ही साफ हवा मिली

  3. वसुंधरा सेक्टर 16 में यूपीपीसीबी के कार्यालय पर लगा है प्रदूषण मापक यंत्र

राहुल कुमार, साहिबाबाद। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी अपनी नाक के नीचे ही बढ़ते प्रदूषण को नहीं रोक पा रहे हैं। फिर हम साफ हवा मिलने की उम्मीद किससे करें। वह खुद साफ हवा में सांस लेने के लिए सालभर वर्षा व तेज हवा चलने का इंतजार करते रहते हैं। जब भी शिकायत लेकर जाते हैं तो कुछ न कुछ नया पाठ पढ़ाकर वापस भेज देते हैं।

अधिकारियों पर ऐसे ही तंज वसुंधरा व जिले के अन्य क्षेत्रों के लोग कस रहे हैं। बीते पांच वर्ष में महज 56 दिन ही साफ हवा मिल सकी है, जबकि इससे ज्यादा 57 दिन लोगों को गंभीर हवा में रहना पड़ा है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है।

गाजियाबाद व हापुड़ के लोगों को साफ हवा मिल सके, इसके लिए वसुंधरा सेक्टर-16 में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड(यूपीपीसीबी) का क्षेत्रीय कार्यालय बनाया गया है। अधिकारी यहीं से बैठकर दोनों जिलों की निगरानी करते हैं। कार्यालय के ऊपर प्रदूषण मापक यंत्र भी लगाया गया है, जो हर समय उनकी नजरों के सामने रहता है। इसके बाद भी हापुड़ व गाजियाबाद के अन्य क्षेत्रों में प्रदूषण रोकथाम तो दूर की बात है वह वसुंधरा में भी नहीं रोक पा रहे हैं।

2025 में महज आठ दिन मिली साफ हवा

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वेबसाइट के बीते पांच वर्ष के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2025 में यहां के लोगों को महज आठ दिन ही साफ हवा मिली। बाकी दिन लोगों को संतोषजनक, मध्यम, खराब, बेहद खराब व गंभीर श्रेणी के प्रदूषण में रहना पड़ा है।

वहीं, सबसे अधिक वर्ष 2023 में 23 दिन हवा साफ मिल सकी। लोगों का कहना है कि इसका मुख्य कारण केवल कार्यालयों में बैठकर ही योजना बनाना है। अगर कागजों में योजना बनने के बजाय जमीन पर कार्य होता तो तो शायद काफी हद तक प्रदूषण से राहत मिल जाती।

वर्ष 2024 में हॉट स्पॉट में शामिल था वसुंधरा

वर्ष 2024 में प्रदूषण नियंत्रण के लिए सात इलाकों को हॉट स्पॉट चिह्नित किए गए थे। इसमें वसुंधरा को भी शामिल किया गया था। अधिकारी यहां प्रदूषण का मुख्य कारण यातायात, निर्माण गतिविधियों, उड़ती धूल आदि को मान रहे हैं। कारण पता होने के बाद भी इन समस्याओं को खत्म करने के लिए कोई उपाय नहीं किए जा सके। हालांकि वर्ष 2025 में वसुंधरा को हाटस्पाट से बाहर कर दिया।

किस वर्ष कितने दिन साफ व गंभीर श्रेणी में रही हवा

वर्ष साफ गंभीर
वर्ष साफ गंभीर
2025 08 20
2024 23 04
2023 08 06
2022 12 07
2021 05 20
कुल 56 57

प्रदूषण के कारण दमे व सांस के मरीज ही नहीं, बल्कि स्वस्थ लोगों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। सांसों पर प्रदूषण का संकट छाया हुआ है।


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-नरेश भाटी, वसुंधरा सेक्टर-तीन

अधिकारी अलग-अलग स्तर पर योजना बनाने के दावे करते हैं, लेकिन हर साल प्रदूषण में ही गुजर जाता है। वसुंधरा के लोगों को ही साफ हवा नहीं मिल पा रही है।

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-रोहित कश्यप, वसुंधरा सेक्टर-15

यूपीपीसीबी का जिस क्षेत्र में कार्यालय है वहां रहकर भी साफ हवा नहीं मिल पा रही है। दूसरे क्षेत्रों के लोग यहां बैठे अधिकारियों से क्या उम्मीद करें।


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-राजेश कुमार यादव, वसुंधरा सेक्टर-पांच

योजनाबद्ध तरीके से प्रदूषण रोकने के लिए कार्य किए जा रहे हैं। इनका असर आने वाले वर्षों में दिखाई देगा। वसुंधरा समेत सभी इलाकों में प्रदूषण रोकना हमारी प्राथमिकता है।


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-अंकित सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, यूपीपीसीबी