13 साल की पीड़ा के बाद थमी हरीश राणा की जिंदगी, छह महीने बाद भी यादों में अटके माता-पिता
हरीश राणा को इच्छामृत्यु मिलने के छह महीने बाद भी उनके पिता अशोक राणा बेटे की यादों में डूबे हैं, ...और पढ़ें

हरीश राणा व उनके पिता की फाइल फोटो।
HighLights
पिता अशोक राणा ने बेटे हरीश के लिए मांगी थी इच्छामृत्यु।
हरीश के अंगदान से कई लोगों को मिला नया जीवन।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इच्छामृत्यु का मार्ग प्रशस्त किया।
दीपा शर्मा, गाजियाबाद। किसी पिता के सामने बेटे की मौत हो जाना उसके लिए दुनिया का सबसे बड़ा दुख है। 13 साल तक बेटे को हर रोज मरते हुए देखकर अशोक राणा ने अपने बेटे हरीश राणा के लिए इच्छामृत्यु मांगी थी।
हरीश राणा को गए हुए करीब छह महीने हो गए हैं, लेकिन पिता के हृदय में हरीश की यादें जीवन भर रहेंगी। घर की दिनचर्या फिर चल पड़ी, आजीविका का सहारा भी मिला और जिंदगी ने धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ ली। मगर हरीश राणा के माता-पिता के लिए समय जैसे उसी कमरे में ठहर गया है, जहां उनका बेटा करीब 13 वर्षों तक जीवन और पीड़ा के बीच जूझता रहा।
छह महीने पहले 24 मार्च को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद हरीश को जीवन रक्षक उपचार से मुक्त कर इच्छामृत्यु दी गई थी। आज उसी कमरे में उसके माता-पिता सोते हैं, लेकिन हर दिन किसी न किसी बात के बहाने हरीश की याद फिर सामने आ जाती है।
राजनगर एक्सटेंशन की राज एम्पायर सोसायटी में रहने वाले पिता अशोक राणा को प्रशासन द्वारा आजीविका के लिए हाल ही में मिले क्योस्क पर सामान खरीदने के लिए आने वाले जो नए लोग होते हैं वह हरीश राणा को लेकर चर्चा करते हैं। लगभग हर दिन हरीश का जिक्र होता है।
किसी की आंखों से देख रहे संस्कार, किसी के सीने में धड़क रहा दिल
हरीश के पिता ने दैनिक जागरण से बातचीत में बताया कि उन्हें अपने बेटे को इस तरह से खोने का दुख है, लेकिन सुकून है कि वह किसी को नया जीवन देकर गए। उनकी आंखें आज भी संसार को देख रही हैं और उनका हृदय आज भी किसी के सीने में धड़क रहा है।

पिता का कहना है कि वह आभारी हैं सुप्रीम कोर्ट, शासन व प्रशासन और उन सभी लोगों के जिन्होंने उनकी मदद की। लंबे समय तक लड़ाई लड़ी और आखिर अपने बेटे को उस दर्द से मुक्ति दिलाने में सक्षम रहे जो पिछले करीब 13 साल से वह झेल रहा था।
जब बेटे के ठीक होने की उम्मीद नहीं रही तब से उनकी इच्छा थी कि बेटे को इच्छामृत्यु देने के साथ उनके शरीर के जो अंग ठीक हैं वह दान किए जाएं। जिससे वह अपने बेटे को इस संसार में महसूस कर सकें। हाल ही में एम्स में हरीश राणा के परिवार को उनके नेत्रदान के लिए सम्मानित भी किया गया।
अपने जैसे लोगों की मुक्ति का मार्ग किया प्रशस्त
हरीश राणा के जीवन के 13 साल लंबे संघर्ष ने न केवल उनके परिवार के धैर्य, सेवा, समर्पण की कठिन परीक्षा ली, बल्कि अब अपने जैसे न जाने कितने लोगों की मुक्ति का मार्ग प्रशस्त कर दिया।
13 साल बाद 11 मार्च 2026 सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए हरीश राणा की परोक्ष इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी। 32 वर्षीय हरीश राणा की 13 साल लंबी एक कठिन जीवन यात्रा पर 24 मार्च 2026 के दिन विराम लगा था।

बता दें कि वर्ष 2013 में 20 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन पीजी की चौथी मंजिल से गिरने के बाद वह फिर कभी नहीं उठ सके थे। परिवार की तमाम कोशिशों के भी वह 2013 से एक जिंदा लाश की तरह बिस्तर पर थे।
क्वाड्रिप्लेजिया से पीड़ित (100 प्रतिशत दिव्यांग) हरीश का शरीर पूरी तरह से निष्क्रिय हो गया था। उनको यूरीन बैग लगा था और नली के सहारे पोषण व पानी दिया जा रहा था।
मुख्यमंत्री को देना चाहते हैं धन्यवाद
अशोक राणा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर धन्यवाद देना चाहते हैं। उनका कहना है कि वह उनके कार्यालय पर जाकर उनसे मिलना चाहते हैं और जो भी शासन प्रशासन से मदद दिलाई उसके लिए धन्यवाद देना चाहते हैं। शासन स्तर से उन्हें आर्थिक मदद मिली और प्रशासन की ओर से कियोस्क प्रदान किया गया।
